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मोदी सरकार की नीतियों से 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना आसान: नाबार्ड सर्वे के नतीजे

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर यानि कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय कर रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उनकी सरकार ने किसान हितैषी कई योजनाओं पर प्रभावी तरीके से अमल करके दिखाया है। इसका परिणाम ये आया है कि लक्ष्य तय समयसीमा से पहले भी पूरा होने की उम्मीद है। इस बात की तस्दीक करती है हाल में आई राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण बैंक (NABARD) की एक सर्वे रिपोर्ट।

सर्वे नतीजों में छुपी किसानों की तरक्की
नाबार्ड के सर्वे के जो नतीजे हैं वे देश में किसानों की तरक्की की कहानी कहते हैं। सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि पहले के मुकाबले देश के छोटे और सीमांत किसानों की आय में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 48 प्रतिशत किसान परिवार हैं जिनकी 2015-16 में वार्षिक आय 1.07 लाख रुपये हो गई। 2012-13 में यह आय महज 77.11 हजार रुपये थी। 29 राज्यों में से 19 में आय में बढ़ोतरी की दर 12 प्रतिशत से ऊपर दर्ज की गई जबकि बाकी में 10.5 प्रतिशत।

मौजूदा रफ्तार से आय दोगुनी से भी ऊपर होगी
नाबार्ड हर तीन साल में यह सर्वे कराता है। इस अखिल भारतीय समावेश सर्वेक्षण (NAFIS) के आधार पर रिपोर्ट जारी की जाती है। यह सर्वेक्षण 2016-17 में देश भर में किया गया था जिसमें 40,327 ग्रामीण परिवार शामिल थे। इस सर्वे से सामने आई 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर सीधे-सीधे यही बता रही है कि अगर मौजूदा रफ्तार भी बनी रही तो, 2022 में किसानों की आय दोगुनी से कहीं आगे भी जा सकती है। गौर करने वाली बात है कि अन्नदाताओं की आय को दोगुना करने के लिए 10.4 प्रतिशत की वृद्धि दर की ही जरूरत है।

मोदी सरकार की कृषि नीतियों पर मुहर
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन डॉक्टर अशोक दलवई का कहना है कि नाबार्ड की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार की नीतियां सही दिशा में जा रही हैं। उनका कहना है कि किसानों की उपज को आय में तब्दील करने के प्रयासों के उम्मीद से बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि राष्ट्रीय स्तर पर किसानों की आय वृद्धि दर 10.4 प्रतिशत रखी गई है और जो सर्वे से जो वृद्धि दर सामने आई है वह उससे कहीं अधिक है।

लागत से डेढ़ गुना एमएसपी भरेगी नई रफ्तार
गौर करने वाली बात है सरकार ने किसानों की डबल इनकम के लिए कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही ऐसे कई और उपाय किए हैं जिनसे उनकी अतिरिक्त आय हो सके। सरकार के कदमों में सबसे नया है एमएसपी को लागत का डेढ़ गुना किया जाना। कुछ फसलों के मामलों में तो इसे लागत के दोगुने तक भी किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को डेढ़ गुना मूल्य देने के लिए बाजार मूल्य और एमएसपी में अंतर की रकम सरकार वहन करेगी।  सरकार का पूरा प्रयास है कि खेत से उपभोक्ता तक सामान की जो कीमत बढ़ती है उसका लाभ किसानों को मिले।

‘बीज से बाजार’ तक की महत्वपूर्ण पहल
किसानों को सशक्त करने के लिए ‘बीज से बाजार तक’ मोदी सरकार की एक अनुपम पहल है। जैसा कि नाम से भी स्पष्ट है, इस पहल के अंतर्गत पूरे फसल चक्र में किसानों के लिए कृषि कार्य को आसान बनाने की व्यवस्था है। यानि किसानों के लिए बीज हासिल करने से लेकर उपज को बाजार में बेचने तक का प्रावधान है। इस व्यवस्था में सबसे पहले बुआई से पहले किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है जिसमें कृषि ऋण की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के बजट में कृषि ऋण के रूप में रिकॉर्ड 11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

उपज की उचित बिक्री के इंतजाम पर जोर
देश में 86 प्रतिशत से ज्यादा छोटे या सीमांत किसान हैं। इनके लिए मार्केट तक पहुंचना आसान नहीं है। इसलिए इन्हें ध्यान में रखते हुए मौजूदा सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर है। इसके लिए सरकार 22 हजार ग्रामीण हॉट को ग्रामीण कृषि बाजार में बदलने की तैयारी चल रही है जिसके बाद इन्हें APMC और e-NAM प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट कर दिया जाएगा। 2,000 करोड़ रुपये से कृषि बाजार और संरचना कोष का गठन होगा। e-NAM को किसानों से जोड़ा गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य मिल सके। अब तक देश की लगभग 585 मंडियों को ऑनलाइन जोड़ा जा चुका है। e-Nam से जुड़ने वाली हर मंडी को 75 लाख रुपये की मदद का प्रावधान है। इसके साथ ही कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी सरकार ने रखा है। 

किसान संपदा योजना से सप्लाई चेन को मजबूती
मोदी सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के जरिए खेत से लेकर बाजार तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना शुरू की गई जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों की कमियों को पूरा करना, खाद्य प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण करना है। 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से वर्ष 2019-20 तक करीब 334 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का संचय किया जा सकेगा। इससे देश के 20 लाख किसानों को लाभ होगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी निकलने वाले हैं।  गौर करने वाली बात है कि इस योजना को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में 100 प्रतिशत FDI के सरकार के फैसले से भी नया बल मिला है।

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