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लोकतंत्र पर कलंक है ओम थानवी की पत्रकारिता

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पत्रकारिता एक ऐसे दौर में है, जहां ओम थानवी जैसे पत्रकारों के लिए 125 करोड़ देशवासियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण राजनीति है। ओम थानवी राजनीति की खबरों का विश्लेषण नहीं करते हैं, बल्कि खबरों और विश्लेषणों के जरिए राजनीति करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता को सत्ता के खेल का हथियार बना लिया है। ओम थानवी की पत्रकारिता देश और लोकतंत्र के लिए कलंक है।

ओम थानवी जनसत्ता में संपादक रह चुके हैं और हाल ही में 1 मार्च को राजस्थान पत्रिका समूह के सलाहकार संपादक की कुर्सी संभाली है। सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं क्योंकि यहीं पर उनको अपनी पूरी मानसिक ऊर्जा खपाने का अवसर मिलता है। ओम थानवी को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी और सरकार की आलोचना करने से अधिक आनंद विरोध करने में आता है। आइए, आपको ओम थानवी की इस कलंकित पत्रकारिता से परिचित कराते हैं-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-1 ओम थानवी ने 1 मार्च को राजस्थान पत्रिका समूह के सलाहकार संपादक की कुर्सी संभालने की खबर को प्रचारित करने के लिए फेसबुक पर लिखे पोस्ट में अपने इरादों का भी खुलासा किया। ओम थानवी का इरादा है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का भरपूर विरोध किया जाए, क्यों कि मोदी सरकार का सही या गलत हर हाल में विरोध करने को ही वह पत्रकारिता का धर्म मानते हैं। ओम थानवी के इस फेसबुक पोस्ट को पढ़कर, आपको भी देश के लोकतंत्र में पत्रकारिता को कलंकित करने का पता चलेगा-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-2 ओम थानवी की पत्रकारिता में मुद्दों पर बहस से अधिक व्यक्तिगत छींटाकशी और अमर्यादित बयानबाजी होती है। 25 जनवरी के Tweet में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर जिस तरह असभ्य और अमर्यादित टिप्पणी को शेयर किया, उसने पत्रकारिता को ही कलंकित नहीं किया बल्कि देश को भी शर्मिंदा किया। उस Tweet को आप भी पढ़िए- 22 जनवरी को भी ओम थानवी ने प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए  Tweet किया जिसने पत्रकारिता को और अधिक शर्मसार किया। क्या यही देश की पत्रकारिता का स्तर है, जहां मूल बातों को समझे बिना अनाप- शनाप बातें लिखी जाती हैं-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-3 ओम थानवी की पत्रकारिता में तर्क का कोई स्थान नहीं है, यह सिर्फ और सिर्फ मौकापरस्ती और विरोध की पत्रकारिता है। इस पत्रकार को संसद में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान सांसद रेणुका चौधरी के ठहाकों और छात्र-छात्राओं के कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का छात्रों के अनुरोध पर सीटी बजाने में कोई अंतर समझ में नहीं आता है। ओम थानवी ने प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए 9 फरवरी के Tweet में जिन तथ्यों का सहारा लिया, उससे उनकी पत्रकारिता का दीवालियापन ही दिखाई देता है- ओम थानवी ने 9 फरवरी को एक और Tweet करके यह साबित कर दिया कि उनकी पत्रकारिता में प्रधानमंत्री मोदी का सिर्फ विरोध करने के लिए  बेसिर-पैर की कोई भी बातें लिखी जा सकती हैं।

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-4 ओम थानवी की सोच में प्रधानमंत्री मोदी का विरोध ही हावी नहीं रहता है, वह उन खबरों में भी देश बांटने के मुद्दों को तलाश लेते हैं, जहां कोई अवसर ही नहीं होता है। प्रधानमंत्री मोदी की रमाला की यात्रा को धार्मिक रंग देने के लिए ओम थानवी ने बड़ी ही ओछी पत्रकारिता की। समाचार पत्रों ने रमाला की जगह रामल्ला या रामल्लाह शब्द का प्रयोग किया, जो कि प्रायः समाचार पत्र में होता ही रहता है, लेकिन इसको ओम थानवी ने 11 फरवरी के Tweet में बड़े ही भद्दे तरीके से पेश किया। पत्रकारिता के कलंक के इस Tweet को आप भी पढ़िए-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-5- ओम थानवी की पत्रकारिता का एक और बदसूरत रंग 9 जनवरी के Tweet में नजर आया। राष्ट्रगान पर सर्वोच्च न्यायलय ने पूर्व में दिए अपने फैसले को पलट दिया और आदेश दिया कि फिल्मों में राष्ट्रगान दिखाना अनिवार्य नहीं है। सर्वोच्च न्यायलय के इस फैसले को भी बदसूरत रंग देकर, प्रधानमंत्री मोदी के विरोध को नया आयाम दिया। बातों का मतलब बदलकर, पत्रकारिता को कलंकित करना ओम थानवी को बखूबी आता है-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-6 ओम थानवी की पत्रकारिता में खबरों को बदरंग करके देश के माहौल को बिगाड़ने का काम किया जाता है। 12 फरवरी के Tweet में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बयान को बदरंग करते हुए लिखा-

12 फरवरी को ही एक दूसरे Tweet में भी इस सामान्य बयान का बतंगड़ बना उन्होंने पत्रकारिता को कलंकित कर दिया-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-7 ओम थानवी विरोध के हथकंडों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे एक पत्रकार को दूर रहना चाहिए। इन हथकंडों में एक होता है दूसरों की बातों को बिना जांचे परखे, झूठा कह देना। 8 जनवरी के Tweet में ओम थानवी ने एक सही तथ्य को गलत ठहराने की कोशिश की, क्योंकि इसे प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल के सदस्य पीयूष गोयल ने कहा था। हर दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि ज़ुकरबर्ग, भारत आकर नीम करोली बाबा से मिले थे। आप भी इस Tweet को पढ़िए-

लोकतंत्र में पत्रकारिता का कलंक-8 ओम थानवी प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए सही बातों को झूठा साबित करने के हथकंडे के साथ-साथ झूठी खबरों को भी शेयर और प्रचारित करने का काम करते हैं। 12 फरवरी को उन्होंने एक Tweet को शेयर किया जिसमें लिखा था कि देश के 17,000 अरबपति विदेश जा बसे हैं। ओम थानवी ने इसकी सच्चाई परखे बिना अफवाह के आधार पर विरोध किया। आर्थिक समाचार पत्रों की रिपोर्टों के अनुसार इस देश में कुल 132 अरबपति हैं। जनता को गुमराह करने वाले इस Tweet को पढ़िए-

पत्रकारिता को ओम थानवी जैसे पत्रकारों ने कलंकित ही नहीं किया है बल्कि जनता के विश्वास को जबरदस्त ठेस भी पहुंचाई है। इस तरह की पत्रकारिता देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।