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कुमारस्वामी का मंच बना विपक्ष के अंतर्विरोध की राजनीति का गवाह

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जनता दल सेक्युलर के नेता कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। वह दूसरी बार सीएम बने हैं। वहीं कांग्रेस के जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान एनडीए से अलग कई दलों के नेता शपथ ग्रहण में मौजूद रहे। इनमें सोनिया गांधी, मायावती, अरविंद केजरीवाल, चंद्रबाबू नायडू, अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के अलावा  शरद पवार, तेजस्वी यादव जैसे नेताओं ने भी मंच साझा किए। एक ही मंच पर विपक्ष के जमावड़े को 2019 लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोध के लिए एकजुटता की कोशिश है। हालांकि मंचासीन नेताओं को देखा जाए तो ये पूरी कवायद ही अंतर्विरोध की कहानी बयां कर रहे थे।

ममता बनर्जी और लेफ्ट नेताओं ने जहां दूरी बनाए रखी, वहीं राहुल गांधी को मंच पर मौजूद नेताओं ने कोई भाव नहीं दिया। हालांकि अखिलेश यादव और मायावती के बीच दूरी कम थी, लेकिन यह लग रहा था कि वे मंच पर मौजूद तो हैं, लेकिन दिल अभी भी नहीं मिले हैं। इसी तर शरद पवार ने भी राहुल गांधी से दूरी बनाए रखी। जाहिर है मोदी विरोध के नाम पर एकजुट हो रहे इस कुनबे की उम्र कितनी होगी, इसको लेकर संशय के बादल अभी से मंडराने लगे है।

ये अंतर्विरोध कर्नाटक की राजनीति में भी और आगे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि सीएम पद की शपथ लेते ही कुमारस्वामी ने कह दिया कि वे सीएम हाउस में नहीं रहेंगे, बल्कि अपने ही घर से काम-काज देखें। जाहिर है यहां भी अंतर्विरोध का पेंच फसां हुआ है। दरअसल कांग्रेस और जेडीएस के बीच अभी से दूरी दिख रही है, क्योंकि कांग्रेस के कद्दावर नेता डी के शिवकुमार स्वयं ही सीएम पद चाहते थे। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि ये सरकार कितनी स्थिर होगी?

बहरहाल कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को अभी भी कैद में रखा है, यानि उन्हें अपने ही लोगों पर विश्वास नहीं है। दरअसल एकजुट हुआ कुनबा सिर्फ और सिर्फ मोदी विरोध के लिए है, ऐसे में अंतर्विरोध की राजनीति का एक उदाहरण भी है। आइये हम कुमारस्वामी की कुछ चुनौतियों को जानते हैं। 

10 जनपथ के ऑर्डर पर चलेगी कर्नाटक सरकार
जिस अंदाज में कुमारस्वामी ने कांग्रेस के आगे घुटने टेके हैं इससे तो लगता है कि उन्होंने सिर्फ और सिर्फ कुर्सी को ही याद रखा है। क्योंकि यह साफ हो चुका है कि जिस प्रकार से यूपीए सरकार के दौरान 10 जनपथ से आदेश टाइप होकर आते थे, उसी प्रकार कर्नाटक में भी होने वाला है। 21 मई को कुमारस्वामी और सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान की तस्वीरें काफी कुछ बयां कर रही हैं कि कर्नाटक में जेडीएस की क्या स्थिति होने जा रही है।

कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस और सिद्धारमैया ने जेडीएस को संघी, भ्रष्ट और दलाल कहा था। कुमारस्वामी को पानी पी-पी कर कोसा था। इसी तरह कुमारस्वामी ने भी हासन की जनसभा में कहा था कि- सिद्धारमैया को कुत्ता बनाकर रखूंगा। हालांकि कुमारस्वामी की ये तस्वीरें बयां करने को काफी हैं कि वे सिद्धारमैया को कुत्ता तो नहीं बना पाए खुद जरूर 10 जनपथ के गुलाम बन गए हैं।

 

