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मोदी राज में भारत को मिली अंधेरे से आजादी, इस साल देश का हर घर होगा रौशन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले चार साल में ऊर्जा सेक्टर को रौशन कर दिया है। हर गांव में बिजली पहुंचाने के बाद अब मोदी सरकार हर घर को रौशन करने की मुहिम चला रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ की शुरुआत की। हालांकि इसके तहत मार्च 2019 तक सभी घरों को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन मोदी सरकार लक्ष्य से काफी पहले दिसंबर, 2018 तक सभी घरों में बिजली पहुंचा देना चाहती है। 11 अक्‍टूबर, 2017 से लेकर अब तक 60.34 लाख घरों में बिजली पहुंचाई गई। इस योजना का फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो पैसों की कमी के चलते अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं ले पाए थे। यह उन चार करोड़ परिवारों के घर में नई रोशनी लाने के लिए है जिनके घरों में आजादी के 70 साल के बाद भी अंधेरा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना (डीडीयूजीकेवाई) के तहत देश के सभी गांवों का तय समय से पहले ही विद्युतीकरण कर दिया गया है। इसपर 75,893 करोड़ रुपये का खर्च आया है।

26 मई 2014 को प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण के समय तक देश में बिजली की हालत बहुत ही खराब थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में देश आज बिजली निर्यात भी करने लगा है। आइए एक नजर डालते हैं पिछले चार वर्षों के दौरान विद्युत मंत्रालय की उपलब्धियों पर-

पहली बार बिजली निर्यातक बना देश
चार साल पहले देश अभूतपूर्व बिजली संकट झेल रहा था, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि अब देश में खपत से अधिक बिजली उत्पाद होने लगा है। पिछले चार साल में बिजली उत्पादन की क्षमता 1 लाख मेगावाट बढ़ी है। मार्च 2014 के 2,43,029 मेगावाट से बढ़कर मार्च 2018 में 3,44,002 मेगावाट हो गई है। बिजली की कमी 4.2 प्रतिशत (वित्त वर्ष 2013-14 में) से घटकर 0.7 प्रतिशत (वित्त वर्ष 2017-18 में) के स्‍तर पर आ गई। केंद्रीय विधुत प्राधिकरण के अनुसार भारत ने पहली बार वर्ष 2016-17 ( फरवरी 2017 तक) के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को 579.8 करोड़ यूनिट बिजली निर्यात की। वित्त वर्ष 2017-18 में नेपाल, बांग्‍लादेश और म्‍यांमार को 7203 एमयू बिजली की आपूर्ति की गई।

बदल गई पॉवर सेक्टर की तस्वीर
मोदी सरकार की नीतियों के चलते आज पारंपरिक और गैर-पारंपरिक ऊर्जा का भी भरपूर उत्पादन होने लगा है। सबसे बड़ी बात भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं बना है, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बाजार उभर कर सामने आया है। उर्जा क्षेत्र में इस कायापलट के पीछे उन योजनाओं के क्रियान्यवन में बेहतर तालमेल रहा है जिसे पिछले चार सालों में सरकार ने लागू किया है। उर्जा क्षेत्र की छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने के लिए लागू की गई इन योजनाओं से बहुत बड़े परिणाम सामने आए हैं। देश के हर घर को चौबीसों घंटे बिजली देने का लक्ष्य 2022 है, लेकिन जिस गति से काम चल रहा है उससे अब यह प्राप्त कर लेना आसान लगने लगा है, पहले यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि देश में ऐसा भी हो सकता है।

