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मोदी सरकार ने ऐसे बदला वर्क कल्चर

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संसद सत्र के दौरान सदन में सांसदों की अनुपस्थिति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाखुश हैं। उन्होंने भाजपा सांसदों को सदन में रहने की ना सिर्फ हिदायत दी है, बल्कि ये भी साफ कर दिया है कि वे उन्हें कभी भी फोन कर सकते हैं। दरअसल पीएम की पीड़ा सांसदों की गैरहाजिरी को लेकर जाहिर हुई। इसके साथ ही सांसदों की गैर जवाबदेही ने पीएम को ये तक कहने को मजबूर कर दिया कि वे उन्हें एक बार फिर जिता तो सकते हैं, लेकिन सदन में उनके बदले वे उपस्थित नहीं रह सकते। दरअसल पीएम मोदी खुद कठिन परिश्रम करने वाले और समय के पाबंद हैं, इसलिए वे चाहते हैं कि उनके सहयोगी भी ऐसा ही करें। 26 मई को केंद्र सरकार अपने तीन साल पूरे करेगी।

आइये हम आपको बताते हैं कि पीएम मोदी के कार्यकाल में कार्यसंस्कृति बदलने के कितने काम हुए।

 

कार्य संस्कृति में बदलाव मोदी सरकार का एजेंडा
सरकारी ऑफिसों के कामकाज में सुधार नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा एजेंडा है। सरकार ने इसके लिए कड़े गाइडलाइंस जारी किए हैं। मोदी सरकार ने कार्य संस्कृति को बदलने की कोशिश की और कामयाब भी रहे। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सुस्ती और लेट लतीफी पर अंकुश लगा। सरकार के सभी मंत्री व अफसर समय के पाबंद हैं। इन कोशिशों से सरकारी कामकाज में कुशलता, संवेदनशीलता और जवाबदेही का जोर बढ़ा है।

9 बजे आने लगे अधिकारी और बाबू
मंत्रालयों में अब 9 बजे से पहले ही सफाई काम पूरा हो जाता है। 9.15 से कर्मचारियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है और 9.30 तक 90 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज हो जाती है। सख्ती के बाद वक्त पर आने के साथ वक्त से पहले ऑफिस छोड़ना भी बंद हो गया है।

एक इकाई में बदले कई विभाग
प्रधानमंत्री ने जब पदभार संभाला था तो अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच मनमुटाव और समन्वय की कमी थी। पीएम ने विभागों के बीच कम्युनिकेशन गैप खत्म किया और एक इकाई की तरह कार्य करने की प्रवृति को बढ़ाया।

फाइलों का कम हुआ बोझ
पहले जहां हर डिपार्टमेंट के बाहर फाइलों से भरी कई अलमारी नजर आती थी वहीं अब यह सब साफ कर दिया गया है। ज्यादातर फाइलों को ऑनलाइन कर दिया गया है। इनके रिकॉर्ड एक क्लिक पर अब अधिकारी और बाबू की नजरों के सामने होते हैं।

सावधान! पीएम का फोन आ जाएगा
अब देर रात तक मंत्रियों का अपने चैंबर में रहना आम बात है। रात के 8 बजते ही हर मंत्रालय में फोन की घंटियों पर नजर रहती है। किसी भी वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आ सकता है, क्योंकि मोदी उनके मंत्रालय से जुड़े किसी प्रॉजेक्ट या नीति के बारे में कोई भी अपडेट ले सकते हैं, या सलाह दे सकते हैं। किस मंत्रालय में फोन आएगा, यह भी किसी को पता नहीं। फोन लैंडलाइन नंबर पर ही किए जाते हैं। ताकि मंत्री अपने चैंबर से ही बात करें। ये सिलसिला रात के 11 बजे तक जारी रहता है।

‘काइजेन’ कॉन्सेप्ट पर अमल

पीएम मोदी ने अपने कार्यालय में काइजेन की प्रैक्टिस को लागू कर कार्य संस्कृति को पूरी तरह बदल दिया है। काइजेन एक जापानी प्रैक्टिस है जिसमें क्वॉलिटी, तकनीक, प्रक्रिया, कार्य संस्कृति, प्रॉडक्टिविटी, क्षमता और नेतृत्व में सतत सुधार पर जोर दिया जाता है। काइजेन दो जापानी शब्दों काई और जेन से मिलकर बना है जिसमें काई का मतलब होता है ‘परिवर्तन’ या ‘सही करना’ और जेन का मतलब होता है ‘अच्छा’। काइजेन शब्द का मतलब है सतत सुधार।

