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आजाद भारत के जिन्ना हैं अरविंद केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का चाल, चरित्र और उनकी सरकार का चेहरा देखें तो भारत के बंटवारे के गुनहगार मोहम्मद अली जिन्ना की याद ताजा हो जाती है। इस वक्त देश की राजनीति में अरविंद केजरीवाल उस खतरनाक राजनेता का नाम है, जो सत्ता की लालच में किसी भी हद तक गिर सकता है। यहां हम उनके खिलाफ कुछ ऐसे चुनिंदा सबूत पेश कर रहे हैं, जिसे देखकर आपको यकीन हो जाएगा कि अगर केजरीवाल जैसे खौफनाक मंसूबा पालने वालों का सियासी फन जनता ने समय रहते नहीं कुचला, तो देश में मौजूद देशद्रोही ताकतों को ही बढ़ावा मिलेगा।

मोदी सरकार ने गैर-आरक्षित वर्गों के लिए जो 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है, केजरीवाल ने उसके खिलाफ दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों में गलतफहमियां फैलाकर भड़काने की साजिशें शुरू कर दी हैं। इसके लिए वह उन लोगों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो तोड़ने की राजनीति में ही यकीन करते रहे हैं।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में एक निजी कंपनी के अधिकारी विवेक तिवारी की हत्या को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर जिस तरह के सवाल उठाए वह उनकी विध्वंसक मानसिकता को जाहिर करता है। हद तो ये हो गई कि उन्होंने इसी हत्याकांड के बहाने देशभर के भाजपा नेताओं को हिंदू लड़कियों का रेप करने वाला तक बता दिया।

केजरीवाल के खतरनाक दिमाग की बानगी देखकर तो एक समय पूरा देश हैरान रह गया। उन्होंने राजनीतिक खुन्नस में एक ऐसा कार्टून ट्विटर पर डाल दिया, जिसे खासकर हनुमान जी को अपमानित करके हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए बनाया गया था।

राजनीतिक लाभ के लिए अरविंद केजरीवाल हर वो काम करना चाहते हैं, जिसमें हिंदुओं का अपमान हो। उनकी मंशा दरअसल ये रहती है कि हिंदुओं को नीचा दिखाकर वो मुसलमानों की सहानुभूति बटोर सकते हैं। जिन्ना मुसलमान होकर भी जो नहीं करता था, केजरीवाल उससे आगे कर गुजरने के लिए तैयार रहते हैं।

हद तो ये हो गई कि एकबार गणतंत्र दिवस के मौके पर भी उन्होंने समाज को बांटने के लिए आग उगलना नहीं छोड़ा। दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में उन्होंने उन शब्दों का इस्तेमाल किया, जो खास समुदाय की भावना भड़काने की नीयत से की गई थी। सबसे खतरनाक बात तो ये थी कि उन्होंने स्कूली बच्चों की मौजूदी में ये घृणित काम किया।

इसी तरह जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेप कांड में भी उन्होंने खूब राजनीतिक रोटियां सेंकी। मानवीयता के खिलाफ इस जघन्य कांड में भी उन्होंने हिंदू-मुसलमान खोज लिया और उन्हें उकसाने का काम शुरू कर दिया। लेकिन, इस देश की जनता का देशप्रेम ऐसा है, जो केजरीवाल जैसे देशविरोधी शख्स की मानसिकता भी आसानी से समझ लेती है।

सबसे बड़ी बात है कि भारत के अबतक के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की भलाई का काम करें यह अरविंद केजरीवाल हजम ही नहीं कर पाते। मोदी विरोध में वो इतने अंधें हैं कि उन्हें बदनाम करने के लिए रास्ते ढूंढते रहते हैं। इसी का उदाहरण कुछ महीने पहले गुजरात में देखने को मिला। वहां बलात्कार की एक घटना के बाद कुछ लोगों ने शांतिप्रिय गुजरातियों को भड़काने की बहुत ही गंभीर साजिश रची थी, ताकि उसके बहाने मोदी जी पर निशाना साधा जाय। केजरीवाल ने इस साजिश को हवा देने में जरा भी देर नहीं की। उन्होंने गुजरात और यूपी एवं बिहार के लोगों के बीच फसाद कराने की कोशिश शुरू कर दी। लेकिन, जनता ने एकबार फिर उनके नापाक मंसूबे को धूल चटा दिया और अपनी साजिश में वे बुरी तरह नाकाम रहे।

केजरीवाल की ये कहानी तो और भी चौंकाने वाली है। सर्जिकल स्ट्राइक पर तो वो पाकिस्तान के सुर में सुर मिला ही चुके हैं, एकबार सेना के वीर जवानों को भी भड़काने की कोशिश करते दिख चुके हैं। लेकिन, उनकी गलतफहमी जल्द ही दूर हो गई और उनकी पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।

वोट के लिए अपनी पार्टी के नेताओं के नाम बदलवाना उनकी गिरी हुई राजनीति की ऊंची प्राथमिकता में शामिल रहा है। आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना और पूर्व नेता आशुतोष की कहानी तो सब जानते हैं, जिनके नाम में टाइटल सिर्फ इसलिए जोड़ा गया, ताकि खास जाति के मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। इसी कड़ी में एक बार उन्होंने बनिया वोटरों को लुभाने की कोशिश की थी।

एकबार बनिया के नाम पर लुभाने की कोशिश की थी, तो दुसरी बार अग्रवाल समाज के नाम पर लोगों को बरगलाते देखे गए। लेकिन, उन्हें पता नहीं कि देश का वोटर अब इतना नासमझ नहीं रहा कि उनकी समाज विरोधी मानसिकता को समझ नहीं सके।

दिल्ली के सीएम वो इंसान हैं, जिन्हें अपने पद की मान-मर्यादा का तो ख्याल नहीं ही है, देश की सेवा में डटे रहने वाले जवानों के मान-सम्मान की भी चिंता नहीं है। यही वो केजरीवाल हैं, जिन्हें एक चैनल पर सरेआम पुलिस के जवानों को ठुल्ला कहते देर नहीं लगी थी।

केजरीवाल को न देश की सुरक्षा की चिंता है और न ही देश की सरकार पर भरोसा। उन्हें पाकिस्तान पर ज्यादा भरोसा है, यह सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी देखा जा चुका है। यही वजह है कि एक विवादास्पद नेता ने एक संदिग्ध ट्वीट किया तो केजरीवाल ने उसको लेकर सीधे सरकार पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए।

इसी तरह जब मोदी जी ने देश में जमा कालाधन निकलवाने और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने के लिए नोटबंदी का फैसला किया तो अरविंद केजरीवाल ने देश की ईमानदार जनता को उसके खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। जबकि, देश की जनता को पूरा भरोसा था कि नोटबंदी का फैसला देशहित में है और भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं रहने वाली। नोटबंदी के दौरान दिल्ली के बैंकों में ऐसे संदिग्ध कैश भी जमा हुए थे, जिसके संदेह के आम आदमी पार्टी तक से जुड़ने के आरोप लगे थे।

मोदी जी हमेशा कहते हैं कि देश के युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें। लेकिन, केजरीवाल के शातिर दिमाग में उनकी इतनी बड़ी बात समझ में नहीं आई। यही कारण है कि एकबार मोदी जी द्वारा पकौड़े बनाने वाले की तारीफ करने के खिलाफ उन्होंने माहौल बना शुरू कर दिया। इसके लिए वे कर्मठ युवाओं का अपमान करने में भी नहीं हिचके।

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