Home तीन साल बेमिसाल हर नागरिक कर सके विमान में सफर- मोदी सरकार की नीति

हर नागरिक कर सके विमान में सफर- मोदी सरकार की नीति

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मोदी सरकार ने हवाई यात्रा को लेकर आम लोगों की सोच को ही बदल कर रख दिया है। इस क्षेत्र में सरकार ऐसी नीति लेकर चल रही है कि हवाई यात्रा पर सिर्फ अमीर लोगों का ही एकाधिकार न रहे। समाज के मध्यम से लेकर निम्न वर्ग के लोग भी इसे अपनी यात्रा का साधन बना सकें। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि विमान सेवाओं की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता किया जा रहा है। बल्कि, यूं कहें कि गुणवत्ता को और भी बेहतर करके इसकी कार्यक्षमता को भी मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। मोदी सरकार इस क्षेत्र को चमकाने के लिए कितनी सजगता से काम कर रही है, उसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार वो एक संपूर्ण नागर विमानन नीति लेकर आई है। इतना ही नहीं मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी UDAN योजना ही अपने-आप में इतने बेहतर सोच का नतीजा है जो इस क्षेत्र को अकेले ही पूरी तरह से कायापलट कर देने का माद्दा रखता है।

नागर विमानन नीति
पिछले साल 15-जून को केंद्रीय कैबिनेट ने संपूर्ण नागर विमानन नीति को मंजूरी दी। स्वतंत्रता के बाद ये पहला अवसर था जब केंद्र सरकार ने नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में इतनी बड़ी नीतिगत पहल की। नागर विमानन नीति के महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार से हैं-

  • भारत को 2022 तक विश्व के 9वें से तीसरा सबसे बड़ा एविएशन बाजार बनाना
  • घरेलू यात्रियों की संख्या को जो 2015 में 8 करोड़ प्रति वर्ष था, उसे 2022 तक 30 करोड़ तक ले जाना।
  • देश में हवाई अड्डों (कॉमर्शियल) की संख्या 2016 के 77 से बढ़ाकर 2019 तक 127 तक ले जाना।
  • कार्गो की क्षमता 2027 तक चार गुना बढ़ाकर 10 मिलियन टन तक करना।
  • विमान सेवा को देश के आम नागरिकों के लिए सुलभ (UDAN) बनाना। इसके लिए बेकार पड़े हवाई अड्डों पर क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत कम समय वाली हवाई यात्राएं शुरू करना।
  • ग्रीन फील्ड हवाई अड्डों और हेलिपोर्ट का विकास।
  • अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने के लिए कम से कम 5 साल घरेलू विमान सेवा देने की शर्त की समाप्ति।
  • रखरखाव और मरम्मत संचालन (MRO) को प्रोत्साहन देकर भारत को दक्षिण एशिया में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना।
  • 2025 तक गुणवत्ता प्रमाणित 3.3 लाख कुशल कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • नियमों में ढील, प्रक्रिया को आसान बनाना और ई-गर्वनेंस के द्वारा व्यापार करने में सुगमता को बढ़ाना।
  • सिविल एविएशन के क्षेत्र में भी ‘मेक इन इंडिया’ को अधिक से अधिक प्रोत्साहन देना।
  • लचीली और मुक्त ‘ओपन स्काई’ और ‘कोड शेयर’ समझौते ।

