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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पड़ने लगी है ‘मेड इन चाइना’ पर भारी, चीन की बढ़ी चिंता

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करीब चार साल पहले जिस उद्देश्य को सामने रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया योजना को लॉन्च किया था, वह उद्देश्य अब पूरा होने की ओर बढ़ने लगा है। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का हब बना चीन आज तेजी में अपना आधार खोता जा रहा है और ग्लोबल कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही हैं। इससे यह साफ है कि मेक इन इंडिया ने मेड इन चाइना की हालत पतली करनी शुरू कर दी है।

भारत में दुनिया की स्मार्टफोन की सबसे बड़ी फैक्ट्री
पिछले 9 जुलाई को नोएडा में जिस सैमसंग फैक्ट्री  का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने उद्घाटन किया वह दुनिया में स्मार्टफोन की सबसे बड़ी फैक्ट्री है। यहां सालाना 12 करोड़ मोबाइल फोन का उत्पादन होगा। इससे पहले सैमसंग का चीन के मैन्युफैक्चरिंग बाजार में निवेश पर जोर था लेकिन वहां इकोनॉमिक ग्रोथ धीमी पड़ने के बाद कंपनी ने रणनीतिक रूप से भारत की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।  

मेक इन इंडिया भरने लगी है नई उड़ान
करीब पांच हजार करोड़ रुपये में नोएडा के सेक्टर-81 में तैयार हुआ सैमसंग का नया प्लांट 35 एकड़ में फैला है। सैमसंग भारत में फिलहाल करीब 6.7 करोड़ स्मार्ट फोन बनाती है जो अब लगभग दोगुनी हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन के मौके पर कहा था कि इससे भारत के लोगों के एम्पावरमेंट में योगदान मिलेगा और मेक इन इंडिया को गति मिलेगी। गौर करने वाली बात यह भी है कि सैमसंग की इस नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 35 हजार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा।

चीन को छोड़ अब भारत पर जोर
पिछले दो वर्षों में Apple, Foxconn और कई दूसरे मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर्स ने भी भारत में होने वाले निर्माण में निवेश किया है। जैसे पिछले साल Apple ने अपने कुछ iPhone की भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी। भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कंपनी ने अपने सप्लायर्स के लिए सरकार से टैक्स में कुछ रियायतों की भी मांग की थी। गौर करने वाली बात है कि मेक इन इंडिया में निवेश करने वालों की यह लिस्ट लगातार बढ़ती ही जा रही है। Acer की सहायक कंपनियां Wistron और Foxconn ने भी भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए सरकार के साथ जमीन किराये पर लेने को लेकर करार किया है।

चीनी कंपनियों का भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
जो बात सबसे अधिक गौर करने लायक है वो ये है कि ना सिर्फ दूसरे देश चीन को छोड़कर भारत का रुख कर रहे, बल्कि खुद चीन की भी तमाम फोन उत्पादक कंपनियां भी आज भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने में लगी हैं। Vivo, Oppo और Xiaomi जैसी कंपनियों की भारत में फैक्ट्रीज हैं। Xiaomi की तो भारत में अब दो फैक्ट्रीज हैं और इस वर्ष के शुरू में कंपनी यहां अपनी तीसरी फैक्ट्री लगाने की भी घोषणा कर चुकी है। वहीं 30,000 वर्गमीटर के क्षेत्र में Vivo का भारत में बना नया प्लांट इस कंपनी का चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा प्लांट है। कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों ने भी चीन में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर ना देकर अब भारत का रुख करने में लगी हैं, जैसे चिप बनाने वाली Mediatek ने भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग की अपनी योजना का ऐलान किया है।

मेक इन इंडिया साबित हो रहा ‘शेर का कदम’
कई सारी कंपनियों के बीच भारत में स्मार्टफोन की यूनिट लगाने की होड़ लगी है, इसकी एक वजह ये भी है कि वो भारत में इसके बाजार की प्रबल संभावनाओं को महसूस कर रही हैं। चीन में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ कमजोर पड़ने के साथ ही स्मार्टफोन की बिक्री भी बेहद धीमी पड़ चुकी है। भारत का बाजार भी तेजी में उठ रहा है और यहां अब  निवेश और कारोबार भी आसान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का दायरा बढ़ा है और भारत में बिजनेस करने का एक अनुकूल माहौल तैयार हो चुका है।  इसलिए इसमें कोई दो राय नहीं मेक इन इंडिया अब शेर का कदम साबित होने लगा है जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लॉन्च के मौके पर कहा था।

मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनेगा इंडिया
चीन का डर बढ़ रहा है क्योंकि उसकी आर्थिक ताकत में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री का बड़ा रोल है लेकिन जिस प्रकार से मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया की दिलचस्पी भारत में बढ़ी है अब उसका हब का दर्जा छिनने का खतरा बना है। मौजूदा वैश्विक समीकरण ने भी चीन की चिंता बढाई है। अमेरिका ने तो Foxconn और Apple की चीन से वापसी के संकेत भी दिए हैं। साफ है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया के साथ भारत को मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा था, वह आज सच होता दिखाई दे रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस को पीछे छोड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। मेक इन इंडिया के जोर पकड़ने से अर्थव्यवस्था में और तेजी आएगी जो पांचवें स्थान पर ले जाने में मददगार साबित होगा।

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