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केरल की भीषण आपदा में पूरा भारत एक साथ खड़ा हो उठा

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विविधताओं से भरे भारत में अनेकता में एकता का सूत्र सभी को आपस में जोड़े हुए है। इसे शब्दों में नहीं समझा जा सकता है, लेकिन हर भारतीय इसे प्रतिदिन जीता है। अपनेपन की यह अनुभूति, केरल में आई बाढ़ की भीषण तबाही में पूरे देश में एक बार फिर देखने को मिल रही है। सुदूर दक्षिण के केरल राज्य से पूरे देशवासियों के लगाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर भारतीय अपनी अपनी शक्ति के अनुसार मदद करने के लिए आगे आया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बढ़कर हाथ थामा
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि के तुरंत बाद 17 अगस्त की रात को ही प्रधानमंत्री मोदी केरल की भीषण बाढ़ की चपेट आए लोगों का हालचाल जानने के लिए तिरुवनंतपुरम पहुंच गए। केरल के मुख्यमंत्री और अधिकारियों के साथ बैठक में स्थिति का जायजा लेने के बाद स्वयं स्थिति का आंकलन करने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ की स्थिति से निपटने और लोगों को तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा पहले से दी जा रही सहायता के दायरे को व्यापक करने की घोषणा की। प्रधानमंत्री की घोषणा के साथ ही, देश के तमाम राज्य सरकारों के साथ-साथ आम जनता और स्वयंसेवी संस्थाएं मदद के लिए उठ खड़े हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने केरल को दी विशेष सहायता
प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में भयावह बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा दी जा सकने वाली सबसे अधिक सहायता की घोषणा की है। इसमें सरकार को धन देने से लेकर आम लोगों के घरों और फसलों को फिर संवारने की सहायता और पीड़ितों के हाथ में पहुंचने वाली आर्थिक सहायता शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा केरल को दी गई विशेष सहायता में शामिल है-
बाढ़ की विभिषिका से लोगों को बचाने के लिए NDRF की 57 टीमों के 1300 जवानों को उतार दिया, जो अब तक का NDRF का सबसे बड़ा राहत कार्य है। इसके अतिरिक्त BSF, CISF और RAF की पांच कंपनियों को बचाव और राहत कार्य में लगाया गया है।

• नभ, जल व थल सेना के सैनिकों को भी बचाव कार्य में लगा दिया। 38 हेलीकॉप्टर और 20 हवाई जहाज से लोगों और राहत सामग्री को लाने और ले जाने के लिए लगाया गया है।

• थल सेना की 10 टुकड़ियों के साथ इंजीनियरिंग टास्क फोर्स की 10 टीमों को उतारा गया है। इंडियन नेवी की 82 टीमों को, इसके अतिरिक्त कोस्ट गार्ड की 42 टीमों, 2 हेलिकॉप्टर और 2 जहाजों को मदद के लिए लगाया गया है।

• बाढ़ की विभिषिका में मरने वाले व्यक्ति के परिवार को दो लाख रुपये और घायल व्यक्ति के लिए पचास हजार रुपये देने का ऐलान किया गया।

• राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपये की सहायता दी,यह सहायता पहले से दी गई 100 करोड़ रुपये की सहयता के अतिरिक्त है।

• राज्य की जरुरत और मांग के अनुसार अनाज, दवाओं, इत्यादि सामानों की सहायता दी जा रही है।

• बीमा कंपनियों को स्पेशल कैंप लगाकर प्रभावित परिवारों के नुकसान का जायजा करने और धन देने का निर्देश दिए गए हैं।

• फसल बीमा योजना के तहत फसलों के नुकसान की भरपाई का बीमा कंपनियों को निर्देश।

• NHAI को गांवों की सड़कों और राजमार्गों को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले बनाने का निर्देश दिया।

• सार्वजनिक क्षेत्र की NTPC और PGCIL को राज्य में बिजली की व्यवस्था को दुरस्त करने का निर्देश।

• केरल के गांवों में बाढ़ में बह गए कच्चे मकानों को बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले लागू करने का निर्देश।

• मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 5.5 करोड़ कार्य दिवस के लिए बजट दिया गया और यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार की जरुरत और मांग पर इसे बढ़ा दिया जायेगा।

• एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत किसानों के बर्बाद हुए बागों को पुर्नजीवित करने का निर्देश।

राज्य सरकारों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया
केरल में भीषण बाढ़ से हुई तबाही में देश के हर कोने से मदद के लिए सभी दौड़ पड़े। सभी राज्य सरकारों और आम जनता ने केरल के मुख्यमंत्री के आपदा सहायता कोष में दान दिया। अभी भी, यह दान हर तरफ से पहुंच रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठन देश भर से राहत सामग्री को एकत्र करके केरल में लोगों के मदद के लिए पहुंच चुके हैं। राज्य सरकारों ने केरल के लिए कुछ इस तरह से मदद की-

गुजरात 10 करोड़ रुपये
हरियाणा 10 करोड़ रुपये
महाराष्ट्र 20 करोड़ रुपये ( इसके अतिरिक्त 1.5 करोड़ रुपये के फूड पैकेट और 11 टन अनाज)
छत्तीसगढ़ 3 करोड़ रुपये ( इसके अतिरिक्त एक ट्रेन भरकर 2.5 करोड़ रुपये का चावल भेजा)
उत्तराखंड 5 करोड़ रुपये
राजस्थान 10 करोड़ रुपये ( इसके अतिरिक्त 27 सदस्यों की आपदा राहत टीम के साथ 12 नावें)
मध्य प्रदेश 10 करोड़ रुपये
हिमाचल प्रदेश 5 करोड़ रुपये
उत्तर प्रदेश 15 करोड़ रुपये
झारखंड 5 करोड़ रुपये
अरुणाचल प्रदेश 3 करोड़ रुपये
मणिपुर 2 करोड़ रुपये
जम्मू-कश्मीर 2 करोड़ रुपये
तमिलनाडु 10 करोड़ रुपये ( इसके अतिरिक्त 500 मिट्रिक टन चावल, 300 मिट्रिक टन दूध का पाउडर व 15 हजार लीटर दूध।
कर्नाटक 10 करोड़ रुपये
पुडुचेरी 2 करोड़ रुपये
बिहार 10 करोड़ रुपये
दिल्ली 10 करोड़ रुपये
आंन्ध्र प्रदेश 10 करोड़ रुपये
तेलंगाना 25 करोड़ रुपये
पंजाब 10 करोड़ रुपये
ओडिशा 10 करोड़ रुपये ( इसके अतिरिक्त 250 लोगों की राहत बचाव की टीम के साथ 500 मिट्रिक टन पाँलीथीन और 75 पावर बोट)

केरल पर बरपी इस आपादा में देश का हर व्यक्ति मदद करने के लिए आगे बढ़ा, क्योंकि अपनों के दर्द को अपना ही समझ सकता है।

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