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Make in India: बढ़ रही है भारत की ताकत, लाइटवेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो म्यांमार को किया गया निर्यात

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है। रक्षा सेक्टर में विनिर्माण मामले में पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ परवान चढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का असर है कि अब तक हथियारों का आयात करने वाला भारत अब हथियारों का निर्यात करने जा रहा है। लाइटवेट एंटी-सबमरीन शायना टॉरपीडो की पहली बैच को म्यांमार भेजा गया है। एडवांस्ड लाइट टॉरपीडो (TAL) शायना भारत की पहली घरेलू रूप से निर्मित लाइटवेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो है। इसे DRDO के नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है और इस टॉरपीडो का निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने किया है। भारतीय हथियार उद्योग के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। टीएएल शायना टॉरपीडो के पहले बैच को 37.9 मिलियन डॉलर के निर्यात सौदे के हिस्से के रूप में म्यांमार भेजा गया है, जिस पर 2017 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस आपूर्ति के साथ भारत और म्यांमार के बीच बढ़ते संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है।

पहली बार करेगा मिसाइलों का निर्यात
इसके साथ ही भारत अब दक्षिण पूर्व एशिया और खाड़ी के देशों को मिसाइलों की पहली खेप का निर्यात करने जा रहा है। ब्रह्मोस एरोस्पेस के एचआर कोमोडर एसके अय्यर ने कहा कि सरकारों के बीच करार के बाद पहली बार मिसाइलों का एक्सपोर्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दक्षिण पूर्व एशियाई देश हमारी मिसाइलों को खरीदने के लिए तत्पर हैं। इमडेक्स एशिया 2019 में उन्होंने कहा कि यह हमारा पहला एक्सपोर्ट होगा। इसके साथ ही हमारी मिसाइलों में खाड़ी के देश भी रुचि दिखा रहे हैं।

इसके अलावा भी कई ऐसी रक्षा परियोजनाएं हैं जिनमें पीएम मोदी की पहल पर मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। डालते हैं एक नजर

पनडुब्बी बढ़ाएगी नौसेना की ताकत
मेक इन इंडिया के कारण भारत की मारक क्षमता के साथ-साथ निगरानी क्षमता भी बढ़ी है। मेक इन इंडिया के तहत अब नौसेना के लिए भारत में ही करीब 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से छह पी-75 (आई) पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। पनडुब्बियों के निर्माण की दिशा में स्वदेशी डिजाइन और निर्माण की क्षमता विकसित करने के लिए नौसेना ने गुरुवार को संभावित रणनीतिक भागीदारों को छांटने के लिए कॉन्ट्रैक्ट जारी किया। रक्षा खरीद परिषद ने इसे 31 जनवरी को मंजूरी दी थी। भारतीय रणनीतिक भागीदारों के चयन के लिए सर्कुलर रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना की वेबसाइट पर उपलब्ध है। रणनीतिक भागीदारों को मूल उपकरण विनिर्माताओं के साथ मिलकर देश में इन पनडुब्बियों के निर्माण का संयंत्र लगाने को कहा गया है। नवभारत टाइम्स के अनुसार इस कदम का मकसद देश को पनडुब्बियों के डिजाइन और उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत तैयार आईएनएस ‘करंज’
इसके पहले 31 जनवरी, 2018 को मेक इन इंडिया के तहत भारत में निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस ‘करंज’ नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। ‘करंज’ एक स्वदेशी पनडुब्बी है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत तैयार की गई है। करंज पनडुब्बी कई आधुनिक फीचर्स से लैस है और दुश्मनों को चकमा देकर सटीक निशाना लगा सकती है। इसके साथ ही ‘करंज’ टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती है। करंज पनडुब्बी में कई और खूबियां भी हैं। यह पनडुब्बी रडार की पकड़ में नहीं आ सकती। यह जमीन पर हमला करने में सक्षम है, इसमें ऑक्सीजन बनाने की भी क्षमता है, यही वजह है कि करंज पनडुब्बी लंबे समय तक पानी में रह सकती है। युद्ध की स्थिति में करंज पनडुब्बी हर तरह के हालात से सुरक्षित और बड़ी आसानी से दुश्मनों को चकमा देकर बाहर निकल सकती है। इसमें सतह पर पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला करने की खासियत भी है। इस पनडुब्‍बी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी तरह की जंग में संचालित किया जा सकता है। यह पनडुब्बी हर तरह के वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और इंटेलिजेंस को इकट्ठा करने जैसे कामों को भी बखूबी अंजाम दे सकती है। कंरज पनडुब्बी 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची, 1565 टन वजनी है।

