Home समाचार अर्थव्यवस्था मजबूत: इस साल जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रहने का...

अर्थव्यवस्था मजबूत: इस साल जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान

508
SHARE

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ तीन साल में सबसे तेज 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (सीएसओ) के अनुसार 2018-19 में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सीएसओ ने कहा कि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार से चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर रहने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के लिए हर तरफ से अच्छी खबर आ रही है। आइये हम जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है।

मोदी सरकार ने 2018 में जुटाये रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये
मोदी सरकार ने 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये जुटाये हैं। चालू वित्त वर्ष के लिये ने सरकार ने विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत अन्य शामिल हैं। विनिवेश में यह तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ 2019 में भी जारी रहने की उम्मीद है।

सिर्फ साढ़े चार साल में जुटाई यूपीए से दोगुनी से ज्यादा राशि
पिछले साढ़े चार साल में सरकार ने विनिवेश के जरिए रिकॉर्ड राशि जुटाई है। विनिवेश के मामले में भी मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है। अपने साढ़े 4 साल के कार्यकाल में एनडीए ने 2,09,896.11 करोड़ रुपए जुटाए जो यूपीए-1 और यूपीए-2 की कुल राशि से करीब दोगुनी ज्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये एक बड़ी रकम जुटाई है। 

मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 5 साल में सबसे ज्यादा
देश में दिसंबर, 2017 में भी मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटीज में तेजी का रुख रहा। नये ऑर्डरों और उत्पादन में तेज बढ़ोतरी के दम पर देश के विनिर्माण क्षेत्र ने दिसंबर में तेज उड़ान भरी और इसका निक्कई पीएमआई सूचकांक नवंबर के 52.6 से बढ़कर 54.7 पर पहुँच गया। दिसंबर में उत्पादन वृद्धि की रफ्तार पांच साल में सबसे तेज रही जबकि नये ऑर्डरों में अक्टूबर 2016 के बाद की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गयी। कंपनियों ने नये रोजगार भी दिये और रोजगार वृद्धि दर अगस्त 2012 के बाद के उच्चतम स्तर पर रही।

कोर सेक्टर में दर्ज की गई 6.8 प्रतिशत की रफ्तार
आठ कोर सेक्टरों में नवंबर 2017 के महीने में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह एक साल में सबसे ऊपरी स्तर पर है। रिफाइनरी, इस्पात और सीमेंट जैसे क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर बढ़ी है। एक साल पहले इसी माह में इन उद्योगों की उत्पादन वृद्धि 3.2 प्रतिशत थी। कोर सेक्टरों की वृद्धि दर अक्तूबर, 2016 के बाद सबसे अधिक है। रिफाइनरी, इस्पात तथा सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर अच्छी रही। इस बार नवंबर में रिफाइनरी उत्पाद की 8.2 प्रतिशत, इस्पात की 16.6 प्रतिशत और सीमेंट क्षेत्र की वृद्धि दर सालाना आधार पर 17.3 प्रतिशत रही। कोर सेक्टरों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट तथा बिजली उत्पादन को रखा गया है।

यूपीए सरकार से काफी ज्यादा है ग्रोथ रेट
यूपीए सरकार के अंतिम तीन सालों की अर्थव्यवस्था की गति पर गौर करें तो ये 2011-12 में 6.7, 2012-13 में 4.5 और 2013-14 में 4.7 प्रतिशत थी। वहीं बीते तीन साल के मोदी सरकार के कार्यकाल पर गौर करें तो 2014-15 में 7.2, 2015-16 में 7.6 थी, वहीं 2016-17 में 7.1 है। जाहिर है बीते तीन सालों में जीडीपी ग्रोथ रेट 7 से ज्यादा रही है। जबकि यूपीए के अंतिम तीन सालों के औसत जीडीपी ग्रोथ रेट 5.3 ही रही है।

विदेशी ऋण में 2.7 प्रतिशत की कमी
केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का विदेशी ऋण 13.1 अरब डॉलर यानि 2.7% घटकर 471.9 अरब डॉलर रह गया है। यह आंकड़ा मार्च, 2017 तक का है। इसके पीछे प्रमुख वजह प्रवासी भारतीय जमा और वाणिज्यिक कर्ज उठाव में गिरावट आना है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च, 2017 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और विदेशी ऋण का अनुपात घटकर 20.2% रह गय, जो मार्च 2016 की समाप्ति पर 23.5% था। इसके साथ ही लॉन्ग टर्म विदेशी कर्ज 383.9 अरब डॉलर रहा है जो पिछले साल के मुकाबले 4.4% कम है।

बेहतर हुआ व्यापार संतुलन
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2013-14 में अनुमानित व्‍यापार घाटा 62448.16 मिलियन अमरीकी डॉलर का था, वहीं अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान 38073.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। जबकि अप्रैल-जनवरी 2015-16 में यह 54187.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से भी 29.7 प्रतिशत कम है। यानी व्यापार संतुलन की दृष्टि से भी मोदी सरकार में स्थिति उतरोत्तर बेहतर होती जा रही है और 2013-14 की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक सुधार आया है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

कैशलेस अभियान से आई पारदर्शिता
रिजर्व बैंक के अनुसार 4 अगस्त तक लोगों के पास 14,75,400 करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थे। जो वार्षिक आधार पर 1,89,200 करोड़ रुपये की कमी दिखाती है। जबकि वार्षिक आधार पर पिछले साल 2,37,850 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई थी।

Leave a Reply