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2019 का चुनाव नजदीक देख शुरू हो गई केजरीवाल एंड कंपनी की ‘नौटंकी’

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70 में से 67 सीटें देकर दिल्ली की जनता ने तीन साल पहले अरविंद केजरीवाल के हाथों में सत्ता की बागडोर सौंपी थी तो लोगों ने बड़ी उम्मीदें पाल रखी थीं। हालांकि केजरीवाल के सत्ता संभाले 1100 से अधिक दिन हो गए हैं, और अब प्रदेश की जनता अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। एक ओर जनता दिल्ली की आप सरकार को सबक सिखाने के लिए तैयार बैठी है तो दूसरी ओर अपनी साख बचाने की कवायद में केजरीवाल का कुनबा अब नई ‘नौटंकी’ पर उतर आया है। केजरी एंड कंपनी ने दिल्ली के उपराज्यपाल के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है और अपनी तीन मांगों को लेकर धरने पर बैठ गई है।

केजरीवाल के साथ एलजी दफ्तर में आराम फरमा रही दिल्ली सरकार
दिल्ली  के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री गोपाल राय और सत्येंद्र जैन अपनी मांगों को लेकर सोमवार शाम से उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में बैठे हैं। बैठे क्या हैं, आप इसे आराम फरमाना भी कह सकते हैं।

इन तस्वीरों में फर्क साफ दिख रहा है कि संघर्ष की राजनीति का दावा कर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले केजरीवाल का कुनबा सोफे पर आराम फरमा रहा है। इनका अंदाज बता रहा है कि यह नौटंकी सिर्फ और सिर्फ एक बार फिर जनता को टोपी पहनाने की तैयारी भर है।

वादा पूरा न कर पाने पर सवालों से बचने का बहाना बना रहे केजरीवाल
केजरीवाल ने सत्ता में आते समय जो-जो वादे किए थे उसपर वे फेल साबित हुए हैं। 1000 मोहल्‍ला क्‍लीनिकों के निर्माण का वादा किया था, लेकिन इन तीन वर्षों में अब तक महज 180 स्‍थापित हुई हैं, जिनमें 168 ही काम कर रही हैं। हर साल दो लाख पब्लिक टॉयलेट के निर्माण का वादा था, लेकिन केवल 21 हजार सामुदायिक टॉयलेट बना पाए। दिल्ली में 11 हजार नई बसें चलाने का वादा किया था और पांच नई बस डिपो का प्रस्‍ताव भी था, लेकिन वह भी पूरा नहीं कर सके। 20 नये डिग्री कॉलेज खोलने का वादा था, लेकिन एक भी नहीं खुला। पूरी दिल्ली को सीसीटीवी कैमरे लगाने, फ्री वाई-फाई, बसों में सीसीटीवी – मार्शल देने और अवैध कॉलोनियों को नियमित करने जैसे वादों पर तो सरकार एक कदम भी नहीं बढ़ पाई है।

केजरीवाल के तीन साल, अधूरे वादे-पब्लिक बेहाल

केजरीवाल का वादा तीन साल की हकीकत
1000 मोहल्ला क्लीनिक      180 बने, 168 चालू
हर साल दो लाख पब्लिक टॉयलेट     21 हजार बने
11 हजार नई बसें, 5 डीपो     एक भी नहीं
डीटीसी बसों में मार्शल, सीसीटीवी       कहीं भी नहीं
20 डिग्री कॉलेज      एक भी नहीं
दिल्ली में सीसीटीवी     एक भी नहीं
दिल्ली में फ्री वाई-फाई       किसी जगह नहीं

भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान भटकाने के लिए केजरीवाल का सियासी ड्रामा
सत्ता मिलते ही केजरीवाल ने ना सिर्फ जनता से किए अपने वादे को तोड़ा बल्कि खुद आकंठ भ्रष्टाचार में डूब गए। आरोप है कि केजरीवाल की मिलीभगत से उनके रिश्तेदार सुरेंद्र कुमार बंसल ने फर्जी कागजातों के आधार पर कई कंपनियों के नाम पर काम लिए और फर्जी बिल बनाए। दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है। दिल्ली सीएम के सचिव रहे राजेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली सरकार में काम करने का ठेका दिया और उसके बदले में धन भी लिया। फिलहाल वे जमानत पर हैं। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर डेढ़ करोड़ और मंत्री सत्येंद्र जैन पर हवाला लिंक से 16.39 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। सत्येंद्र जैन की बेटी का मोहल्ला क्लीनक परियोजना में सलाहकार बनाना भी भ्रष्टाचार के दायरे में आता है।

जन लोकपाल का वादा पूरा न कर पाने की जवाबदेही से भाग रही आप सरकार
अरविंद केजरीवाल की अगुआई में आम आदमी पार्टी ने जन लोकपाल के मुद्दे पर 2013 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। सरकार में आने के बाद 15 दिन में जन लोकपाल लाने का वादा भी किया था,  पर वो वादा अब तक अधूरा रहा। बहानेबाजी करते हुए 14 जनवरी, 2014 को कांग्रेस से गठबंधन तोड़ जिम्मेदारी से भाग निकले। फिर 2015 में भी जन लोकपाल को मुद्दा बनाया, लेकिन सत्ता में तीन साल रहने के बाद भी जन लोकपाल बिल पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाए।  गौरतलब है कि दिल्ली सरकार जन लोकपाल के मुद्दे को केंद्र के पाले में डालने की कोशिश कर रही है, लेकिन हकीकत ये है कि जन लोकपाल विधेयक केंद्र के पास नहीं बल्कि दिल्ली सरकार के प्रशासनिक विभाग के पास सितंबर 2017 से लंबित है।

…जब दिल्ली को लंदन बनाने चले थे केजरीवाल!
एमसीडी चुनाव के दौरान 6 मार्च, 2017 को अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर उनकी सरकार एमसीडी चुनाव में जीतती है तो वह दिल्ली को लंदन बना देंगे। लेकिन यू टर्न के उस्ताद दिल्ली के सीएम तो चुनाव से पहले ही अपनी बात से पलट गए थे। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा कि दिल्ली को लंदन बना देंगे। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली को लंदन बनने की कोई जरूरत नहीं है।  हमारी सरकार केवल यहां की साफ-सफाई और व्यवस्था को विश्वस्तर का बनाएगी और यह केवल आम आदमी पार्टी की सरकार ही कर सकती है। बहरहाल दिल्ली की जनता ने इस बार उनके झूठे वादों पर ऐतबार नहीं किया और 2017 में एमसीडी के 270 सीटों में से 40 सीटों पर आप के चालीस प्रत्याशी अपनी जमानत जब्त कर ली।

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