UDAN-‘उड़े देश का आम नागरिक’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अप्रैल, 2017 को Regional connectivity scheme (RCS) के तहत शिमला-दिल्‍ली रूट पर पर पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाकर UDAN सेवा की शुरुआत की है। इस योजना के तहत उन हवाई अड्डों को हवाई कनेक्टिविटी मिली है, जहां हवाई सेवा बिल्‍कुल भी उपलब्‍ध नहीं थी या बेहद कम संख्‍या में उपलब्‍ध थी। इस योजना के लिए आवेदनों की शुरुआत अक्‍टूबर, 2016 में की गई थी। बाजार आधारित व्‍यवस्‍था के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली यह विश्‍व में अपनी तरह की पहली स्‍कीम है। UDAN योजना राष्‍ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (NCAP) का एक अहम हिस्‍सा है। इस स्कीम में 27 मौजूदा सेवारत हवाई अड्डों, 12 मौजूदा कम सेवारत हवाई अड्डों और मौजूदा समय में गैर-सेवारत 31 हवाई अड्डों (कुल 70 हवाई अड्डे) को जोड़ा गया है। इस योजना के तहत हवाई जहाज से लगभग 500 किलोमीटर की एक घंटे की यात्रा अथवा हेलिकॉप्‍टर से 30 मिनट के सफर का हवाई किराया अधिक‍तम 2500 रुपये है। अलग-अलग दूरी एवं अवधि वाले रूटों पर हवाई किराया उसी आधार पर तय किया जाता है। इस योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा-

“अब हवाई जहाज में हवाई चप्पल पहनने वाले लोग भी सफर करेंगे।”- 

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ( 27 अप्रैल 2017)

पहला एकीकृत ‘हेलिपोर्ट’
28-फरवरी, 2017 को पवन हंस के सहयोग से दिल्ली के रोहिणी में पहला हेलिपोर्ट खोल दिया गया है। यह देश के चारों क्षेत्र में एक हेलिपोर्ट बनाने संबंधी राष्ट्रीय विमानन नीति का हिस्सा है। रोहिणी हेलिपोर्ट तकरीबन 100 करोड़ रुपये की लागत से दो वर्षों में पूरा हुआ है। इस हेलिपोर्ट पर समस्त हेलिकॉप्टर परिचालन सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, ताकि इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को भीड़ से मुक्ति दिलाई जा सके। इसका मकसद नियमित यात्री सेवाओं के लिए देश के उत्तरी हिस्से में हेलिकॉप्टरों के माध्यम से क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा भी देना है। यह हेलिपोर्ट हेलिकॉप्टर सेवाओं के अलावा, हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग एवं पार्किंग, रख-रखाव, आपदा प्रबंधन, हेलिकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं (HEMS) और कानून-व्यवस्था की के लिए भी उपयोगी साबित होगा। इस हेलिपोर्ट में 150 यात्रियों की क्षमता वाली एक टर्मिनल इमारत,16 हेलिकॉप्टरों के लिए एक साथ पार्किंग की सुविधाओं से युक्त 4 हैंगर और 9 पार्किंग वे बनाए गए हैं।

National no fly list
हवाई यात्राओं के दौरान बुरा व्यवहार करने वाले यात्रियों से निपटने के लिए सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR) को संशोधित किया गया है। इसके तहत बुरे व्यवहार को तीन श्रेणियों में रखा जाना है- पहले स्तर के तहत बुरे बर्ताव से बाधा डालने वाले व्यवहार को रखा गया है, दूसरे स्तर में शारीरिक रूप से अपमानजनक व्यवहार रखा गया है और तीसरे स्तर में जान को खतरे में डालने वाले व्यवहार को रखा गया है। एयरलाइंस कंपनियां इस तरह के यात्रियों का एक डाटाबेस तैयार करेंगी जिससे बुरा व्यवहार करने वाले यात्रियों की एक National no fly list बनाई जाएगी। गृहमंत्रालय द्वारा चिन्हित राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक व्यक्तियों को भी इस लिस्ट में डाला जाएगा। इस लिस्ट में यात्रियों के नाम के साथ इसकी वजह की भी जानकारी भरी जाएगी। एयरलाइंस कंपनियों के पास यह विकल्प होगा कि वह no fly list में शामिल बुरा बर्ताव करने वाले यात्रियों को भारत में राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रतिबंधित कर सकती हैं। प्रतिबंध की अवधि तीन महीने से लेकर अधिकतम दो साल तक हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बुरा व्यवहार किस स्तर का है। इसमें ये प्रावधान होगा कि अगर यात्री दोबारा गलती करे तो उसपर लगने वाला अगला प्रतिबंध दोगुना अवधि के लिए होगा। ऐसे मामलों में शिकायत निपटाने के लिए दो स्तरीय सिस्टम का प्रावधान है – एक सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अगुवाई वाली आंतरिक समिति की तरफ से एयरलाइंस के स्तर पर प्रारंभिक जांच। अपील दाखिल करने पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा गठित उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति में जांच।

