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हमारी विरासत और मजहबों के पैगाम वो ताकत हैं, जिससे दहशतगर्दी से पार पा सकते हैं- प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि “इंसानियत के खिलाफ दरिंदगी करने वाले शायद ये नहीं समझते हैं कि नुकसान उस मजहब का होता है, जिनके लिए खड़े होने का वो दावा करते हैं।” इस्लामिक हेरिटेज विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आतंकवाद या रेडिक्लाइजेशन के खिलाफ होने का मतलब किसी पंथ के खिलाफ होना नहीं है। यह उस मानसिकता के खिलाफ होना है जो युवाओं को गुमराह करते हैं और मासूमों पर जुल्म करते हैं। जॉर्डन नरेश किंग अब्दुल्लाह II की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि वो सबको साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं।

उनके अनुसार खुशहाली और पूर्ण विकास तभी संभव है जब मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में कुरान शरीफ और दूसरे में कंप्यूटर हो। उन्होंने कहा, कि हर परंपरा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए होती है। मुस्लिम युवा इस्लाम से भी जुड़ें और विज्ञान का भी इस्तेमाल करें।

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की मूल बातें-

  • दुनिया के सभी बड़े धर्म भारत के पालने में पले-बढ़े हैं। दुनियाभर के मजहब और मत भारत की मिट्टी में पनपे हैं। यहां की आबोहवा में उन्होंने जिंदगी पाई और सांस ली।
  • अमन और मोहब्बत के पैगाम की खुशबू भारत के चमन से सारी दुनिया में फैली है। चाहे वो ढाई हजार साल पहले भगवान बुद्ध हों या पिछली शताब्दी में महात्मा गांधी हों।
  • यहां के संदेश की रोशनी ने सदियों से हमें सही रास्ता दिखायाा है। इसी संदेश की शीतलता ने घावों पर मरहम भी लगाया है। दर्शन और मजहब की बात तो छोड़ें, भारत के जनमानस में भी यह अहसास भरा हुआ है कि सब में एक ही रोशनी का नूर है। जर्र-जर्रे में उसी एक की झलक है।
  • भारत का दोस्त जॉर्डन इतिहास के किताबों और धर्मग्रंथों में एक अमिट नाम है। जॉर्डन एक ऐसी पवित्र भूमि पर आबाद है, जहां से खुदा का पैगाम, पैगंबरों और संतों की आवाज बनकर दुनिया भर में गूंजा था।
  • भारत की राजधानी दिल्ली सुफियाना कलाओं की सरजमीं भी रही है।
  • दिल्ली का नाम दहलीज शब्द से निकला है। गंगा-यमुना के दोआब की दहलीज, भारत की मिलीजुली गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रवेश द्वार है।
  • दिल्ली ने भारत के दर्शन, सूफियों के प्रेम और मानवतावाद की मिली-जुली परंपरा से मानवमात्र की मूलभूत एकता का पैगाम दिया है। ये भावना वसुधैव कुंटंबकम के दर्शन पर आधारित है।
  • सासंकृतिक विविधता और बहुलता भारत की विशेषता है, जिस पर हर भारतीय को गर्व है।
  • होली हो, गुड फ्राइडे हो, बुद्ध जयंती, रमजान या फिर ईद हो। ये सभी शांति और सौहार्द के पर्व हैं।
  • दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में डेमोक्रेसी सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समानता, विविधता और सामंजस्य का मूल आधार है।

कार्यक्रम से जुड़ी कुछ और तस्वीरें-

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