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मौलानाओं की खुलने लगी पोल तो अब नहीं चाहते टीवी डिबेट में इस्लाम और शरीयत पर चर्चा

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ये सभी जानते हैं कि भारत में संविधान सर्वोच्च है और इसे मानने के लिए देश के लोग, राजनीतिज्ञ और सभी संस्थाएं बाध्य हैं। हालांकि गाहे-बगाहे इसकी सर्वोच्चता को इस्लामिक धर्मगुरुओं द्वारा चुनौती दिए जाने की कोशिशें होती हैं, लेकिन देश का सेक्यूलर मिजाज इसे धता बता देता है। 2014 के बाद खास तौर पर इसमें बड़ा बदलाव ये आया है कि इस्लाम की खामियों को उजागर किया गया है और कुरीतियों को हर स्तर पर दूर करने के उपाय किए जा रहे हैं।

दरअसल चार साल पहले देश के अधिकांश लोग हलाला, मुताह, ट्रिपल तलाक जैसे कुकर्मो के बारे में जानते ही नहीं थे, पर 2014 के बाद से ही देश में जागरूकता बढ़नी शुरू हो गई है। मुस्लिम महिलाएं भी जुल्म के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और मौलानाओं को आईना दिखा रही है। ट्रिपल तलाक, हलाला, मुताह निकाह जैसी कुरीतियों को अब चुनौतियां दी जा रही  हैं, लेकिन ये बात देश के कई मौलानाओं को हजम नहीं हो रही है।

लखनऊ के इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने न्यूज चैनलों पर इस्लाम और शरीयत पर बहस वाले कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाने की मांग की है।

दरअसल इन मौलानाओं की पोल पट्टी खुलनी शुरू हो चुकी है। इसलिए ये नहीं चाहते कि इस्लाम और शरीयत पर किसी प्रकार की चर्चा हो। ये सेक्यूलर देश में शरीयत और हलाला जैसी चीजें तो चाहते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने की ख्वाहिश रखते हैं।

ये इसलिए भी चिढ़े हुए हैं कि बरेली के शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने दरगाह आला हजरत परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दरगाह के दारुल इफ्ता विभाग ने निदा के खिलाफ फतवा जारी किया है। मुफ्ती अफजाल रिजवी के दस्तखत से जारी फतवे में कहा गया है कि इस्लामिक कानून का विरोध कर रही हैं, लिहाजा उनका ‘हुक्का-पानी’ बंद कर दिया गया है। निदा की मदद करने वाले और उससे मिलने-जुलने वाले मुसलमानों को चेतावनी दी गई है कि ऐसा करने वालों को भी इस्लाम से खारिज कर दिया जाएगा।

निदा खान ने ऐसे मौलानाओं के खिलाफ शिकायत की है और इनकी गिरफ्तारी भी तय मानी जा रही है। जाहिर हो मोदी सरकार महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार के मामलों में सख्ती दिखाती रही है।

निदा खान को एक और जीत तब मिली जब बरेली की अदालत ने आदेश दिया कि उनको दिया गया ट्रिपल तलाक अमान्य है, तो ये लोग और भी बौखला गए है।  

जाहिर है अपनी हुकूमत पर कानून का हथौड़ा चलता देख ये मौलाना बौखलाने लगे हैं। दरअसल फिर अब जितनी इसपर चर्चा हो रही है, उतनी ही देश के कट्टरपंथियों की पोल भी खुल रही है, और इनके कुकर्मो पर से पर्दा उठ रहा है। इसी से अब देश के मौलाना बहुत ही अधिक परेशान हो रहे हैं।

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