Home विशेष फाइल दबा कर बैठे बाबुओं पर सख्त एक्शन लेगी मोदी सरकार

फाइल दबा कर बैठे बाबुओं पर सख्त एक्शन लेगी मोदी सरकार

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सरकारी दफ्तरों में अब फाइलें दबाकर बैठने वाले बाबुओं की अब खैर नहीं है। मोदी सरकार ऐसे सरकारी बाबू का रिकॉर्ड तैयार कर रही है जो आम जनता से जुड़ी किसी फाइल को दबा कर बैठे हैं।  आने वाले दिनों में इसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों के परफॉरमेंस अप्रेजल में किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पॉलिसी में P2G2 की थ्योरी शामिल है। इसका मतलब है- “pro-people pro-active और good governance” यानि सीधे अर्थों में कहें तो काम काज में कोई लेट-लतीफी नहीं। पीएम मोदी अपनी नीतियों में इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि जनता को सरकार के होने का न सिर्फ अहसास हो बल्कि उसे वह धरातल पर दिखे भी। जनता को यह भी लगे कि सरकार उनकी सेवा के लिए तत्पर खड़ी है। मोदी सरकार ने इसी मकसद के तहत ऐसी अनेकों नीतियां लागू की हैं, जिससे लोगों को सरकार के होने का अहसास जमीन पर महसूस हो और लगे कि सरकार उनके द्वार पर ही तो खड़ी है।

भ्रष्ट अफसरों को नहीं मिलेगा पासपोर्ट
मोदी सरकार ने हाल ही में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में संलिप्त सरकारी अधिकारियों के पासपोर्ट जारी करने पर रोक लगा दी है। कार्मिक मंत्रालय के मुताबिक भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अफसरों को पासपोर्ट के लिए सतर्कता विभाग से मंजूरी नहीं दी जाएगी। इस फैसले के तहत अगर किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों और जांच लंबित हो, प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हो, सरकारी निकाय द्वारा मामला दर्ज हो या वह सस्पेंड हो तो पासपोर्ट सतर्कता मंजूरी को रोका जा सकता है। अगर किसी आपराधिक मामले में जांच एजेंसी द्वारा कोर्ट में आरोप पत्र दायर किया जा चुका हो और केस पेंडिंग हो, भ्रष्टाचार निरोधक कानून या किसी अन्य आपराधिक मामले में सक्षम प्राधिकरण द्वारा जांच की मंजूरी दी जा चुकी हो और अनुशासनात्मक कार्रवाई में अधिकारी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया हो और कार्यवाही पेंडिंग हो तो ऐसी स्थिति में भी सतर्कता विभाग से पासपोर्ट के लिए मंजूरी नहीं मिलेगी। भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ इस कार्रवाई को मोदी सरकार का बड़ा कदम बताया जा रहा है। मोदी सरकार के इस फैसले से भ्रष्टाचार करने के बाद विदेश भागने वाले नौकरशाहों पर लगाम लगेगी।

3 साल से मलाईदार पद पर बैठे अफसरों पर नजर
प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी तंत्र से भ्रष्टाचार के खात्मे का संकल्प लिया है। सत्ता में आने के बाद से ही पीएम मोदी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रही है। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार के कड़े रुख ने करप्शन में डूबे अधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी है। भ्रष्ट अफसरों को पासपोर्ट जारी करने पर रोक, अधिकारियों की अवैध कमाई को ‘आधार’ के माध्यम से पता लगाने जैसे कदमों के बाद अब मोदी सरकार ने सभी मंत्रालयों को मलाईदार पदों पर वर्षों से विराजमान अधिकारियों की सूची तैयार करने को कहा है। केंद्र सरकार ने तीन वर्षों से अधिक समय से अहम पदों पर बैठे अफसरों के ट्रांसफर की रणनीति बनाई है।

भ्रष्टाचार के खात्मे की नीति की तहत मोदी सरकार ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं कि वो अपने-अपने केंद्रीय विभागों में संवेदनशील पदों की पहचान करें। सरकार इन संवेदनशील पदों की एक बार फिर से समीक्षा करना चाहती है। सरकारी संस्थाओं में संवेदनशील उन पदों को जहां भ्रष्टाचार की संभावना सबसे अधिक होती है। सरकार ने ऐसे पदों पर 3 वर्षों से जमे अधिकारियों को हटाने की रणनीति बनाई है। इतना ही नहीं भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसने के लिए सभी विभागों के सतर्कता विंग से तत्काल कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

‘आधार’ से पता लगाई जाएगी अफसरों की अवैध कमाई
केंद्रीय सतर्कता आयोग का कहना है कि विभिन्न प्रकार के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति सौदों के लिए आधार अनिवार्य है, ऐसे में इसका इस्तेमाल भ्रष्ट अधिकारियों की अवैध कमाई का पता लगाने के लिए करने पर विचार किया जा रहा है। आधार नंबर के माध्यम से यह जानने में मदद मिल सकती है कि कार्डधारक द्वारा किया गया वित्तीय सौदा उसकी आमदनी के दायरे में है या नहीं। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के वी चौधरी के मुताबिक आयोग ने एक कॉन्सेप्ट पेपर तैयार किया है। इसके पीछे विचार, परिचालन प्रक्रिया बनाने या संभव हो सके तो सॉफ्टवेयर तैयार करने का है। इससे यदि किसी भी अधिकारी के भ्रष्टाचार की जांच का फैसला किया जाता है तो अन्य विभागों के साथ बिना किसी अड़चन के संपर्क किया जा सकेगा और ‘आधार’ का इस्तेमाल कर आवश्यक जानकारी जुटाई जा सकेगी। जाहिर है कि शेयरों की खरीद-फरोख्त, बड़े वित्तीय लेन देन, अचल संपतियों की खरीद में आधार को अनिवार्य करने तथा बैंक एकाउंट से आधार के लिंक करने, पैन कार्ड को आधार से जोड़ने से किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाना आसान हो गया है। सीवीसी के मुताबिक आधार के इस्तेमाल से अफसरों की आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया जा सकता है। यानी अब ऐसे भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं जो अपनी काली कमाई को संपत्ति खरीदने और शेयर खरीदने में खपाते थे।

जाहिर है आप यह कह सकते हैं कि काम काज के अंदाज में बदलाव दिखने लगे… जनता को राज बदलने का अहसास होने लगे… तो समझिये सरकार है। …और अगर जनता को यह भी लगने लगे कि सरकार उनके द्वार पर खड़ी है तो समझिये मोदी सरकार है।

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