कुमारस्वामी-कांग्रेस में टकराव का दौर हुआ शुरू
कांग्रेस-जेडीएस के बीच अंतर्विरोध की झलकियां गठबंधन के एलान के साथ ही सामने आनी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस ने कुमारस्वामी को तो मजबूरी में सीएम जरूर बना दिया, लेकिन डिप्टी सीएम के दो पद मांगकर कुमारस्वामी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। हालांकि विरोध हुआ तो एक डिप्टी सीएम पर फिलहाल बात बन गई है। इस बीच कुमारस्वामी सरकार में दोनों दलों की साझेदारी के फॉर्मूले का ऐलान हो गया है, जिसमें सीएम समेत जेडीएस के 13 मंत्री और कांग्रेस के 22 मंत्री होंगे। हालांकि एभी किसी ने शपथ नहीं लिया है, यानि साफ है कि इन्हें भी अपने बहुमत साबित करने का भरोसा नहीं हो पा रहा है। दूसरा यह कि वित्त विभाग और गृह विभाग के बंटवारे को लेकर भी दोनों ही दलों में विवाद है।

लिंगायत विधायकों ने रखी डिप्टी सीएम बनाने की मांग
कांग्रेस के नेता गठबंधन में बराबरी से ज्यादा का हक चाहते हैं, जो कि कुमारस्वामी के लिए परेशानी का सबब है। इसके साथ ही कांग्रेस के भीतर लिंगायत समुदाय को डिप्टी सीएम पद दिए जाने की मांग उठ रही है। लिंगायत समुदाय के संगठन अखिल भारत वीरशैव महासभा के नेता एन. तिप्पाना ने खत लिखकर कांग्रेस विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग की है। तिप्पाना ने कहा कि बीजेपी में जाने का भी उन्हें ऑफर मिला था, लेकिन वो कांग्रेस पार्टी छोड़कर नहीं गए, ऐसे में पार्टी उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए।  गौरतलब है कि 78 कांग्रेस विधायकों में 18 विधायक लिंगायत समुदाय से आने वाले हैं। जाहिर है लिंगायतों की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ऐसे में लिंगायत समुदाय की ये मांग इस गठबंधन के लिए परेशानी खड़ी करने वाली होगी।

कांग्रेस विधायक ने खोली पार्टी की साजिश की पोल
कांग्रेस और जेडीएस के लोगों ने कहा की बीजेपी वाले हमें खरीदने के लिए फोन कर रहे हैं। कांग्रेस ने इसके लिए एक ऑडियो टेप भी जारी कर दिया और कहा कि बीजेपी नेता ने कांग्रेस विधायक शिवराम हेब्बार की पत्नी को फोन किया था। आरोप लगाया गया कि 15 करोड़ रुपये देने का ऑफर किया गया था। हालांकि शिवराम हेब्बार ने अपनी ही पार्टी कांग्रेस और मीडिया के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है। शिवराम हेब्बार ने कहा है कि बीजेपी के किसी भी नेता ने मेरी पत्नी और मुझे फोन नहीं किया था। शिवराम हेब्बार ने ये भी कहा कि जो ऑडियो क्लिप मेरी पार्टी कांग्रेस ने जारी किया है वो फर्जी है और किसी मिमिक्री आर्टिस्ट द्वारा रिकॉर्ड कराई गई है। उन्होंने कहा कि  हमारी कभी किसी बीजेपी नेता से बात नहीं हुई और न ही हमें खरीदने के लिए किसी बीजेपी नेता ने कभी कोई ऑफर दिया।

विधायकों को कैद कर रखने का क्या है सबब?
कर्नाटक में कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों को बेहद खराब परिस्थितियों में कैद में रखा गया है जहां उन्हें किसी किस्म की आजादी नहीं है। इंटरनेट बंद कर दिया गया है और टेलिविजन चैनल्स तक देखने की मनाही है। दरअसल कहा जा रहा है कि कांग्रेस के कई विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार बैठे हैं। खतरा जेडीएस पर भी मंडरा रहा है, क्योंकि पार्टी के कई विधायक मंत्री बनना चाहते हैं, लेकिन महज 13 को ही यह मौका मिलने वाला है। ऐसे में फिलहाल विधायकों को कैद कर सरकार तो बनाई जा सकती है, लेकिन भविष्य में सरकार बचाई भी जा सकती है, इसको लेकर संशय के बादल अभी से मंडरा रहे हैं।

 

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