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जनता की आंख में धूल झोंक रहे हैं केजरीवाल, रिपोर्ट से खुला राज

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दिल्ली में विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल साढ़े तीन साल से सत्ता पर काबिज हैं। आंदोलन से निकले इन नेताओं पर भरोसा करके जनता ने कमान सौंपी। लोगों को केजरीवाल से बहुत उम्मीदें थी। सत्ता में आने के इतने दिनों के बाद दिल्ली के लोग ठगा-सा महसूस कर रहे हैं। विवादित नेता केजरीवाल सरकार चलाने, योजना को सही तरीके से लागू करने में नाकाम हो रहे हैं तो कोई न कोई बहाना करके काम-काज छोड़कर धरना-धरना खेलकर दिल्ली वालों की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं।

केजरीवाल अक्सर स्वास्थ्य क्षेत्र में मोहल्ला क्लिनिक, दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हैं लेकिन दोनों विभाग भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, प्रशासनिक विफलताओं की कहानी कहते हैं।

दिल्ली की हाई-फाई शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती रिपोर्ट
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दावा करते हैं कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया। शिक्षा बजट कई गुना बढ़ा दिया। इसको लेकर एक से बढ़कर एक दावे कर रहे थे। एनसीईआरटी के सर्वे में सारे दावों की हवा निकल गई। एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे की रिपोर्ट की माने तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 50 फीसदी विद्यार्थियों को पुस्तक देखकर पढ़ना नहीं आता है। बच्चों को गणित के साधारण प्रश्नों को भी हल करने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। बच्चों को भाषा के साथ-साथ पर्यावरण की बेसिक जानकारी भी नहीं है।

गोपाल राय के विधानसभा क्षेत्र का मोहल्ला क्लिनिक

केजरीवाल के सिग्नेचर योजना – मोहल्ला क्लिनिक
आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं वाली 1,000 मोहल्‍ला क्‍लिनिकों के निर्माण का वादा किया था, लेकिन इन तीन वर्षों में अब तक सिर्फ 180 मोहल्ला क्लिनिक बने। केजरीवाल के वादे के अनुसार जहां औसतन एक साल में 200 क्लिनिक खुलना था और खुले महज साठ। इतना ही इसमें मोहल्ला क्लिनिक कितनी दुर्दशा हालत में है, कितनी प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी हुई है, उसका उदाहरण है केजरीवाल के कैबिनेट मंत्री गोपाल राय के विधानसभा क्षेत्र कर्दमपुरी का मोहल्ला क्लिनिक। यहां एक साल पहले क्लिनिक बनकर तैयार हो गया, लेकिन आज तक उद्घाटन नहीं हो पाया। नतीजतन जहां इंसान का इलाज होना चाहिए था, वहां आज घोड़े व गधे आराम फरमा रहे हैं।

बाबरपुर मोहल्ला क्लिनिक की दुर्दशा।

इसी तरह, बाबरपुर बस टर्मिनल के पास एक जगह खाली मैदान में मोहल्ला क्लिनिक का निर्माण कर दिया गया। वहां हर साल रामलीला आयोजित होती है। इसके निर्माण का विरोध रामलीला कमेटी के सदस्यों ने किया तो इस क्लिनिक को आधा-अधूरा तोड़ दिया गया। फिर इसमें चाय की दुकान खुल गई। इसको लेकर मीडिया में खबर छपी। उसके बाद मोहल्ला क्लिनिक को पूरी तरह से तोड़ दिया, उसे जमींदोज कर दिया। 

आम आदमी पार्टी और केजरीवाल ने चुनाव के दौरान दिल्ली की जनता से बहुत वादे किए लेकिन उन वादों पर न वह खरे उतरे और न ही वादे को पूरा करने के प्रति गंभीर दिखाई देते हैं। उसकी एक बानगी –

दो लाख पब्लिक टॉयलेट
2015 के घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने दो लाख पब्लिक टॉयलेट के निर्माण का वादा किया गया था, लेकिन पिछले तीन सालों में केवल 21 हजार सामुदायिक टॉयलेट का निर्माण ही हुआ है। यानि टॉयलेट बनने की रफ्तार को देखें तो दो साल में और 14 हजार टॉयलेट बनेंगे। इसका मतलब यह हुआ कि महज 35 हजार टॉयलेट ही बन पाएंगे। दूसरी ओर दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने अभी तक महज 29 फीसदी टॉयलेट का निर्माण कराया यानि 1314 के लक्ष्य की तुलना में महज 384 ही बन पाया।

11 हजार नई बस
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 11 हजार नई बसें चलाने का वादा किया था। इसके साथ ही पांच नई बस डिपो का प्रस्‍ताव भी रखा था, लेकिन अभी इस मामले में क्या हुआ अब तक पता नहीं चल रहा। अलबत्ता दिल्ली सरकार जमीन को समस्या बताकर इससे मुंह मोड़ती दिख रही है।

20 नये डिग्री कॉलेज
उच्‍च शिक्षा गारंटी स्‍कूल के तहत केजरीवाल ने 20 नये डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया था। तीन साल पूरे हो गए पर ये वादा अभी तक अभी पूरा नहीं हुआ है। इतना ही नहीं इस बाबत सरकार से कोई बात पूछी जाती है तो वह इसका जवाब भी नहीं देती है।  

पूरी दिल्ली में सीसीटीवी
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में अपराध रोकने के लिए वादा किया था कि पूरी दिल्ली को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा, लेकिन ये वादा भी वह अभी तक पूरा नहीं कर पाई।

पूरी दिल्ली में वाई-फाई
अरविंद केजरीवाल ने चुनाव के दौरान पूरी दिल्ली में वाई-फाई लगाने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बाद भी ये वादा पूरा नहीं हुआ। 

बसों में सीसीटीवी-मार्शल 
डीटीसी और कलस्टर बसों में न तो सीसीटीवी और न ही कोई मार्शल की व्यवस्था हो पाई।

अवैध कॉलोनियां नियमित होंगी
अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली में सभी अवैध कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा, जबकि अभी भी करीब 1639 कॉलोनी नियमित नहीं की गई हैं।

प्रदूषण नियंत्रण में नाकाम
केजरीवाल सरकार ने राजधानी में प्रदूषण पर लगाम और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत करने का वादा किया था। आलम यह है कि इस दिशा में कोई खास योजनाएं नहीं दिखी। ऑड-इवेन फॉर्मूला दो बार प्रयोग में लाया गया, लेकिन बिना तैयारी के ये विफल हो गईं।

महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं
आम आदमी पार्टी ने महिलाओं को उचित सम्मान देने का वादा किया था, लेकिन आलम यह है कि आज भी सरकार के कैबिनेट में कोई महिला मंत्री नहीं है। इतना ही नहीं जीआरसी यानी लिंग संसाधन केंद्र और महिला हेल्पलाइन नंबर 181 को निष्क्रिय कर दिया गया है।

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