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प्राथमिकता में किसान: बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाएगी मोदी सरकार, 75 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की बेहतरी के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले पांच साल में मोदी सरकार ने किसानों के हित में कई योजनाएं लॉन्च की हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य 2022 तक देश के किसानों की इनकम को दोगुना करना है और इस लक्ष्य को पाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। अब मोदी सरकार बंजर भूमि को कृषि कार्य योग्य बनाने जा रही है। बंजर जमीन पर खेती ना के बराबर होती है। बंजर भूमि वाले इलाके में रोजगार के अवसर भी कम होते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को कृषि उपयोग लायक बनाने का लक्ष्य रखा है। इससे करीब 75 लाख लोगों को रोजगार भी मिलेगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने 2019 का जो‘बंजर भूमि एटलस- 2019’ जारी किया है, उसके अनुसार 2008-09 की तुलना में 2015-16 में बंजर जमीन में कमी आई है। यह एटलस भूमि संसाधन विभाग और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के सहयोग से बनाया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने तय किया लक्ष्य
भारत ने पहले 2.1 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपयोग में लाये जा सकने योग्य बनाने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित सम्मेलन (कॉप-14) की उच्चस्तरीय बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को दुरुस्त करने की महत्वाकांक्षा रखता है। इसके अंतर्गत जमीन की उत्पादकता और जैव प्रणाली को बहाल करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें बंजर हो चुकी खेती की जमीन के अलावा वन क्षेत्र और अन्य परती जमीनों को केंद्र में रखा जाएगा। जानकारों का कहना है कि इस संकट से निपटने के लिए जैविक खेती बड़ा विकल्प है। आर्गेनिक खेती बढ़ेगी तो जमीन बंजर होने से बचेगी।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार हमेशा किसानों के उन्नति के बारे में ही सोचती है। एक नजर डालते हैं उन योजनाओं पर जो किसानों के हित में चलाई जा रही हैं-

गेहूं और दलहनों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी
किसानों की इनकम बढ़ाने के उद्देश्य से दिवाली से पहले मोदी सरकार ने देश के किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। मोदी सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 85 रुपये बढ़ाकर 1,925 रुपये क्विंटल कर दिया है। वहीं, दलहनों के एमएसपी में 325 रुपये क्विंटल तक की वृद्धि की गई है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय किया गया।

किसानों की आय बढ़ाने की पहल के तहत मोदी सरकार ने चालू वर्ष के लिए रबी फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद चालू फसल वर्ष के लिए जौ का एमएसपी भी 85 रुपये बढ़ाकर 1,525 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है जो कि पिछले साल 1,440 रुपये प्रति क्विंटल था। दाल की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मसूर का एमएसपी 325 रुपये बढ़ाकर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया जो पिछले साल 4,475 रुपये प्रति क्विंटल पर था।

इसी प्रकार, चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 255 रुपये बढ़ाकर 4,875 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इससे पिछले साल यह 4,620 रुपये प्रति क्विंटल था। तिलहन के मामले में रेपसीड/सरसों का एमएसपी 2019-20 के लिए 225 रुपये बढ़ाकर 4,425 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। फसल वर्ष 2018-19 में यह 4,200 रुपये प्रति क्विंटल था। साफ्लावर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 270 रुपये बढ़ाकर 5,215 रुपये क्विंटल किया गया है। इससे पिछले साल इसका एमएसपी 4,945 रुपये क्विंटल था।

मोदी सरकार की e-NAM योजना ने बनाया रिकॉर्ड, 1.65 करोड़ किसान ऑनलाइन बेच रहे हैं उपज
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते पांच वर्षों में किसानों की इनकम बढ़ाने और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई प्रयास किए हैं। इन्हीं में से एक योजना है e-NAM यानि राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना। किसानों को बाजार उपलब्ध कराने की e-NAM योजना यानि ऑनलाइन मंडी की योजना हिट हो गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक देश के करीब पौने दो करोड़ किसान इस ऑनलाइन मंडी से रजिस्टर्ड हो चुके हैं। साल 2017 तक e-NAM से सिर्फ 17,000 किसान ही जुड़े थे। ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि पोर्टल है. जो पूरे भारत में मौजूद एग्री प्रोडक्ट मार्केटिंग कमेटी को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करती है। इसका मकसद एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बाजार उपलब्ध करवाना है। इससे फायदे को देखते हुए किसान तेजी से इसके साथ जुड़ रहे हैं। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में ये योजना लाभकारी सिद्ध हो रही है।