टीम इंडिया के तौर पर काम
प्रधानमंत्री अक्सर कहते हैं कि ये 125 करोड़ लोगों की टीम है। उनकी इस बात की झलक उनके कार्यों में भी दिखाई देती है। चाहे केंद्र सरकार की बीमा योजना हो जिससे 100 दिनों के अंदर ही 10 करोड़ लोग लाभान्वित हुए थे, या फिर प्रधानमंत्री जनधन योजना में खाता खुलवाने का मामला हो, जिसमें 100 दिन के भीतर ही 8 करोड़ लोगों ने खाते खुलवाए थे। पीएम मोदी कहते हैं- यह 125 करोड़ भारतीयों की टीम है, जो पिछले एक साल में निर्धारित समय सीमा के अंदर काम पूरा करने में कामयाब हुई है।

सुशासन स्थापना की कोशिश
वेस्टर्न दुनिया इस सिद्धांत को मानती है कि ‘अगर यह टूटा नहीं तो इसे सही मत करो’ जबकि मोदी के दर्शन में सुशासन का मतलब ‘अगर यह टूटा नहीं है फिर भी इसमें सुधार किया जाए, क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हम अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे नहीं निकल पाएंगे। प्रधानमंत्री का यह विचार सामाजिक गतिविधियों तक भी फैला है। वह इन नियमों को अपने जीवन में भी लागू करते हैं।

पीएमओ में हर दिन मीटिंग
प्रधानमंत्री दिल्ली में रहने पर 7 बजे अपने प्रिंसिपल सेक्रेटरी के साथ मीटिंग जरूर करते हैं। इस दौरान तमाम मंत्रालयों से जुड़े मुद्दे डिस्कस होते हैं। उसी दौरान वह अचानक तय करते हैं कि किन एक या दो मंत्रालयों से विस्तृत बात की जाय। इसके बाद बात करने के मुद्दे बनाए जाते हैं। अपना होमवर्क करने के बाद पीएम उस मंत्री को फोन करते हैं।

पीएम मोदी की फॉलोअप टीम
पीएमओ में फॉलोअप टीम बनाई गई है। इस टीम का काम सरकार के फैसले या दूसरे निर्देश को पूरा करने के लिए दबाव बनाना है। यह टीम ऐसे फॉलोअप की लिस्ट हर दिन पीएम के पास रखती है। इसी टीम ने मोदी के मार्फत सभी मंत्रियों तक संदेश पहुंचाया कि बजट में उनके मंत्रालय के लिए जितनी घोषणाएं हुईं उसपर कितनी प्रगति हुई है।

कैबिनेट मीटिंग में जीरो आवर
गुजरात में बतौर सीएम अपना चुके जीरो ऑवर फॉर्म्युले को पीएम मोदी ने केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में भी लागू किया है। इसके तहत कैबिनेट मीटिंग में वह संसद की कार्यवाही के जीरो ऑवर की तरह अपने मंत्रियों को कोई भी मुद्दा उठाने की छूट देते हैं। यह मुद्दा राजनीति से जुड़ा होकर किसी भी नीतिगत मुद्दों पर हो सकता है।

अधिकारियों को सीधे करते हैं फोन
पीएम मोदी कई स्तरों पर एक साथ सक्रिय रहते हैं। राज्यों में पदस्थापित अधिकारियों से भी सीधे बात कर कार्य करवा लेते हैं। 28 अगस्त, 2016 को ये खबर आई थी कि उन्होंने नॉर्थ त्रिपुरा के डीएम संदीप महात्मे को सीधे फोन किया और एनएच 208 पर 15 किलोमीटर हिस्से की मरम्मत का काम पूरा करवाया।

PRAGATI से जवाबदेह हो रहा शासन
पीएम मोदी ने देश में गवर्नेंस को और अधिक सक्षम और जबावदेह बनाने के लिए 25 मार्च, 2015 को मल्‍टीमॉडल प्‍लेटफॉर्म-प्रगति (PRAGATI) यानी प्रोएक्‍टिव गवर्नेंस तथा समयबद्ध कार्यान्‍वयन, का एक संवादमूलक अनूठा प्‍लेटफॉर्म तैयार किया है। इसका उद्देश्‍य आम जन की शिकायतों का समाधान करना और साथ-साथ भारत सरकार के महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम और परियोजनाओं तथा राज्‍य सरकार के परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा करना है। यह कार्यक्रम प्रत्‍येक महीने के चौथे बुधवार को होता है और इसे प्रगति दिवस कहा जाता है।

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