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जनधन योजना की सफलता : 35.39 करोड़ खाते, 97 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंची जमा राश‍ि

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रमुख योजनाओं में एक ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ का उद्देश्य अब तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग प्रणाली के दायरे में लाना है। यह योजना अपने मकसद को पूरा करने में लगातार कामयाब हो रही है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार जहां जनधन खातों की संख्या बढ़कर 35.39 करोड़ पहुंच गयी है। वहीं कुल जमा राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह तीन अप्रैल को 97,665.66 करोड़ रुपये पहुंच गयी। आंकड़ों के अनुसार 27 मार्च को इन खातों में जमा राशि 96,107.35 करोड़ रुपए थी। इससे 1 सप्ताह पहले यह 95,382.14 करोड़ रुपए थी।

27.89 करोड़ से अधिक खाताधारकों को मिले रूपे डेबिट कार्ड

28 अगस्त 2014 को शुरू हुई इस योजना के तहत अबतक 27.89 करोड़ से अधिक खाताधारकों को रूपे डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। करीब 59 प्रतिशत खाते ग्रामीण तथा अर्द्ध-शहरी क्षेत्र में खोले गए। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्यजन को आर्थिक रूप से सशक्त करने का माध्यम बन गई है। इस योजना के तहत जीरो बैलेंस सुविधा वाले खाते खोले जाते हैं। दुर्घटना बीमा 2 लाख, ओवरड्राफ्ट की सुविधा 10,000 रुपए

जनधन खातों को अधिक आकर्षक बनाने के लिये सरकार ने इन खातों में मिलने वाले ओवरड्राफ्ट की सुविधा को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया। इसके साथ ही इसके तहत मिले रुपे कार्ड से जुड़ी दुर्घटना बीमा योजना के तहत मिलने वाली राशि की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है जो 28 अगस्त 2018 के बाद खुलने वालों खाताधारकों के लिए होगा। इसके तहत 2 हजार रुपये तक की ओडी के लिए कोई शर्त नहीं होगी और ओडी लेने वालों की आयु पहले 18 से 60 वर्ष थी जिसे बढ़ाकर अब 65 वर्ष कर दी गयी है।

जनधन योजना बनी महिला सशक्तीकरण का आधार

इस योजना के तहत अब तक 35 करोड़ से ज्यादा लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ चुके हैं, यानी करोड़ों-करोड़ लोगों ने पहली बार बैंक में प्रवेश किया है। कुल खातों में 50 प्रतिशत से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर हैं। इतना ही नहीं इन महिलाओं ने सिर्फ नाम के लिए खाते नहीं खुलवाए हैं, बल्कि इन खातों से लगातार लेनदेन भी किया जा रह है। जनधन खातों को खुलवाने और खाताधारकों की मदद के लिए बैंक मित्र बनाए गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इन बैंक मित्रों में सिर्फ 2 प्रतिशत महिलाएं, अगर महिला बैंक मित्रों की संख्या बढ़ा दी जाए तो महिला खाताधारकों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। बहरहाल इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में बढ़ोतरी हुई है, और आज गांव-देहात की महिलाएं आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनी हैं।

कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार पर लगी  रोक

केंद्र सरकार समाजिक सुरक्षा के तहत दी जाने वाले तमाम पेंशन, खाद्यान्न सब्सिडी, गैस सब्सिडी आदि का पैसा इन्हीं जनधन खातों के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचा रही है। अब ग्रामीणों के खातों में बगैर किसी भ्रष्टाचार के सब्सिडी की रकम पहुंच रही है, यह भी एक बड़ा कारण है कि जनधन खातों में रुपए का लेनदेन लगातार बढ़ता जा रहा है। कभी बंद नहीं होगी जनधन योजना

प्रधानमंत्री जनधन योजना की भारी सफलता को देखते हुए सरकार ने इस योजना को हमेशा खुली रखने का फैसला किया है। योजना अनिश्चित काल तक खुली रहेगी। पीएमजेडीवाई को अगस्त, 2014 में शुरू किया गया था। तब योजना को चार साल के खोला गया था। आम जनता को बैंकों से जोड़ने और उन्हें बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इसकी शुरुआत की गई।

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