अब मोबाइल एप से किराए पर मंगा सकेंगे आधुनिक कृषि मशीनरी
मोदी सराकर किसानों को हर वो सुविधा दे रही है, जिससे उनकी कृषि लागत कम हो और इनकम बढ़े। छोटे किसानों की सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि वे खेती-बाड़ी में काम आने वाले अत्याधुनिक कृषि यंत्रों को खरीद नहीं सकते हैं। इसलिए मोदी सरकार ने अब छोटे किसानों के एक मोबाइल एप लॉन्च किया। ‘सीएचसी फार्म मशीनरी’ मोबाइल एप के जरिए किसान अपने खेत के 50 किलोमीटर दायरे में उपलब्ध खेती के उपकरण को मंगा सकेंगे। इस एप को बहुभाषी बनाया गया है। यह एप हिंदी और अंग्रेजी समेत 12 भाषाओं में उपलब्ध है। इस मोबाइल एप्लीकेशन पर अभी तक 40 हजार से भी अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर पंजीकृत हो चुके हैं। इनके पास 1.20 लाख से भी अधिक उपकरण उपलब्ध हैं। मोदी सरकार को उम्मीद है कि इससे आम किसानों, कम जोत वाले सीमांत किसानों को अधिक लाभ होगा, क्योंकि वे ज्यादा महंगे उपकरण खरीद नहीं सकते। इन उपकरणों के उपयोग से किसानों की लागत कम होगी, उपज बढ़ेगी और उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।

‘प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना’ से 5 करोड़ लघु और सीमांत किसानों का जीवन होगा सुरक्षित
देश के अन्नदाताओं की आमदनी को दोगुना करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार कृतसंकल्प है। इस दिशा में पिछले 5 वर्षों के दौरान ‘पीएम किसान योजना’ समेत कई योजनाओं की शुरूआत की जा चुकी है और इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर, 2019 को झारखंड की राजधानी रांची से ‘प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना’ का शुभारंभ किया। ‘प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना’ से 5 करोड़ लघु और सीमांत किसानों का जीवन सुरक्षित होगा। ऐसे किसानों को 60 वर्ष की आयु होने पर न्यूनतम 3000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाएगी। इस योजना से 12 सितंबर तक करीब 8.36 लाख किसान खुद को रजिस्ट्रर करवा चुके हैं।

प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना का मकसद किसानों को सामाजिक सुरक्षा कवच उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत 18 से 40 वर्ष के उम्र के किसानों का रजिस्ट्रेशन हो सकेगा। इस योजना की तहत जो राशि किसान जमा करेगा उतनी ही सरकार भी जमा करवाएगी। अगर किसी की उम्र 29 साल के आसपास है तो उसे करीब 100 रुपये देने होंगे। इससे कम उम्र के लोगों को कम पैसा देना होगा और इससे ज्यादा के लोगों को थोड़ा सा ज्यादा देना होगा। इस योजना का लाभ वो किसान ले सकते हैं जिनके पास दो हेक्टेयर तक कृषि भूमि होगी। 18 से 40 वर्ष तक आयु के किसान इससे जुड़ सकते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 55 रुपये हर महीने जमा करवाने होंगे। देश के अन्नदाताओं को फायदा पहुंचाने वाली इस योजना से सरकारी खजाने पर 10,774.5 करोड़ सालाना बोझ पड़ेगा।