नई कोयला नीति
नरेंद्र मोदी सरकार की कोयला नीति काम करने लगी है। इसके चलते देश अब उर्जा संकट से लगभग उबर चुका है। हाल ही में ‘शक्ति’ नाम से एक नई कोल लिंकेज पॉलिसी को मंजूरी दी गई है जो नए ताप बिजली घरों को आसानी से कोयला ब्लॉक उपलब्ध कराएगा। साथ ही पुराने एवं अटके पड़े बिजली घरों को भी कोयला उपलब्ध हो सकेगा। यूपीए सरकार ने वर्ष 2007 में कोल लिंकेज नीति लाई थी जिसके तहत 1,08,000 मेगावाट क्षमता की बिजली परियोजनाओं को कोयला देने का समझौता किया गया था, लेकिन उस दौरान कोयला उत्पादन नहीं बढ़ पाने की वजह से इनमें से अधिकांश परियोजनाएं अटकी हुई थी। इसके बाद कई परियोनजाओं को कोयला आयात करने की अनुमति भी दी गई, लेकिन घोटाले और मुकदमों के कारण वो लागू न हो सकीं। अब जब देश में कोयला उत्पादन की स्थिति सुधरी है तो इन परियोजनाओं को भी नए सिरे से कोयला आवंटित करने की तैयारी की गई है।

परमाणु बिजली उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता
मोदी सरकार ने 10 नए Pressurized Heavy-Water Reactors (PHWR) के निर्माण का फैसला किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये काम अपने वैज्ञानिक करेंगे और कोई भी विदेशी मदद नहीं ली जाएगी। इन दस नए स्वदेशी न्यूक्लियर पावर प्लांट से 7,000 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी। इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि भारत भी विश्व के अन्य देशों को Pressurized Heavy-Water Reactors की तकनीक देने वाला देश बन जायेगा, जो मेक इन इंडिया योजना को बहुत अधिक सशक्त करेगा। इसके अतिरिक्त 2021-22 तक 6,700 मेगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लिए अन्य न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का भी काम चल रहा है। इस समय देश में कुल 22 न्यूक्लियर पावर प्लांट बिजली पैदा कर रहे हैं जिनसे कुल 6,780 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।

UDAY से देश का भाग्योदय
देश की बिजली वितरण कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति में सुधार करके उनको पटरी पर लाने के लिए Ujwal DISCOM Assurance Yojana (UDAY) लागू किया गया। सभी घरों को 24 घंटे किफायती एवं सुविधाजनक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना ही इस योजना का मूल उद्देश्य है। यह योजना 20 नवंबर, 2015 से शुरू की गई इससे विरासत में मिली 4.3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की समस्या का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान निकाल लिया। आज देश के सभी राज्य इस योजना से जुड़ चुके हैं। उदय के तहत डिस्‍कॉम द्वारा 20,000 करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की ब्‍याज लागत बचाई गई। विश्‍व बैंक के ‘बिजली प्राप्ति में सुगमता’ सूचकांक में भारत की रैंकिंग वर्ष 2014 के 111वें पायदान से सुधर कर वर्ष 2018 में 29वें पायदान पर पहुंच गई।

उत्तर प्रदेश अंतिम राज्य था जो 14 अप्रैल 2017 को इस योजना में शामिल हुआ है। इसी साल जनवरी से UDAY वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन की शुरुआत भी की गई है। इसे विभिन्न राज्यों के DISCOM में हो रहे कार्यों और वित्तीय स्थिति पर निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है। इसका काम डाटा को राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर में एकीकृत करके रखना है। इससे केन्द्रीय मंत्रालय स्तर पर DISCOM के काम पर निगरानी रखना आसान हो गया है। जिससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है, और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।

UJALA (Unnat Jyoti Affordable LEDs for ALL)

प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जनवरी 2015 को 100 शहरों में पारंपरिक स्ट्रीट और घरेलू लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाने के कार्यक्रम की शुरूआत की थी। इसके अंतर्गत अब तक 30.01 करोड़ एलईडी बल्ब लगाए जा चुके हैं, जिससे प्रति वर्ष 15,500 करोड़ रुपये की बचत हुई। इसके साथ ही 99 करोड़ और एलईडी बल्‍बों का वितरण उद्योग जगत द्वारा किया गया है। पर्यावरण के लिए भी यह कारगर साबित हो रहा है। सबसे बड़ी बात है कि इसके चलते खर्च और बिजली की तो बचत हो ही रही है प्रकाश भी पहले से काफी बढ़ गया है। यही नहीं भारी मात्रा में LED बल्बों की खरीद होने के चलते उसकी कीमत भी 135 रुपये के बजाय 80 रुपये प्रति बल्ब बैठ रही है।

