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आर्थिक सुधारों को लेकर मोदी सरकार ने किए बड़े फैसले, FDI नीति की गई और ज्‍यादा उदार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अहम क्षेत्रों में एफडीआई नीति में सुधार को और आगे बढ़ाते हुए कई बड़े कदम उठाए है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट ने एफडीआई नीति में कई संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों का मकसद एफडीआई नीति को और ज्‍यादा उदार और सरल बनाना है, जिससे देश में कारोबार करने में और आसानी हो। कैबिनेट के इस फैसले से विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ेगा जो निवेश, आय और रोजगार में उल्‍लेखनीय योगदान करेगा।

केंद्र सरकार ने ज्‍यादातर क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी है। इसके साथ ही सरकार ने हाल के महीनों में रक्षा, निर्माण क्षेत्र के विकास, बीमा, पेंशन, अन्‍य वित्तीय सेवाओं, प्रसारण, नागरिक उड्डयन, फार्मास्‍यूटिकल्‍स, ट्रेडिंग जैसे कई क्षेत्रों में एफडीआई संबंधी नीतिगत सुधार लागू किए हैं। इन कदमों के कारण देश में एफडीआई के प्रवाह में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 के दौरान कुल मिलाकर 45.15 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ है, जबकि वर्ष 2013-14 में यह निवेश 36.05 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ था। वर्ष 2015-16 के दौरान देश में कुल मिलाकर 55.46 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश हुआ। वित्त वर्ष 2016-17 में कुल मिलाकर 60.08 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश प्राप्‍त हुआ, जो अब तक का सर्वकालिक उच्‍चतम स्‍तर है।

साल निवेश
2013-14 36.05 अरब डॉलर
2014-15 45.15 अरब डॉलर
2015-16 55.46 अरब डॉलर
2016-17 60.08 अरब डॉलर

 

ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, मेक इन इंडिया, जीएसटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली,में सुधार के बाद मोदी सरकार ने महसूस किया कि देश में इससे भी ज्‍यादा विदेशी निवेश को आकर्षित करने की क्षमता है, जिसे एफडीआई व्‍यवस्‍था को और ज्‍यादा उदार एवं सरल बनाकर प्राप्‍त किया जा सकता है। इसलिए सरकार ने एफडीआई नीति में संशोधन करने का निर्णय लिया।

सिंगल ब्रांड रिटेल कारोबार
सिंगल ब्रांड रिटेल कारोबार में एफडीआई के लिए सरकारी मंजूरी की अब कोई आवश्‍यकता नहीं है। सिंगल ब्रांड रिटेल से संबंधित वर्तमान एफडीआई नीति के तहत स्‍वत: रूट के जरिए 49 प्रतिशत एफडीआई और सरकारी मंजूरी रूट के जरिए 49 प्रतिशत से ज्‍यादा और 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गई है। सिंगल ब्रांड रिटेल स्टोर के लिए घरेलू सामान खरीदने की शर्तों में ढील दी गई है। अब पहले साल से ही 30 फीसदी लोकल सोर्सिंग की जरूरत नहीं होगी। पांच वर्षों की अवधि पूरी होने के बाद हर साल सीधे अपने भारतीय परिचालन हेतु 30 प्रतिशत की प्राप्ति से जुड़े मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

नागरिक उड्डयन
विदेशी एयरलाइनों को अनुसूचित और गैर-अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं का संचालन करने वाली भारतीय कंपनियों की पूंजी में सरकारी मंजूरी रूट के तहत निवेश करने की अनुमति दी गई है। यह निवेश इन कंपनियों की पूंजी के 49 प्रतिशत की सीमा तक की जा सकती है। अभी तक विदेशी एयरलाइंस एयर इंडिया में निवेश नहीं कर सकती थीं। अब इस पाबंदी को समाप्‍त करने और विदेशी एयरलाइनों को एयर इंडिया में मंजूरी रूट के तहत 49 प्रतिशत तक निवेश करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है। लेकिन एयर इंडि‍या का व्‍यापक स्‍वामित्‍व एवं प्रभावकारी नियंत्रण आगे भी भारतीय हाथों में ही निहित होगी।

निर्माण क्षेत्र का विकास
कैबिनेट में यह निर्णय लिया गया है कि रियल एस्‍टेट ब्रोकिंग सेवा का वास्‍ता रियल एस्‍टेट व्‍यवसाय से नहीं है, इसलिए इसमें स्‍वत: रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई संभव है।