मोदी सरकार ने गैर-यूरिया खादों की बढ़ाई सब्सिडी
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने वर्ष 2019-20 के लिए फॉस्‍फोरस और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों के लिए पोषण आधारित सब्सिडी दरों के निर्धारण के लिए उर्वरक विभाग के प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी दी। सल्फर खाद पर 3.56 रुपये, नाइट्रोजन वाली खाद पर 18.90 रुपये, फॉस्फोरस वाली खाद पर 15.21 रुपये, जबकि पोटाश खाद पर 11.12 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दी गई है। इस फैसले से चालू वित्त वर्ष में खजाने पर कुल 22,875 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। सरकार के इस कदम से किसानों को संतुलित खाद का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

अब सीधे खाते में जमा होगी खाद सब्सिडी
मोदी सरकार ने अब 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की खाद सब्सिडी को सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर को लेकर बड़ा कदम उठया है। सरकार अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत सीधे किसानों के बैंक खातों में खाद सब्सिडी ट्रांसफर करेगी। इसके तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के दूसरे चरण की सरकार ने 10 जुलाई को शुरुआत की। डीबीटी 2.0 की शुरुआत करते हुए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि इससे योजना में पारदर्शिता आएगी और उर्वरक की आपूर्ति में सहूलियत हो जाएगी। डीबीटी डैशबोर्ड का प्रावधान किया गया है, जिससे हर तरह की जानकारी कभी भी हासिल की जा सकती है और खाद की मांग, आपूर्ति व उपलब्धता को जांचा जा सकता है। नई व्यवस्था के तहत खाद के उत्पादन, आयात और उसका भंडारण कहां और कितना किया गया है, उसकी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकेगी। 

अब किसानों को आसानी से मिलती है खाद
कांग्रेस की सरकारों के दौरान किसानों को खेती के लिए उर्वरक लाने में जान के लाले पड़ जाते थे। सरकारी खाद की दुकानों पर किसानों का अधिक समय लाइन लगाने और खाद लाने में बीत जाता था। इन लाइनों में खाद न मिलने के कारण कई राज्यों में अनेकों बार हिंसक घटनाएं हुईं। लेकिन अब देश में यह बीते दिनों की बातें हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने नीम कोटिंग का ऐतिहासिक फैसला लेकर कालाबजारी को पूरी तरह से बंद कर दिया, अब रासायनिक उर्वरकों का उपयोग केवल खेतों में ही हो सकता है, पहले की तरह उद्योगों में  इसका उपयोग होना बंद हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरा ऐतिहासिक कदम यह उठाया कि सभी बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों को उत्पादन के लायक बनाकर, देश में उर्वरक उत्पादन को बढ़ा दिया। कांग्रेस की सरकारों के समय से बंद पड़े कई उर्वरक संयंत्रों को पुर्नजीवित किया जा रहा है।

मोदी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए बढ़ाया निर्यात का लक्ष्य
किसानों को फसल की लागत कम करने, उन्हें उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने और उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। अब मोदी सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पाने के लिए कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की योजना बनाई है। वर्ष 2022 तक कृषि निर्यात को मौजूदा 30 बिलियन डॉलर से 60 बिलियन अमरीकी डॉलर यानी दोगुना करने का लक्ष्य है। केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर यह लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

केंद्र में किसान: प्रधान मंत्री किसान पेंशन योजना
लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद मोदी सरकार 2.0 की प्राथमिकता में कृषि क्षेत्र है। मोदी सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में ही किसानों को पेंशन देने का फैसला किया। प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना (PM Kisan Pension Yojana) में अब जॉब करने वाले लोगों की तरह किसानों को भी 60 साल की उम्र के बाद पेंशन मिल पाएगी। इस पेंशन योजना में योगदान करने पर 60 साल की उम्र से हर महीने कम से कम 3000 रुपये की पेंशन मिलेगी। यह स्कीम देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए हैं। इससे तीन साल में पांच करोड़ छोटे और सीमांत किसान लाभांवित होंगे। सरकार तीन वर्ष में अपने अंशदान के रूप में 10774.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी। किसान इस योजना में मासिक अंशदान के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना से प्राप्त लाभ से ही अपना अंशदान करने का विकल्प चुन सकते हैं।

