Home विपक्ष विशेष ‘मीडिया’ ने दुष्कर्म पीड़ित बच्ची की तस्वीर चार महीने बाद क्यों छापी?

‘मीडिया’ ने दुष्कर्म पीड़ित बच्ची की तस्वीर चार महीने बाद क्यों छापी?

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जम्मू के कठुआ में एक सात की बच्ची के साथ 14 जनवरी को हुए दुष्कर्म से जहां समाज को झकझोर दिया था, वहीं मीडिया ने इस बच्ची की तस्वीर को दिखाकर, बच्ची और उसके परिवार वालों के साथ कानूनी अपराध किया है।घटना के लगभग चार महीने बाद, जब पुलिस इस मामले की तफ्तीश करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने वाली थी तो सोशल मीडिया और वेबसाइट की खबरों पर बच्ची की तस्वीर के साथ खबरों को प्रकाशित किया गया। 

भारतीय दंड संहिता के मुताबिक पीड़िता और उसके परिवार के सम्मान को बचाए रखने के लिए किसी भी परिस्थिति में पहचान उजागर करना जुर्म है। दंड संहिता की धारा 228 A के तहत ऐसा अपराध करने वालों को 2 साल की सजा दी जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आइए आपको उन मीडिया की खबरों को दिखाते हैं, जिन्होंने जान-बूझकर, चार महीनों बाद तस्वीर के साथ खबर को प्रकाशित किया। पड़ताल में सामने आया है कि जम्मू-कश्मीर के दो समाचार पत्रों ने पहले बच्ची की तस्वीर के साथ खबर छापी, उसके बाद कुछ समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों ने तस्वीर को दिखाना शुरु कर दिया। ऐसा प्रतीत होता है जैसे जानबूझकर एक रणनीति के तहत कानून का उल्लघंन किया जा रहा है। हम यहां सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करते हुए अखबारों की कतरनों में प्रकाशित फोटो से चेहरा छिपा (ब्लर) रहे हैं।  

ग्रेटर कश्मीर- अंग्रेजी समाचार पत्र ग्रेटर कश्मीर ने सबसे पहले 8 अप्रैल को यह तस्वीर, खबर के साथ प्रकाशित की। 8 अप्रैल को यह खबर आई थी कि पुलिस इस केस में आरोप पत्र दाखिल करने वाली है।

 

द कश्मीर मॉनिटर-अंग्रेजी दैनिक द कश्मीर मॉनिटर ने बच्ची की तस्वीर के साथ खबर 09 अपैल को प्रकाशित की। 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया- अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस बच्ची की तस्वीर को 10 अप्रैल की रिपोर्ट के साथ प्रकाशित किया।

 

कैच न्यूज- अंग्रेजी समाचार वेबसाइट कैच न्यूज ने उसी तस्वीर को 11 अप्रैल की खबर के साथ प्रकाशित किया। 

द वायर- समाचार वेबसाइट द वायर ने इस तस्वीर को 11 अप्रैल की रिपोर्ट में प्रयोग किया। 

इंडिया टुडे-इंडिया टुडे चैनल ने 11 अप्रैल के कार्यक्रम में भी इसी तस्वीर का उपयोग किया। 

एनडीटीवी-एनडीटीवी ने भी वेबसाइट पर इसी तस्वीर के साथ 12 अप्रैल को खबर प्रकाशित की। 

 

14 जनवरी को घटित घटना के चार महीने बाद उस बच्ची की तस्वीर को खबरों के साथ प्रकाशित करना, इस बात की ओर इशारा करता है कि इसे जानबूझकर राजनीतिक रंग देना का एजेंडा बनाया गया।

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