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बिजली और गैस कनेक्शन से रोशन हो रहे हैं देश के सबसे पिछड़े इलाके- सर्वे

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मोदी सरकार की ‘सौभाग्य’ और ‘उज्ज्वला’ योजनाओं का असर दिखने लगा है। केंद्र की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं से देश के सबसे पिछड़े 6 राज्यों में ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर-सीईईडब्ल्यू- नाम की स्वतंत्र संस्था के एक सर्वे के मुताबिक बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के करीब सवा तीन करोड़ परिवारों में रसोई गैस और बिजली की स्थिति बेहतर हुई है। 

संस्था ने तीन साल पहले वर्ष 2015 में इन 6 राज्यों के 54 जिले के 756 गांवों के 9000 से ज्यादा परिवारों के बीच एक सर्वे किया था। इन्हीं इलाकों में तीन साल बाद वर्ष 2018 के मध्य में भी एक सर्वे किया गया। एजेंसी ने पाया कि इन क्षेत्रों में बिजली और रसोई गैस के कनेक्शन की स्थिति में काफी सुधार आया है।     

बिजली की स्थिति में सुधार

सर्वे के मुताबिक इन इलाकों में बिजली की पहुंच वर्ष 2015 के 64 प्रतिशत के मुकाबले वर्ष 2018 में 84 प्रतिशत हो गई। पश्चिम बंगाल में बिजली की पहुंच 99.99 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि ओडिशा में बिजली की पहुंच 92 प्रतिशत पायी गई। बिहार में विद्युतीकरण की दर 95.5 प्रतिशत पायी गई। सितंबर 2017 में प्रारंभ की गई सौभाग्य योजना काफी सफल रही है। इस योजना के अंतर्गत देश के सौ प्रतिशत परिवारों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।  

सीईईडब्ल्यू ने असेस टू क्लीन कूकिंग एनर्जी एंड इलेक्ट्रिसिटी सर्वे ऑफ स्टेट्स-एसीसीईएसएस- नाम के अपने सर्वे की रिपोर्ट में कहा है कि सभी छह राज्यों में ‘ओ’ श्रेणी (जहां बिजली की उपलब्धता की रोजाना अवधि अपेक्षाकृत कम है) के घरों में भी काफी कमी आई है। बिहार में यह आंकड़ा 79 प्रतिशत से घटकर 38 प्रतिशत रह गया है। अन्य पांच राज्यों में भी बिजली की उपलब्धता में खासी बढ़ोतरी देखी गई, जिनमें पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे अच्छी पायी गई।

गांव-गांव तक पहुंचा गैस कनेक्शन

गांव-गांव तक रसोई गैस कनेक्शन पहुंचाने की बात करें तो सर्वे ने पाया कि 6 राज्यों के इन इलाकों में वर्ष 2015 के मुकाबले एलपीजी सिलिंडर की संख्या और गैस के उपयोग में दोगुने से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वैसे ग्रामीण परिवार जो खाना पकाने के लिए सिर्फ एलपीजी सिलिंडर का ही इस्तेमाल करते हैं, उनकी संख्या वर्ष 2015 में 5 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018 में 19 प्रतिशत हो चुकी है।

इसका अर्थ यह हुआ कि ऐसे परिवार खाना पकाने के लिए पारंपरिक और वायु प्रदूषण करने वाले माध्यमों को छोड़ रहे हैं। एलपीजी का इस्तेमाल करने वाले ग्रामीण परिवारों का प्रतिशत वर्ष 2018 में 58 हो गया, जो 2015 में 22 प्रतिशत था। इन छह राज्यों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे है, जहां के ग्रामीण क्षेत्रों के 68 प्रतिशत परिवार एलपीजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस संदर्भ में ओडिशा के ग्रामीण इलाकों ने 9 प्रतिशत से 50 प्रतिशत की छलांग लगाई है, जबकि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों ने 6 प्रतिशत से 34 प्रतिशत की छलांग लगाई है।

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