दिसंबर, 2017 में पीएम मोदी ने लांच की थी आईएनएस ‘कलवरी’
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में बनी स्कॉर्पीन श्रेणी की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 14 दिसंबर, 2017 को लांच किया था। वेस्टर्न नेवी कमांड में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी की मौजूदगी में इस पनडुब्बी को नौसेना में कमीशंड किया गया था। इस पनडुब्बी ने केवल नौसेना की ताकत को अलग तरीके से परिभाषित किया, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के लिए भी इसे एक मील का पत्थर माना गया। कलवरी पनडुब्बी को फ्रांस की एक कंपनी ने डिजाइन किया था, तो वहीं मेक इन इंडिया के तहत इसे मुंबई के मझगांव डॉकयॉर्ड में तैयार किया गया। आईएनएस कलवरी के बाद 12 जनवरी, 2019 को स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी आईएनएस खांदेरी को लांच किया गया था। कलवरी और खंडेरी पनडुब्बियां भी आधुनिक फीचर्स से लैस हैं। यह दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं, साथ ही टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती हैं।

P-75 प्रोजेक्ट के तहत बन रही हैं पनडुब्बी
आईएनएस कलवरी देश में बनी पहली परमाणु पनडुब्बी है जो भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी। P-75 प्रोजेक्ट के तहत मुंबई के मझगांव डॉक लीमिटेड में बनी कलवरी क्लास की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलावरी है। कलवरी क्लास की 6 पनडुब्बी मुंबई के मझगांव डॉक में एक साथ बन रही हैं और मेक इन इंडिया के तहत इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है।

रोबोटिक ड्रोन पानी में करेगा देश की सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे क्षेत्रों के साथ ही रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी स्वदेशी को बढ़ावा दिया और विदेशी कंपनियों के बजाय स्वदेशी कंपनियों को तरजीह देने के निर्देश दिए। जिसका प्रभाव अब दिखाई देने लगा है। केरल के कोच्चि स्थित फर्म ने रिमोट कंट्रोल की मदद से नियंत्रित किया जाने वाला एक ड्रोन विकसित किया है, जिसे ‘आईरोवटुना’ नाम दिया गया है। इसका व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी ने अपना पहला रोबोट डीआरडीओ के नेवल फिजिकल ओसियनोग्राफी लेबोरेटरी (एनपीओएल) को सौंपा है। पानी के भीतर काम करने में सक्षम यह रोबोटिक ड्रोन पानी के भीतर जहाजों और अन्य संरचनाओं का समय पर वीडियो भेज सकता है।

पानी में 150 मीटर की गहराई तक काम करने में सक्षम
आईरोवटुना ड्रोन परियोजना को केरल स्टार्ट अप मिशन की विभिन्न योजनाओं के तहत मदद दी गई है। यह ड्रोन पानी के भीतर 150 फीट तक सटीकता से काम करता है। इससे समुद्र में बिछाए गए केबल की जांच आदि करने में मदद मिलेगी, क्योंकि गोताखोरों के द्वारा निरीक्षण करने में अधिक खर्च आता है।

ब्रह्मोस और आकाश का सफल परीक्षण
विश्‍व की सबसे तेज सुपर-सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने नवंबर 2017 में उस समय इतिहास रच दिया, जब पहली बार भारतीय वायुसेना के अग्रणी युद्धक विमान सुखोई-30 एमके-1 से उसकी सफल परीक्षण उड़ान हुई। हवा से सतह पर मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल को दुश्मन के इलाके में बने आतंकी शिविरों पर दागा जा सकता है। इसके साथ ही जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल को भी सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।

इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने पिछले साल सितंबर में रात को ओडिशा तट पर एक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण कर रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही कम और अधिक उंचाई से लक्ष्‍य भेदने में सक्षम द्विस्‍तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अनुसार यह पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) मिशन पृथ्वी के वायुमंडल में 50 किमी से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए है।

अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने अब अग्नि-5 जैसी मिसाइल के जरिए 5,000 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता हासिल कर ली है। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और स्वदेश में निर्मित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के मुताबिक, अग्नि श्रृंखला के अन्य मिसाइलों के मुकाबले अग्नि-5 नेविगेशन और गाइडेंस, वॉरहैड और इंजन के संदर्भ में नई तकनीकि के साथ सबसे उन्नत है। यह मिसाइल एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम है। अग्नि-5 मिसाइल डेढ़ टन तक परमाणु हथियार ले जा सकती है। इसका वजन करीब 20 टन है, इसकी गति ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा है।

अंधेरे में लक्ष्य भेदने में सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत अब अंधेरे में मिसाइल से दुश्मन का लक्ष्य भेदने में भी सक्षम हो गया है। 21 फरवरी, 2018 को देश में निर्मित और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का ओडिशा के केंद्र से सफल परीक्षण किया गया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार सतह से सतह पर मार करने वाली पृथ्वी-2 मिसाइल अंधेरे में 350 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है। 

सेना के जवान अब पहनेंगे स्‍वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेट
केंद्र सरकार ने हाल ही में सेना की जरूरतों को देखते हुए 1.86 लाख स्वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने के लिए अनुबंध किया है। सेना के लिए कारगर बुलेट प्रूफ जैकेटों की जरूरत को युद्ध क्षेत्र के लिए सफलतापूर्वक आवश्यक परीक्षण करने के बाद पूरा किया गया है। ‘भारत में बनाओ, भारत में बना खरीदो’ के रूप में इस मामले को रखा गया है। स्वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेटें अत्याधुनिक हैं, जिनमें रक्षा का अतिरिक्त स्तर और कवरेज क्षेत्र है। श्रम-दक्षता की दृष्टि से डिजाइन की गई बुलेट प्रूफ जैकेटों में मॉड्यूलर कलपुर्जे हैं, जो लम्बी दूरी की गश्त से लेकर अधिक जोखिम वाले स्थानों में कार्य कर रहे सैनिकों को संरक्षण और लचीलापन प्रदान करते हैं। नई जैकेटें सैनिकों को युद्ध में पूरी सुरक्षा प्रदान करेंगी।

मेक इन इंडिया के तहत क्लाश्निकोव राइफल
मेक इन इंडिया के तहत अब दुनिया के सबसे घातक हथियारों में से एक क्लाश्निकोव राइफल एके 103 भारत में बनाए जाएंगे। असास्ट राइफॉल्स एके 47 दुनिया की सबसे कामयाब राइफल है। भारत और रूसी हथियार निर्माता कंपनी क्लाश्निकोव मिलकर एके 47 का उन्नत संस्करण एके 103 राइफल बनाएंगे। सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे भारत में बनाया जाएगा। इसे भारत से निर्यात भी किया जा सकता है।

‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी कामयाबी, बोफोर्स की जगह लेगी ‘धनुष’ तोप
प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दिया है। विभिन्न परीक्षणों और प्रयोगों से गुजर कर ‘धनुष’ तोप आखिर अंतिम परीक्षा में पास हो गई। सेना और रक्षा मंत्रालय ने 114 धनुष बनाने का ऑर्डर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर को दिया है। तीन चरणों में कुल 414 धनुष सेना के बेड़े में शामिल की जाएंगी।पूरी तरह देश में निर्मित तोप है धनुष 
ये देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी 155 एमएम और 45 कैलिबर की आर्टिलरी गन है। धनुष में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम को जोड़ा गया है। इसमें आटो लेइंग सुविधा है। ऑनबोर्ड बैलिस्टिक गणना और दिन और रात में सीधी फायरिंग की आधुनिकतम क्षमता से लैस है। इसमें लगी सेल्फ प्रोपल्शन यूनिट पहाड़ी क्षेत्रों में धनुष को आसानी से पहुंचाने में सक्षम है। पुराने हो चुके बोफोर्स को धनुष से रिप्लेस किया जाएगा। इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से भी अपग्रेड किया गया है, जिससे फायरिंग ‘जीरो एरर’ यानी गलती रहित हो गई है। इसका मतलब ये हुआ कि धनुष से निकला गोला केवल अपने लक्ष्य को भेदेगा। इसके अलावा हर तरह के हथियार का प्रयोग इसके जरिए किया जा सकता है। धनुष के ऊपर मौसम का कोई असर नहीं होता। यह -50 डिग्री सेल्सियस से लेकर 52 डिग्री की भीषण गर्मी में भी 24 घंटे काम कर सकती है। सेल्फ प्रोपेल्ड मोड में भी ये गन रेगिस्तान और हजारों मीटर ऊंचे खड़े पहाड़ों पर चढ़ सकती है। पहाड़ों व रेगिस्तान में ये 1600 किलोमीटर सफर तय कर सकती है। इसके विकास में डीआरडीओ, डीजीक्यूए, बीईएल जैसे बड़े संस्थानों ने भी अपना योगदान दिया है। 

