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विविधता में एकता ही हमारी विशेषता- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विविधता में एकता ही हमारी विशेषता है। प्रधानमंत्री मोदी ने आज, 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती के मौके पर गुजरात के केवडिया में स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, ‘पूरी दुनिया में अलग-अलग देश, अलग-अलग पंथों, अलग-अलग विचारधाराओं, भाषाओं, रंग-रूप के आधार पर बने हैं। लेकिन हम कभी कभी देखते हैं कि एकरूपता, उन देशों की विशेषता और पहचान रही है। लेकिन भारत की विशेषता है विविधता में एकता, हम विविधताओं से भरे हुए हैं। विविधता में एकता हमारा गर्व, गौरव और हमारी पहचान है। हमारे यहां विविधता को सेलिब्रेट किया जाता है। हमें विविधता में विरोधाभास नहीं दिखता बल्कि उसमें अंतर्निहित एकता का सामर्थ्य दिखता है।’

उन्होंने कहा, ‘जब हम विभिन्न पंथों-संप्रदायों की परंपराओं, आस्थाओं का सम्मान करते हैं तो सदभाव-स्नेहभाव में और वृद्धि हो जाती है। इसलिये हमें हर पल, विविधता के हर अवसर को सेलिब्रेट करना है। यही तो नेशन बिल्डिंग है। मैं मानता हूं कि अपनी एकता की इस ताकत का पर्व निरंतर मनाना बहुत आवश्यक है। एकता की ये ताकत ही है जिससे भारतीयता का प्रवाह है, गति है। एकता की ये ताकत ही है जो डॉ बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान की प्रेरणा भी है।’

सरदार पटेल की 144 वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘जिस तरह किसी श्रद्धा स्थल पर आकर एक असीम शांति और ऊर्जा मिलती है, वैसी ही अनुभूति मुझे यहां सरदार साहब के पास आकर होती है। लगता है जैसे उनकी प्रतिमा का भी अपना एक व्यक्तित्व है, सामर्थ्य है और सन्देश है। देश के अलग-अलग कोने से, किसानों से मिले लोहे से, अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी से इस प्रतिमा का आधार बना है। इसलिए ये प्रतिमा हमारी विविधता में एकता का भी जीता-जागता प्रतीक है। अब से कुछ देर पहले ही एकता के मंत्र को जीने के लिए, उसके भाव को चरितार्थ करने के लिए, राष्ट्रीय एकता का संदेश दोहराने के लिए राष्ट्रीय एकता दौड़ देश के हर कोने में संपन्न हुई है। देश के अलग-अलग शहरों में, गावों में, अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘शताब्दियों पहले, तमाम रियासतों को साथ लेकर, एक भारत का सपना लेकर, राष्ट्र के पुनुरुद्धार का सफल प्रयास करने वाला एक नाम था, वो नाम था चाणक्य का। चाणक्य के बाद अगर ये काम कोई कर पाया तो वो सरदार पटेल ही थे। 21वीं सदी में भारत की एकता भारत के विरोधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। मैं आज राष्ट्रीय एकता दिवस पर, प्रत्येक देशवासी को देश के समक्ष मौजूद ये चुनौती याद दिला रहा हूं। कई आये, कई चले गए- लेकिन बात तो फिर भी यही निकली- ‘कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘जो हमसे युद्ध में नहीं जीत सकते, वो हमारी इसी एकता को चुनौती दे रहे हैं। लेकिन वो भूल जाते हैं कि सदियों की ऐसी ही कोशिशों के बावजूद, हमें कोई मिटा नहीं सका। जब हमारी विविधताओं के बीच एकता पर बल देने वाली बातें होती हैं, तो इन ताकतों को मुंहतोड़ जवाब मिलता है।’

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