Home केजरीवाल विशेष जनता के पैसों पर गुलछर्रे उड़ाती केजरीवाल एंड कम्पनी

जनता के पैसों पर गुलछर्रे उड़ाती केजरीवाल एंड कम्पनी

अय्याश केजरीवाल ने दो घंटे में ही पी ली 80 हजार की शराब!

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”मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूं गम भुलाने को…’’ 80 के दशक के मशहूर फिल्म ‘कुली’ का ये गाना अरविंद केजरीवाल पर भी फिट बैठता है। दरअसल केजरीवाल के इस ‘शौक’ की सच्चाई हाल में ही सामने आई है। हालांकि ये ‘शौक’ गम का नहीं बल्कि जनता के पैसों पर ऐश करने का मौका मिलने की ‘खुशी’ का है।

गौरतलब है कि कर्नाटक में 23 मई को कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह था। इसमें अरविंद केजरीवाल को भी बुलाया गया था। इस दौरान बेंगलुरु के ताज होटल में दो घंटे रुके थे। इसके लिए एक लाख 85 हजार 188 का बिल चुकाया गया था। हालांकि महत्वपूर्ण बात ये है कि इसमें से 80 हजार रुपये की शराब मंगवाई गई थी। जाहिर है खुद को आम आदमी कहने वाले केजरीवाल के इस शौक की जानकारी अब सामने आई है। बहरहाल ‘शौक’ कोई बुरी चीज नहीं है, लेकिन दिल्ली की जनता के पैसों पर ‘गुलछर्रे’ उड़ाए जाएं, ये तो कतई जायज नहीं है।

जाहिर है सादगी का पाखंड करने वाले केजरीवाल की कलई खुल गई है। हालांकि केजरीवाल एंड कम्पनी ने जब से दिल्ली की कमान संभाली है, जनता के पैसों से अपने हर शौक पूरे कर रही है। गाड़ी, बंगला, विदेश दौरा से लेकर ऐशो आराम की तमाम सहूलियतें वे सरकारी पैसों के भरोसे ही पूरी कर रहे हैं।

जनता के पैसों पर केजरीवाल एंड कम्पनी की मौज

फरवरी 2015 से अगस्त 2016 के बीच केजरीवाल के कार्यालय में 1.20 करोड़ रुपये समोसे और चाय पर खर्च

मनीष सिसोदिया के सचिवालय और कैंप कार्यालय में 15.10 लाख रुपये चाय और स्नैक्स में पर खर्च किए गए

केजरीवाल द्वारा 2016 में दी गई दावत में एक थाली 12, 000 रुपये की थी, जिसमें 11.4 लाख रुपये खर्च किए गए

अरविंद केजरीवाल 2015 से हर साल इलाज करवाने बेंगलुरु जाते हैं, जहां 17,000 रुपये प्रतिदिन वाले कमरे में रहते हैं

मनीष सिसोदिया को मस्ती पसंद है!
11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बिजनेस क्लास में सफर करने वाला ये आम आदमी सितंबर, 2015 में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी गए। जून 2016 में बर्लिन की भी यात्रा की। 2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे।

बेमतलब के विज्ञापनों पर लुटाए करोड़ों
CAG की रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर करोड़ों रुपए के विज्ञापन जारी किए। सरकार की इमेज चमकाने के चक्कर में जनता के 21.62 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए। इतना ही नहीं केजरीवाल सरकार ने अन्य राज्यों में भी विज्ञापन पर 18.39 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कैग के मुताबिक 2.15 करोड़ रुपये के विज्ञापन ऐसे हैं जो बेतुके हैं। शब्दार्थ नाम की प्राइवेट एड एजेंसी (आरोप है कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साले की है कंपनी) को 3.63 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जिसकी आवश्यकता नहीं थी।

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