15 हजार करोड़ के हथियारों के निर्माण को मंजूरी
केंद्र सरकार ने सेना की जरूरतों को देखते हुए मई 2018 में 15 हजार करोड़ के हथियार निर्माण प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। इसका मकसद हथियारों के आयात या विदेशों पर निर्भरता को खत्म करना है। इस प्रोजेक्ट से 30 दिन तक लगातार चलने वाले युद्ध में भी हथियारों का जखीरा कम नहीं पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेना के इस प्रोजेक्ट में 11 निजी कंपनियों को शामिल करने और उनकी निगरानी रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारियों द्वारा करने का प्रावधान शामिल है। इस प्रोजेक्ट को 10 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना में रॉकेट्स और ग्रेनेड लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, आर्टिलरी बंदूकें और लड़ाई के लिए जरूरी गाड़ियां बनाई जानी हैं।

भारत में लड़ाकू विमान बनाना चाहती है लॉकहीड मार्टिन
अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिका से अपनी चौथी पीढ़ी के बहुआयामी विमान एफ-16वी के प्रोडक्शन लाइन को भारत में ट्रांसफर करने की पेशकश की है। यह प्रधानमंत्री मोदी के मेक-इन-इंडिया प्रोजेक्ट की कामयाबी के तौर पर देखा जा सकता है। कंपनी का दावा है कि एफ-16वी बाजार में उसके इस श्रेणी के उत्पादों में सबसे उन्नत एवं आधुनिक है। भारत इन विमानों का अपनी वायुसेना में इस्तेमाल करने के साथ ही इसका निर्यात भी कर सकेगा। अगर ऐसा होता है तो डिफेंस इंडस्ट्री में नए रोजगार पैदा होंगे और हजारों इंजीनियरों को बेहतर अवसर मिलेगा।

रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू करने पर जोर
अगस्त 2018 में बेंगलुरु में डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज का आयोजन किया गया था, जिसमें मोदी सरकार ने लेजर हथियारों और 4G लैन (लोकल एरिया नेटवर्क) जैसी 11 तकनीकी चुनौतियों को स्टार्टअप शुरू करनेवाले उद्यमियों के सामने रखा । इन चुनौतियों में ज्यादातर ऐसी हैं, जो सुरक्षा बलों से जुड़ी हैं। सरकार ने देश में स्टार्टअप को शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाली केंद्र सरकार की नीति की घोषणा करते हुए उद्यमियों को रक्षा क्षेत्र में निवेश करने और इसमें हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया।

नीतिगत पहल और निवेश
रक्षा मंत्रालय आज जो स्वदेशी को बढ़ावा देकर करोड़ों रुपये की बचत कर रहा है, उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपनाई गई नीतियां जिम्मेदार हैं। रक्षा उत्पादों का स्वदेश में निर्माण के लिए मोदी सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी हुई है। इसमें से 49 प्रतिशत तक की FDI को सीधे मंजूरी का प्रावधान है, जबकि 49 प्रतिशत से अधिक के FDI के लिए सरकार से अलग से मंजूरी लेनी पड़ती है।

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