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मोदी सरकार के 4 वर्ष: सांस्कृतिक शक्ति के संवर्धन ने देश को संरक्षित किया

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आर्थिक और सामरिक शक्ति के साथ, भारत की सांस्कृतिक शक्ति भी न्यू इंडिया का निर्माण कर रही है।सांस्कृतिक शक्ति, देश को विरासत में मिली है लेकिन इसे न्यू इंडिया की सिद्धि का साधन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बनाया है। राष्ट्र निर्माण में इस अवचेतन शक्ति का उपयोग करने के लिए, उन्होंने कई नीतियों और योजनाओं को लागू किया।

भारत के योग को विश्व मंच दिया- मन और शरीर की शक्तियों को विकसित करने वाली भारत की हजारों साल पुरानी परपंरा, योग को प्रधानमंत्री मोदी की पहल और रणनीति से 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा में विश्व के सभी देशों ने मान्यता दी। पूरा विश्व, वर्ष 2015 से 21 जून को योग दिवस मनाने लगा। आज, विश्व में योग के प्रति चेतना पैदा हुई है, इसका लाभ लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।अाप्रवासी भारतीयों को भारत का ब्रैंड एम्बैसडर बनाया-प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशों में रहने वाले अाप्रवासी भारतीयों के साथ भावनात्मक रिश्ता स्थापित किया। वर्ष 2014 में अपने पहले अमेरिका दौरे में मैडिसन स्क्वेयर से अमेरिकी भारतीयों से जो रिश्ता स्थापित करने का सिलसिला शुरू किया, वह आज उनके हर विदेशी दौरे का आवश्यक अंग है। प्रधानमंत्री, भारत की सांस्कृतिक विरासत से विश्व को परिचित कराने के लिए, अाप्रवासी भारतीयों को ही देश का ब्रैंड एम्बसैडर बना दिया।भारत घूमने आने वालों की रिकॉर्ड संख्या- पिछले चार सालों में भारत घूमने आने वालों की संख्या में रिकार्ड तेजी आयी है। वर्ष 2017 के आंकड़े बताते हैं कि विदेश से 1 करोड़ 10 लाख लोग भारत दर्शन के लिए आये, जबकि 2016 में 90 लाख 70 हजार लोग आये थे। हर साल 15 प्रतिशत की दर से भारत घूमने आने वालों की संख्या बढ़ रही है। देश के पर्यटन उद्योग को विदेश से आने वाले लोगों से 1 करोड़ 80 हजार 379 लाख रुपये की आमदनी हुई, जिससे देश में विदेशी मुद्रा का भंडार भी बढ़ा।भारत की सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन हुआ- भारत घूमने वाले देश या विदेश के लोगों को सांस्कृतिक विरासत से अपनत्व स्थापित करने के उद्देश्य से, धरोहर स्थलों व धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता और सुविधाओं का आधुनिकीकरण HRIDAY और PRASAD योजनाओं से किया गया। HRIDAY योजना के पहले चरण के दौरान देश के 12 धरोहर शहरों- अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बदामी, द्वारका, गया, कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेलांकणी और वारांगल की धरोहरों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से संजोया गया है। PRASAD योजना के तहत देश के पच्चीस तीर्थस्थलों को भी स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित किया गया है। इन योजनाओं के अतिरिक्त देश के 100 से अधिक पुरातात्विक स्थलों को भी आदर्श स्मारक के रूप में बदल दिया गया है।राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान बढ़ा-प्रधानमंत्री मोदी ने देश की सांस्कृतिक विविधता की एकता को जन के मन में उतारने के लिए ‘ एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ योजना के तहत कई उपाय किए। देश के एक राज्य को दूसरे राज्यों की सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित होने के लिए साझेदारी राज्यों की व्यवस्था बनाई गयी। इसके तहत एक राज्य, दूसरे राज्य के साथ युग्म बनाकर, सांस्कृतिक गतिविधियों को एक-दूसरे के राज्यों में आयोजित करते हैं। हर साल यह युग्म बदलता है। इस साल का युग्म कुछ इस प्रकार से है-

क्रम संख्या राज्य युग्म राज्य
1. जम्मू कश्मीर तमिलनाडु
2. पंजाब आंध्र प्रदेश
3. हिमाचल प्रदेश केरल
4. उत्तराखंड कर्नाटक
5. हरियाणा तेलंगाना
6. राजस्थान असम
7. गुजरात छत्तीसगढ़
8. महाराष्ट्र अोडिशा
9. गोवा झारखंड
10. दिल्ली सिक्किम
11. मध्यप्रदेश मणिपुर एवं नगालैड
12. उत्तरप्रदेश अरुणाचल प्रदेश  व मेघालय
13. बिहार त्रिपुरा एव मिजोरम
14. चडीगढ़ दादर व नागर हवेली
15 पुडुचेरी दमन व दीव
16. लक्षद्वीप अंडमान व निकोबार

62 साल में पहली बार सामान्य जन को मिला सम्मान-देश की संस्कृतिक विरासत को बचाने और आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका सामान्य जन की होती है। सामान्य जन के इस महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चार सालों में पद्म पुरस्कार देश के उन सामान्य लोगों को दिया, जो गुमनामी में रहकर भारत के सनातन मूल्यों और विरासत के संवर्धन के काम में जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह कर दिया है कि अब पद्म पुरस्कारों का नामांकन कोई भी सामान्य व्यक्ति कर सकता है। 2017 में, असम के जलपाईगुड़ी में बाइक एंबुलेंस सेवा देने वाले करिमुल्ला हक को पद्मश्री दिया तो 2018 में गरीबों का मुफ्त इलाज करने वाले अस्पताल को बनाने वाली सुभाषिणी मिस्त्री को दिया गया।प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चार सालों में भारत को एक बार फिर सांस्कृतिक शक्ति से चैतन्य किया है, जिससे देश में विरासत के प्रति गर्व और सम्मान का भाव बढ़ा है।

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