‘एयर सेवा पोर्टल एवं एप’
25-नवंबर, 2016 को एयर-सेवा पोर्टल लॉन्च हुई। इससे यात्रियों के सामने रोज आने वाली समस्‍याओं को हल करने की सुविधा, उड़ान की स्थिति की जानकारी, हवाई अड़डों से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त करने में आसानी होती है। एयर-सेवा पोर्टल के जारी होने से यात्री अपने मोबाइल एप या वेब पोर्टल के जरिए अपनी शिकायतें भी दर्ज करा सकते हैं। इसमें अपनी आवाज में या वीडियो के जरिए पूरा विवरण देने की भी सुविधा है। शिकायतों के बारे में यात्रियों को ई-मेल और एसएमएस के जरिए सूचना दी जाती है।

यात्रियों की संख्या में 23.18 % बढ़ोत्तरी
जनवरी-अक्‍टूबर 2016 के दौरान 813.70 लाख यात्रियों ने घरेलू एयरलाइंस से सफर किया। जबकि उससे पिछले साल इसी अवधि में इन एयरलाइंस से सफर करने वाले यात्रियों की संख्‍या 660.60 लाख थी। इस तरह यात्रियों की संख्या में 23.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

AAI का रिकॉर्ड टर्नओवर
भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण (AAI) ने 2015-16 के दौरान 10,825 करोड़ रुपये का रिकार्ड टर्नओवर किया। इसमें टैक्स से पूर्व मुनाफा 3697 करोड़ रुपये और टैक्स चुकता करने के बाद का मुनाफा 2537 करोड़ रुपये रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि AAI ने 2015-16 के लिए भारत सरकार को 761.21 करोड़ रुपये का लाभांश भी दिया है।

एशिया का पहला ‘एयरबस प्रशिक्षण केंद्र’
नई दिल्ली में एशिया का पहला ‘एयरबस प्रशिक्षण केंद्र’ खोला जाएगा ताकि ‘एयरबस’ पॉयलटों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा सके। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत और ‘एयरबस’ के बीच की साझेदारी कितनी गहरी है। भारत में अभी ‘एयरबस’ के 250 से अधिक विमान संचालन में हैं और इंडियन एयरलाइंस ने 570 से अधिक विमानों का आर्डर भी दिया है।

देवघर हवाईअड्डे का विकास
धार्मिक रुप से महत्वपूर्ण झारखंड के देवघर हवाई अड्डे को विकसित करके उसे A-320 और C-130 विमानों के संचालन में सक्षम बनाने की भी सरकार की योजना है। इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और झारखंड सरकार मिलकर विकसित कर रहे हैं। देवघर हवाईअड्डा इस समय 53.41एकड़ जमीन पर है, जिसके विस्तार के लिए अतिरिक्त 600.34 एकड़ जमीन झारखंड सरकार अधिगृहित करके भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपेगी। हवाईअड्डे के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को झारखंड सरकार और AAI क्रमशः 200 करोड़ और 50 करोड़ रुपये देंगे।

मोदी सरकार न्यू इंडिया के सपने को लेकर के आगे बढ़ रही है। इस सपने में सिविल एविएशन का क्षेत्र बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री खुद इस दिशा में बहुत रुचि ले रहे हैं। उसी का परिणाम है की मात्र तीन साल में घाटे ही घाटे में रहने वाला ये लचरा हुआ सेक्टर आज सरकार की कमाई का साधन भी बन गया है। जिस सेक्टर पर अबतक सरकार सिर्फ पैसे खर्च करती थी, वो अब आमदनी का भी एक महत्वपूर्ण जरिया बन कर उभर आया है।

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