2030 तक सौर उर्जा से बदल जाएगी देश की तकदीर
केंद्र सरकार नवीकरणीय ऊर्जा पर भी जोर दे रही है। इसके तहत सौर ऊर्जा का उत्पादन मौजूदा 20 गीगावॉट से बढ़ाकर साल 2022 तक 100 गीगावॉट करने का लक्ष्य है। सबसे बड़ी बात है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए सरकार 2030 तक देश के सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल देने का लक्ष्य लेकर काम में जुटी है। इससे सालाना 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक fossil fuels (जीवाश्म ईंधन) की बचत होगी। सरकार की ओर से कराए गए एक रिसर्च के अनुसार 2030 तक राजस्थान की केवल एक प्रतिशत भूमि से पैदा हुई सौर ऊर्जा से देशभर के सभी वाहनों के लिए पर्याप्त ईंधन का इंतजाम हो सकता है।

पारदर्शिता लाने और सूचना के व्यापक प्रचार के लिए विद्युत मंत्रालय की ओर से लांच एप्स:

सौभाग्य- घरों के बिजलीकरण की निगरानी के लिए एप।

विद्युत प्रवाह- यह मोबाइल/वेब एप चालू मांग पूर्ति के बार में वास्तविक समय पर सूचना उपलब्ध कराता है, बिजली की कमी और आवश्यकता से अधिक उपलब्ध बिजली तथा बिजली विनिमय में दरों की जानकारी उपलब्ध कराता है।

उजाला- यह एप पूरे देश में एलईडी वितरण के बारे में वास्तविक समय में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराता है।

ऊर्जा मित्र- यह एप बिजली उपलब्धता निगरानी और एसएमएस के जरिए बिजली कटौती सूचना प्रदान करता है।

मेरिट- यह एप सीमांत परिवर्तित लागत संबंधी सूचना तथा स्रोत के अनुसार बिजली खरीद की जानकारी देता है।

उदय- यह एप लोगों को 26 प्रमुख प्रदर्शन मानकों के आधार पर डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियां) की तुलना करने की अनुमति देता है।

ऊर्जा- यह शहरी वितरण क्षेत्र के लिए सूचना देने वाला एप है। यह आईपीडीएस के अंतर्गत बनाई गई आईटी प्रणाली से उपभोक्ता केंद्रित मानकों को ग्रहण करता है।

तरंग- यह आईटी वेब/मोबाइल आधारित प्लेटफॉर्म है जो देश में अंतर-राज्यीय और राज्य के भीतर सम्प्रेषण परियोजनाओँ की स्थिति उपलब्ध कराता है। यह प्लेटफॉर्म संभावित अंतर-राज्य और राज्य के अंदर की सम्प्रेषण परियोजनाओँ को दिखाता है।

दीप ई-नीलामी- यह पोर्टल ई-रिवर्स नीलामी सुविधा के साथ साझा ई-नीलामी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा ताकि व्यापक नेटवर्क के जरिए राष्ट्रव्यापी बिजली खरीद की जा सके जिससे बिजली खरीद प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता आए।

ऐश ट्रैक- यह एप राख के बेहतर उपयोग के लिए राख उपयोगकर्ताओं और बिजली संयंत्रों को जोड़ता है।

2022 तक देश के हर घर को चौबीसों घंटे बिजली देने का लक्ष्य है। जिस गति से ऊर्जा के क्षेत्र में मौजूदा सरकार में काम चल रहा है उससे अब यह प्राप्त कर लेना आसान लगने लगा है। पहले यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि देश में ऐसा भी हो सकता है।

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