अब देश के सभी किसानों को किसान सम्मान निधि
प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार देश की बागडोर संभालने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही देश के सभी 14.5 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत सालाना 6 हजार रुपये देने का फैसला किया। वर्ष 2019-20 में केंद्र सरकार इस स्कीम पर 87,217.50 करोड़ रुपये खर्च करेगी। आपको बता दें कि इस स्कीम को इसी साल 24 फरवरी को लॉन्च किया गया था। पहले यह योजना सिर्फ छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी। पहले इसके तहत 12 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान कवर थे, लेकिन सरकार बनने के बाद सभी 14.5 करोड़ किसानों के लिए इसे लागू कर दिया गया।

मोदी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयासरत है। एक नजर डालते हैं केंद्र सरकार के उन फैसलों पर, जिनसे किसानों की राह आसान हुई है और उनकी इनकम भी बढ़ रही है।

हर खेत तक 24 घंटे बिजली पहुंचाने की योजना
हर घर तक बिजली पहुंचाने के बाद मोदी सरकार अब हर खेत तक 24 घंटे बिजली पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए अगले सात-आठ महीने में कृषि क्षेत्र को पर्याप्त बिजली मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए पूरी तरह से अलग फीडर तय किया है, जिससे उन्हें 24 घंटे बिजली मिल सके। इसके साथ ही सरकार की योजना किसानों की लगात कम करने की भी है। सब्सिडी के साथ बिजली मिलने से भी उनकी आय बढ़ेगी।

ई-मंडी को लेकर उठाया जा रहा ये कदम
केंद्र सरकार किसानों को फसल का सही दाम दिलाने के लिए मोदी सरकार ई-मंडी का दायरा बढ़ाने जा रही है। इस समय देश में ई-मंडियों की संख्या 585 है और सरकार इस साल 200 और नई ई-मंडी शुरू करने जा रही है। इससे साल के अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 785 हो जाएगी। ई- मंडियों से राज्यों की बीच आसानी से कारोबार हो सके इसके लिए सभी मंडियों को आपस में जोड़ने का भी काम चल रहा है। न्यूज18 की खबर के अनुसार खरीदारी से पहले कमोडिटीज की क्लालिटी चैक करने के लिए सरकार ने देश की सभी मंडियों में लैब बनाने का फैसला किया है। इन लैब्स में क्वालिटी टेस्ट के बाद किसानों को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। सरकार ने 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित राज्यों की मंडिया जोड़ने की योजना बनाई है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से इनकम बढ़ाने की तैयारी
2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मोदी सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। इसी को देखते हुए अब खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। मोदी सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से देश के किसानों की तकदीर बदलने की तैयारी कर रही है। यह तकनीक किसानों के लिए मुनाफे की खेती साबित हो सकती है। इससे फसल की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी।

अब तक 21 करोड़ को मिला सॉयल हेल्थ कार्ड
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए केंद्र सरकार सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा रही है। सॉयल हेल्थ कार्ड में सॉयल हेल्थ सुधार और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी के साथ खेतों की पोषण स्थिति पर किसानों को सूचना दी जाती है। इसके तहत अब तक करीब 21.84 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। 

सॉयल हेल्थ कार्ड से खेतों की पैदावार की ताकत बढ़ाई
सॉयल हेल्थ कार्ड खेतों की उपज शक्ति मापने का किसानों के हाथ में जबरदस्त हथियार है। अब तक किसी सरकार ने किसानों के खेतों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में खेतों की ताकत के बारे में कभी नहीं सोचा था। सॉयल हेल्थ कार्ड, किसान को यह बता देता है कि उसके खेत में किस तरह के उर्वरक की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी का इस छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण समस्या के समाधान के बारे में सोचना और योजना को लागू करना,यह साबित करता है कि 2022 तक किसानों की आय दो गुनी होने से कोई नहीं रोक सकता है।