पावर एक्‍सचेंज
पंजीकृत पावर एक्‍सचेंजों में स्‍वत: रूट के जरिए 49 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है। एफआईआई/एफपीआई के निवेश को केवल द्वितीयक बाजार तक सीमित रखा गया था। अब एफआईआई/एफपीआई को प्राथमिक बाजार के जरिए भी पावर एक्‍सचेंजों में निवेश करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।

एफडीआई नीति के तहत मंजूरी के लिए अन्‍य आवश्‍यकताएं:
1. वर्तमान एफडीआई नीति के तहत सरकारी मंजूरी रूट के जरिए गैर-नकद कार्यों जैसे गठन पूर्व खर्चों, मशीनरी के आयात इत्‍यादि के सापेक्ष इक्विटी शेयरों को जारी करने की अनुमति दी गई है। अब यह निर्णय लिया गया है कि स्‍वत: रूट वाले क्षेत्रों के मामले में गैर-नकद कार्यों जैसे गठन पूर्व खर्चों, मशीनरी के आयात इत्‍यादि के सापेक्ष स्‍वत: रूट के जरिए शेयरों को जारी करने की अनुमति दी जाएगी।

2. केवल किसी अन्‍य भारतीय कंपनी/कंपनियों/एलएलपी और कोर निवेशकर्ता कंपनियों की पूंजी में निवेश करने के कार्य में संलग्‍न भारतीय कंपनी में फिलहाल पूर्व सरकारी मंजूरी के साथ 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश करने की अनुमति दी गई है। अब इन क्षेत्रों से संबंधित एफडीआई नीति को अन्‍य वित्तीय सेवाओं से जुड़े एफडीआई नीतिगत प्रावधानों के अनुरूप करने का निर्णय लिया गया है। अत: किसी वित्तीय क्षेत्र नियामक द्वारा उपर्युक्‍त गतिविधि‍यों का नियमन होने की स्थिति में स्‍वत: रूट के तहत 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। उधर, किसी वित्तीय क्षेत्र नियामक द्वारा उपर्युक्‍त गतिवि‍धियों का नियमन न होने अथवा केवल एक हिस्‍से का नियमन होने या नियामक की निगरानी के संबंध में कोई संशय होने की स्थिति में सरकारी मंजूरी रूट के जरिए 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए न्‍यूनतम पूंजीकरण आवश्‍यकता सहित कुछ शर्तें होंगी, जिनके बारे में सरकार द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

फार्मास्‍यूटिकल्‍स:
फार्मास्‍यूटिकल्‍स क्षेत्र से जुड़ी एफडीआई नीति में अन्‍य बातों के अलावा इस बात का उल्‍लेख किया गया है कि एफडीआई नीति में चिकित्‍सा उपकरणों की जो परिभाषा दी गई है वह दवा एवं कॉस्‍मेटिक्‍स अधिनियम में किए जाने वाले संशोधन के अनुरूप होगी। इसलिए एफडीआई नीति से दवा एवं कॉस्‍मेटिक्‍स अधिनियम का संदर्भ समाप्‍त करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, एफडीआई नीति में दी गई ‘चिकित्‍सा उपकरणों’ की परिभाषा में संशोधन करने का भी निर्णय लिया गया है।

ऑडिट कंपनियों के संबंध में प्रतिबंधात्‍मक शर्तों का निषेध:
वर्तमान एफडीआई नीति में उन ऑडिटरों के विनिर्देश के संबंध में कोई भी प्रावधान नहीं है जिनकी नियुक्ति विदेशी निवेश प्राप्‍त करने वाली भारतीय निवेश प्राप्‍तकर्ता कंपनियों द्वारा की जा सकती है। अब एफडीआई नीति में इस बात का उल्‍लेख करने का निर्णय लिया गया है कि कोई विदेशी निवेशक यदि भारतीय निवेश प्राप्‍तकर्ता कंपनी के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय नेटवर्क वाले किसी विशेष ऑडिटर/ऑडिट फर्म को निर्दिष्‍ट करना चाहता है तो वैसी स्थिति में इस तरह की निवेश प्राप्‍तकर्ता कंपनियों का ऑडिट दरअसल ऐसे संयुक्‍त ऑडिट के तहत किया जाना चाहिए जिसमें कोई एक ऑडिटर समान नेटवर्क का हिस्‍सा कतई नहीं होगा।

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