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विजयादशमी पर भारत को मिलेगा पहला राफेल फाइटर प्लेन, IAF की बढ़ेगी ताकत

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भारतीय वायु सेना को बहुत प्रतीक्षित राफेल फाइटल प्लेन एयर फोर्स डे के दिन मिलेगा। यह संयोग की बात है कि 8 अक्टूबर यानि वायु सेना दिवस के दिन ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी का त्योहार भी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दशहरे के दिन फ्रांस में विधिवत शस्त्र पूजा के बाद पहले राफेल विमान को भारतीय वायु सेना में शामिल करेंगे। राफेल हैंड ओवर सिलेब्रेशन समारोह दक्षिणी फ्रांस के बंदरगाह वाले शहर बॉगदू में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री दो सीटों वाले फाइटल प्लेन राफेल में उड़ान भी भरेंगे। उनके साथ तीन और राफेल फाइटर्स उड़ाने भरेंगे। पहला राफेल अगले वर्ष मई महीने तक भारत आ जाएगा।

भारत ने सितंबर, 2016 में फ्रांस की सरकार के साथ 36 राफेल विमानों के सौदे पर हस्ताक्षर किया था। दोनों देशों के बीच यह डील 619 अरब रुपये की हुई। राफेल में भारत की जरूरतों के मुताबिक साजो-सामान लगाए जा रहे हैं। इनमें डिस्प्ले लगे हेलमेट, रडार वॉर्निग रिसिवर्स और इन्फ्रारेड सर्च एवं ट्रैकिंग सिस्टम्स प्रमुख हैं। राफेल में लगा स्काल्प स्टैंड-ऑफ मिसाइल में पाकिस्तान स्थित किसी भी आतंकवादी कैंप को भारत के एयरस्पेस से ही निशाना बनाने की क्षमता है। ये मिसाइलें 300 किमी से भी ज्यादा दूरी तक मार कर सकती हैं। राफेल को अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा जो भारत की रणनीतिक पश्चिमी सीमा के पास है। कुछ राफेल पश्चिम बंगाल के हासिमारा एयर बेस पर रखे जाएंगे

राफेल लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी एमबीडीए का कहना है कि मीटिअर और स्काल्प मिसाइलों से लैस होने के चलते यह विमान बेहद खतरनाक हो गया है। दोनों मिसाइलों से लैस राफेल भारत की सैन्य शक्ति को और मजबूत करेगा। एमबीडीए ने कहा, अत्याधुनिक मिसाइल से लैस राफेल भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगा।

राफेल दुश्मनों के गढ़ में अंदर तक जाकर प्रहार करने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता से भारत एशियाई क्षेत्र में मजबूत हवाई ताकत के तौर पर उभरेगा। राफेल विमान में तैनात मीटिअर और स्काल्प मिसाइलें वायुसेना को हवा से हवा में मार करने की अद्भुत क्षमता प्रदान करेंगी। ये दोनों मिसाइलें राफेल जेट का सबसे बड़ा आकर्षण हैं।

मीटिअर एडवांस एक्टिव रडार सीकर से लैस है। यह हर तरह के मौसम में वार करने में सक्षम है। तेज रफ्तार जेट से लेकर छोटे मानव रहित विमानों के साथ-साथ क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बना सकती है। स्काल्प करीब 300 किमी तक मार करने वाली मिसाइल है। यह पहले से तय हमलों को नाकाम करने या फिर स्थिर लक्ष्यों को भेदने में दक्ष है। स्काल्प ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स और फ्रांसीसी वायुसेना का हिस्सा है। इसे खाड़ी युद्ध के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था। यह सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऐक्शन को और आसानी से अंजाम दे सकती है

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