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SCO में रहकर चीन-पाकिस्तान पर कसी जा सकेगी नकेल, पीएम मोदी की कूटनीतिक पहल

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अगले हफ्ते भारत को शंघाई सहयोग संगठन की पूर्णकालिक सदस्यता मिलने वाली है। वैसे देखने में लगता है कि चीनी प्रभुत्व वाले इस संगठन में शामिल होकर भारत क्या करेगा ? लेकिन भारत ने बहुत ही बड़ी कूटनीतिक सूझबूझ से इसमें शामिल होने का फैसला किया है। भारत ही नहीं पाकिस्तान भी इसमें शामिल हो रहा है। इसकी प्रक्रिया दरअसल 2015 में रूस के उफा सम्मेलन में ही शुरू हो गई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी वहां के दौरे पर पहुंचे थे। इसी सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। अभी दोनों देशों को इस संगठन में पर्यवेक्षकों का दर्जा मिला हुआ है।

शंघाई सहयोग संगठन का मकसद
1996 में रूस, चीन, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों ने आपसी तालमेल और सहयोग को लेकर सहमत हुए। तब इस शंघाई-5 कहा गया। 2001 में इसमें उज्बेकिस्तान को भी शामिल कर शंघाई सहयोग संगठन (SCO)की स्थापना की गई। इस संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य सहयोग, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और आतंकवाद के विरोध में एकजुट होना है। फिलहाल भारत, पाकिस्तान और इरान जैसे देश इसके पर्यवेक्षकों में शामिल हैं।

चीन पर बढ़ेगा दबाव
अबतक चीन अधिकतर मसलों पर चोरी छिपे या खुलेआम पाकिस्तान की तरफदारी करता रहा है। लेकिन जब भारत और पाकिस्तान दोनों इस संगठन में शामिल रहेंगे, तो चीन के लिए सदस्य देशों की भावनाओं को नजरअंदाज कर पाकिस्तान का हिमायती बनना आसान नहीं रहेगा। इस संगठन का काम ही आतंकवाद के विरोध पर टिका है। जब चीन के साथ भारत भी सदस्य के तौर पर मौजूद होगा, तो क्या चीन के लिए पाकिस्तान को बचाना आसान रह जाएगा। इसके ठीक उलट भारत के लिए चीन को घेरने में मदद मिलेगी।

पाकिस्तान पर कसी जा सकेगी नकेल
भारत में आतंकवाद का एकमात्र सूत्रधार पाकिस्तान है, ये बात चीन समेत सारी दुनिया को पता है। SCO में शामिल होने के बावजूद अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है, तो भारत के पास उसपर दबाव बनाने का बड़ा मौका हाथ लगेगा। अगर सबूतों के आधार पर भारत पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करेगा, तब न तो चीन या बाकी कोई देश पाकिस्तान का पक्ष ले सकेगा। इस संगठन को मध्य एशिया का एक बड़ा सशक्त संगठन माना जाता है। भारत-पाकिस्तान के शामिल होने के बाद इसकी स्थिति और भी मजबूत होगी। ऐसे में इतनी बड़ी शक्ति को अनसुना करना पाकिस्तान पर बहुत भारी पड़ सकता है। दूसरी तरह भारत को पाकिस्तान को घेरने का एक बहुत बड़ा मंच मिल जाएगा।


रूस से द्विपक्षीय संबंधों का भी लाभ
SCO में भारत को शामिल करवाने में रूस ने बहुत ही सक्रिय भूमिका अदा की है। भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंधों को दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री के रूस दौरे की सफलता से इसकी विश्वसनीयत और भी परवान चढ़ी है। इतिहास गवाह है कि जब भी हालात बने हैं भारत और रूस एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। भारत-पाकिस्तान या भारत-चीन के संबंधों की स्थिति भी रूस से छिपी नहीं है। ऐसे भी संभावना ये जताई जा रही है कि SCO का सदस्य बनाकर आतंकवाद के मसले पर रूस के लिए भारत का सहयोग करना और भी आसान होगा।

NSG और मसूद अजहर पर बदलेगा चीन का रुख !
न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप और पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर के मुद्दे पर अबतक चीन अड़ंगेबाजी करता आया है। लेकिन भारत की कोशिश होगी कि SCO के माध्यम से चीन पर दबाव बनाकर इसकी पैंतरेबाजी को खत्म करे। क्योंकि जब भी NSG में भारत की सदस्यता की बात उठती है, चीन किसी न किसी बहाने से उसे रोक देता है। इसी तरह चीन के चलते ही अबतक मौलाना मसूद अजहर पर बैन नहीं लगाया जा सका है। इसके चलते वो वेखौफ होकर पाकिस्तान में बैठकर मानवता विरोधी कारनामों को अंजाम देता रहता है।

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