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मोदीराज में सशक्त हुआ किसान: पिछले 4 साल में 28% बढ़ा दूध उत्पादन, बढ़ने लगी आमदनी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में मोदी सरकार ने किसानों के हित के लिए इतने कार्य किए हैं, जितने पहले किसी भी सरकार के दौरान नहीं हुए। केंद्र सरकार की योजनाओं का ही असर है कि पिछले चार साल में देश का दूध उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़कर 17 करोड़ 63.5 लाख टन हो गया है। ‘राष्‍ट्रीय दुग्‍ध दिवस’ के अवसर पर कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि हमने पिछले चार साल में डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जो वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व के सबसे बड़े दुग्‍ध उत्‍पादक होने का श्रेय भारत के पशु पालक किसानों तथा भारत सरकार की विभिन्‍न योजनाओं को जाता है।

उन्‍होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार ने इस वर्ष डेयरी प्रसंस्‍करण और अवसंरचना विकास निधि (डीआईडीएफ) की शुरुआत की है। इसका लक्ष्‍य 50,000 गांवों के 95 लाख दुग्‍ध उत्‍पादकों को लाभ पहुंचाना तथा कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रमिकों को प्रत्‍यक्ष व अप्रत्‍यक्ष रोजगार उपलब्‍ध कराना है। डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 3,31,314 डेयरी इकाइयों की स्‍थापना की गई है और सरकार ने इस मद में 1401.96 करोड़ रुपये की सब्‍सिडी दी है।

आइए अब उन योजनाओं पर नजर डालते हैं जिसने देश के किसानों की जिंदगी बदल दी है-

खाद की किल्लत दूर हो गयी
मोदी सरकार ने खाद की किल्लत दूर करने के लिए नीम कोटिंग यूरिया का प्रयोग शुरू किया। उसके बाद से खाद का उपयोग सिर्फ और सिर्फ खेती में होना सुनिश्चित हो गया। ऐसा होते ही खाद की कालाबाजारी रुक गयी। अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलता है। खाद की कमी नहीं रहती। मोदी सरकार ने समस्या का ऐसा समाधान निकाला है कि किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि
मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ी राहत दी। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया, उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया है। बाकी फसलों का समर्थन मूल्य भी इसी तर्ज पर बढ़ा दिया गया। इससे किसानों की आमदनी में इतनी बढ़ोतरी हुई कि जीना आसान हो गया।

गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान
गन्ना उत्पादक किसानों को सालों से उनका बकाया नहीं मिल रहा था। मोदी सरकार ने किसानों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 4,305 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी। इससे 32 लाख किसानों को फायदा हुआ। इस तरह से 2014-15 के 99.33 प्रतिशत और 2015-16 के 98.21 प्रतिशत किसानों को अपना बकाया रुपया वापस मिल चुका है। गन्ना किसानों के लिए मोदी सरकार वरदान बनकर आयी।

धान की खरीद में लेवी प्रणाली का खात्मा
धान की खरीद में लेवी प्रणाली खत्म कर मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं। कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
हर खेत को पानी कभी बीजेपी का नारा हुआ करता था। मोदी सरकार ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाया गया है। 2016-17 में Per Drop More Crop की सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के अंतर्गत लाया गया। खेती में यह योजना किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है।

 

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड 
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। 

डिजिटल इंडिया की पहल-e-Nam
मोदी सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को उपज की सही कीमत मिले, इस दिशा में भी कोशिश की है। e-Nam के रूप में देशव्यापी स्तर पर एक ऐसा ई-प्लैटफॉर्म तैयार किया गया है जिनसे किसानों के साथ देश की कृषि मंडियां आपस में जुड़ी हैं। यहां किसान अपनी उपज को बेच सकता है। ई-नाम पर 455 मंडियां जुडी हुई हैं। इससे किसानों के लिए बाजार की जरूरत पूरी हो गयी है।

कृषि मौसम विज्ञान सेवा की शुरुआत 
मौसम विज्ञान से किसानों को लाभ पहुंचाने की नीति मोदी सरकार ने शुरू की है। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंच रहीं हैं।

kisan channel launch

किसानों के लिए शुरू हुआ किसान चैनल
पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने मंत्र दिया- हर खेत को पानी और हर हाथ को काम। इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हल के पीछे चल रहे आदमी की सुध ली और देश को किसान चैनल की शुरुआत की। 26 मई 2015 को शुरू किया गया 24 घंटे का यह किसान चैनल कृषि तकनीक का प्रसार, पानी के संरक्षण और जैविक खेती जैसे विषयों की जानकारी देता है। इसमें किसानों को उत्पादन, वितरण, जोखिम, बचने के तरीके, खाद, बीज, वैज्ञानिक कृषि के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।

जैविक खेती पर जोर 
जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए सरकार जैविक खेती के विकास के लिए काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10000 समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया गया है। अब तक राज्य सरकारें 7186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जौविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों की भौगोलिक दशा को देखते हुए जैविक खेती पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके लिए 2015 से 2018 तक 400 करोड़ की परियोजना चल रही है। 2015 -17 तक 143.13 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं जिनसे 2016-17 तक 1975 समूहों के माध्यम से 39,969 किसानों को जैविक खेती का काम कर रहे हैं।

ब्लू रिवोल्यूशन से बढ़ा मत्स्य उत्पादन
देश में ब्लू रिवोल्यूशन के जरिए किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के संकल्प से सरकार ने मत्स्य प्रबंधन और विकास के लिए अगले पांच साल में 3000 करोड़ रुपये की योजना दी है। 15000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया गया है। 2012-14 में मत्स्य उत्पादन जहां 186.12 लाख टन था वहीं 2014-16 में 209.59 लाख टन हो गया।

किसानों के लिए ऋण सुविधा बढ़ी
खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा बढ़ायी गयी है। अब 10 लाख करोड़ ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है।

 

 

 

1 COMMENT

  1. कांग्रेस मुक्त भारत ही भारत में सांप्रदायिकता के उन्माद के खात्मे का एक मात्र विकल्प है।जब तक कांग्रेस रहेगी यह डर्टी गेम चलता रहेगा।

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