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देश भर के कई चर्चों से सामने आ रहे पादरी के ‘पाप’, लेकिन नहीं टूट रही सेक्युलर गैंग की चुप्पी  

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धार्मिक संस्थानों और प्रतिष्ठानों से यह सहज और स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि देश और समाज में सद्व्यवहार और सद्भावना का वातावरण बनाए रखने में वह अपनी जिम्मेदारी भरी भूमिका का निर्वाह करते रहेंगे। लेकिन यहां से इन्सानियत को तार-तार करने वाले कांड सामने आने लगें जिनमें खुद धार्मिक प्रतिष्ठान के प्रमुख शामिल हों तो किसका गुस्सा नहीं भड़केगा? पिछले कुछ समय में चर्च और ईसाई मिशनरीज से जुड़े ऐसे कई मामले सामने आए हैं, पादरियों के कई ऐसे कारनामे दिखे हैं जो ढेर सारे सवाल उठाने वाले हैं।

धार्मिकता की आड़ में पादरी का पाप!
पिछले कुछ वर्षों में केरल से ऐसे ढेर सारे मामले आए हैं जिनमें चर्च के पादरी रेप के आरोपी पाए गए हैं। यह स्थिति अब ऐसा रूप ले चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट को भी गुस्सा जताना पड़ा है। सर्वोच्च अदालत ने कहा: ‘’जिस तरह से रेप के मामलों में चर्च के पादरियों के नाम आ रहे हैं वह हैरान करने वाला है। ऐसी घटनाएं परेशान करने वाली हैं। ये क्या हो रहा है, सारे मामले केरल से आ रहे हैं।‘’ जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने यह टिप्पणी 2016 के रेप के एक मामले के सुनवाई के दौरान की। इस मामले में एक चर्च के फादर ने नाबालिग लड़की के साथ रेप किया था। केरल के मालाबार की इस घटना के एक वर्ष बाद पीड़ित लड़की ने एक बच्चे को भी जन्म दिया था।

‘पाप’ को दबाने के प्रयास में जुटा रहा पादरी
इस मामले के आरोपी पादरी के एक पादरी दोस्त ने सुप्रीम कोर्ट से आरोप को रद्द करने की मांग करते हुए अर्जी दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुकदमे का सामना हर हाल में करना  पड़ेगा। अभी यह केस केरल की निचली अदालत में चल रहा है। पीड़िता का आरोप है कि जब वह कन्फेशन के लिए चर्च में गई थी तो इसी दौरान पादरियों ने उसे ब्लैकमेल कर उसके साथ दुष्कर्म किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की आशंका से पादरियों में छटपटाहट है और वे हर उस कोशिश में लगे हैं ताकि मुकदमा सामना करने की नौबत ना आए। इससे पहले पादरी वर्गीस केरल हाईकोर्ट भी गया था लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए आत्मसमर्पण को कहा ।  

झारखंड के खूंटी गैंग रेप मामले में भी आरोपी पादरी
कुछ दिनों पहले झारखंड के खूंटी में एक मिशनरी स्कूल के फादर पर 5 युवतियों का गैंग रेप कराने का आरोप लगा था। पीड़िताओं का आरोप है कि वे मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए उनके स्कूल में नुक्कड़ नाटक कर रही थीं। इसी दौरान आरोपी पादरी ने युवतियों को उनके साथ जाने को मजबूर किया। आरोपी फादर अल्फोंस आइंद पर ये भी आरोप है कि जब वहां मौजूद नन भी युवतियों के साथ चलने को तैयार हुईं तो फादर ने उन्हें रोक लिया। युवतियों ने फादर से बहुत विनती की लेकिन, फादर ने उनकी एक न सुनी। बाद में आरोपियों ने पांचों युवतियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया और उनके साथ घोर ज्यादती की। वापस आने पर फादर और ननों ने उन्हें इस घटना के बारे में किसी को नहीं बताने के लिए आगाह किया। यह भी चेतावनी दी कि अगर कुछ बताया तो उनके परिजनों की हत्या तक हो सकती है।

ईसाई मिशनरियों की राजनीतिक साजिश
कई ईसाई मिशनरी जिस तरह की गतिविधि में नजर आए हैं उससे लगता है कि अपने कर्तव्य और दायित्व से जुड़े धर्मार्थ कार्यों को छोड़कर वो बाकी सब कुछ कर रहे हैं। पिछले कुछ समय में कुछ चर्चों के पादरी राजनीतिक साजिश में भी लिप्त पाए गए हैं। ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं जिनसे पता है कि मोदी सरकार का विरोध करने वाली विपक्ष की राजनीति का मोहरा बनने से उन्हें परहेज नहीं। एक जून को गोवा के आर्कबिशप फादर फिलिप नेरी फेर्राओ ने ईसाई समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि देश में संविधान खतरे में है और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। 08 मई, 2018 को दिल्ली के आर्कबिशप अनिल काउंटो ने देश के सभी चर्च के पादरियों को पत्र लिखा कि 2019 के चुनाव में मोदी सरकार को बदलने के लिए उन्हें शुक्रवार को प्रार्थना करनी चाहिए। इससे पहले 21 नवंबर, 2017 को गुजरात में गांधीनगर चर्च के प्रधान पादरी थॉमस मैक्वेन ने भी हिंदू राष्ट्रवादियों की पार्टी बीजेपी को हराने और ईसाई सोनिया गांधी की पार्टी कांग्रेस को जिताने की अपील की थी। 

पादरियों के ‘पापों’ पर खामोश रहता है ‘सेक्युलर’ गैंग
ऐसे मामले कम नहीं जिनमें मानव सेवा की आड़ में ईसाई मिशनरियों के गंदे खेल उजागर हुए हैं। देश भर में उनकी हरकतों को लेकर गंभीर सवाल पैदा हो गए हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि हिंदू संस्थानों और प्रतिष्ठानों से जुड़े छोटे से छोटे मामलों को तूल देने वाले पत्रकार और तथाकथित बुद्धिजीवी ईसाई मिशनरियों की घोर आपत्तिजनक करतूतों पर भी मौन हैं। वे मौन सिर्फ इसलिए रहते हैं क्योंकि बोलने से हिंदू हितैषी मान लिए जाएंगे, उनके सियासी संरक्षक बुरा मान जाएंगे। लेकिन जनता देख रही है कि छोटी-छोटी बात पर भी कैंडल मार्च लेकर सड़कों पर उतरने वाले ‘सेक्युलर’ गैंग के लिए चर्चों और मिशनरियों में होने वाला पाप कोई मायने नहीं रखता। मिशनरीज को राहुल-सोनिया का बढ़ावा और कांग्रेस से सेक्युलर गैंग का कनेक्शन जगजाहिर हो चुका है।

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