KUSUM योजना को दी मंजूरी
मोदी सरकार ने किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाभियान यानि KUSUM योजना को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस योजना के तहत किसानों को खेतों में सिंचाई के लिए सोलर पंप मुहैया कराया जाएगा। मोदी सरकार ने KUSUM योजना बिजली संकट से जूझ रहे इलाकों को ध्यान में रख शुरू की है। गौरतलब है कि भारत में किसानों को सिंचाई में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है और अधिक या कम बारिश की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती है। मोदी सरकार की कुसुम योजना के जरिए किसान अपनी जमीन पर सौर ऊर्जा उपकरण और पंप लगाकर अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। कुसुम योजना की मदद से किसान अपनी भूमि पर सोलर पैनल लगाकर इससे बनने वाली बिजली का उपयोग खेती के लिए कर सकते हैं। किसान की जमीन पर बनने वाली बिजली से देश के गांव में बिजली की निर्बाध आपूर्ति शुरू की जा सकती है।

तीन लाख तक कर्ज लेने पर कोई शुल्क नहीं
अब किसानों को 3 लाख रुपये तक के कर्ज लेने की प्रक्रिया में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अब किसानों को प्रोसेसिंग, इंस्पेक्शन फीस या सर्विस चार्ज नहीं देना होगा। किसानों को कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर कर्ज लेने के दौरान किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। पहले ऋण मुहैया कराने से पहले प्रक्रिया या अन्य के नाम पर कुछ प्रतिशत तक किसानों से वसूला जाता था। आईबीए ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि कोई भी शुल्क किसानों से तीन लाख रुपये तक कर्ज लेने में नहीं लिया जाएगा।

गायों के लिए राष्ट्रीय गोकुल योजना
सरकार ने पशुपालन और गो-संरक्षण के लिए बड़ी पहल की है। गांवों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान निभाने वाली गायों के लिए राष्ट्रीय गोकुल योजना की शुरुआत की जाएगी। इसके तहत 750 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

नई अनाज खरीद नीति को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर पल किसानों को मजबूत करने के लिए कार्य किया है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने नई अनाज खरीद नीति को मंजूर कर दिया है। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (PM-AASHA) के तहत राज्यों को एक से ज्यादा स्कीमों का विकल्प मिला है। अगर, बाजार की कीमतें समर्थन मूल्य से नीचे आती हैं तो सरकार एमएसपी को सुनिश्चित करेगी और किसानों के नुकसान की भरपाई करती है। यह स्कीम राज्यों में तिलहन उत्पादन के 25% हिस्से पर भी लागू है।

मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जहां एक तरफ किसानों की आय बढ़ाने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ जन-जन को पोषक अनाज उपलब्ध कराने के लिए भी काम कर रही है।  प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों और देश की सेहत के लिए पोषक मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उपमिशन लागू कर दिया है।  ये योजना उन किसानों के लिए फायदेमंद रही जहां ज्यादातर सूखा पड़ता है। मोटे अनाज की खेती में अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। 

‘बीज से बाजार’ तक की महत्वपूर्ण पहल
किसानों को सशक्त करने के लिए ‘बीज से बाजार तक’ मोदी सरकार की एक अनुपम पहल है। जैसा कि नाम से भी स्पष्ट है, इस पहल के अंतर्गत पूरे फसल चक्र में किसानों के लिए कृषि कार्य को आसान बनाने की व्यवस्था है। यानि किसानों के लिए बीज हासिल करने से लेकर उपज को बाजार में बेचने तक का प्रावधान है। इस व्यवस्था में सबसे पहले बुआई से पहले किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है जिसमें कृषि ऋण की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

 

किसान संपदा योजना से सप्लाई चेन को मजबूती
मोदी सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के जरिए खेत से लेकर बाजार तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना शुरू की गई जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों की कमियों को पूरा करना, खाद्य प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण करना है। 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से वर्ष 2019-20 तक करीब 334 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का संचय किया जा सकेगा। इससे देश के 20 लाख किसानों को लाभ होगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी निकलने वाले हैं। गौर करने वाली बात है कि इस योजना को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में 100 प्रतिशत FDI के सरकार के फैसले से भी नया बल मिला है।

जंगली जानवरों के कारण बर्बाद फसलों की भरपाई
मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत प्रायोगिक तौर पर जंगली जानवरों के कारण बर्बाद फसलों की भरपाई का फैसला किया है। कुछ चुने हुए जिलों में जंगली पशुओं के कारण फसल बर्बादी की भरपाई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रायोगिक आधार पर करने का फैसला किया गया है।

किसानों की दशकों पुरानी समस्याएं खत्म करने के लिए उठाए कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की समस्याओं के समाधान को निश्चित समय में लागू करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए। कांग्रेस की सरकारों में किसानों के लिए पानी, बिजली, खाद आदि से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए योजनाएं तो बनीं, लेकिन उनके क्रियान्वयन की समयसीमा को निश्चित नहीं किया गया, इसका परिणाम यह हुआ कि समस्या हमेशा बनी ही रही। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके विपरीत किसानों की पानी, बिजली, बीज, खाद, कृषि से जुड़े अन्य धंधों, बाजार, बीमा आदि से जुड़ी योजनाओं को निश्चित समय में लागू करने निर्णय लिया। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश के किसानों की आय को 2022 तक दोगुना कर देंगे। किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए, आय दोगुनी करने का संकल्प मोदी सरकार से पहले इस देश में किसी सरकार ने नहीं लिया।

किसानों को ऋण लेने में आने वाली दिक्कतों को दूर किया
किसान को खेती के लिए जरूरत में धन सही समय पर उपलब्ध कराने का काम किया गया है। बैकों से मिलने वाला ऋण, एक साल के लिए मात्र 7 प्रतिशत की ब्याज दर पर मिल रहा है। छोटे किसानों को भी, बैकों से यह धन मिले, इसके लिए छोटे किसानों के छोटे से छोटे समूहों  को बैकों से ऋण लेना आसान हो गया है। केन्द्रीय बजट से निकला धन किसानों तक बैंकों के माध्यम से पहुंचाने का रास्ता सरल और आसान हो चुका है। 

मोदी सरकार की नीतियों से अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन 
प्रधानमंत्री मोदी की योजनाएं, किसानों तक सही समय पर पहुंच रही हैं इसका अंदाजा इस तथ्य से लगता है कि पिछले चार साल में देश में किसानों ने अपने खेतों से अनाजों का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। इस रिकॉर्ड उत्पादन से जहां किसानों की आय बढ़ी है, वहीं देश अनाजों के मामले में आत्मनिर्भर होने के साथ ही साथ, विश्व के दूसरे देशों को निर्यात करने वाला भी बन गया है।

किसानों को लगभग मुफ्त में फसल बीमा का लाभ मिला है
आज किसानों को खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत और रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत के प्रीमियम पर बीमा मिल रहा है, शेष 98 प्रतिशत प्रीमियम राज्य और केन्द्र सरकारें देती हैं। फसल बीमा से खेती में अचानक हुए किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई बैंक कर रहे हैं। फसल बीमा से किसानों को खेती की अनिश्चितता से होने वाली चिंता खत्म हुई है। इससे छोटे -छोटे किसान भी बड़ी तेजी से फसल बीमा कराके चिंताओं से मुक्त हो रहे हैं।

किसानों को खेत से ही फसल बेचने की सुविधा
देश में सभी अनाज और फल-सब्जी मंडियों के कानून में संशोधन करके, इंटरनेट के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। पूरे देश की अनाज और फल की मंडियों के एक हो जाने से किसी भी गांव का किसान देश में उपज कहीं भी बेच सकता है। 2022 तक यह पूरी तरह से व्यवस्थित होकर एक हो जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 

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