Home नरेंद्र मोदी विशेष देश के नाम पहले संबोधन में इमरान ने की प्रधानमंत्री मोदी की...

देश के नाम पहले संबोधन में इमरान ने की प्रधानमंत्री मोदी की नकल, क्या अमल में भी होगी नकल!

235
SHARE

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को पूर्ववर्ती यूपीए सरकार से विरासत में मिली खोखली अर्थव्यवस्था से निकालकर विश्व मंच पर फिर से स्थापित करने का काम किया है। इसके लिए उन्होंने जिस प्रकार के सुधारवादी कदम उठाते हुए क्रियान्वयन पर जोर दिया, वह आज दुनिया के लिए एक आदर्श बन चुका है। पाकिस्तान के नए-नवेले प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के नाम अपने पहले संबोधन में जो कुछ कहा, उसमें भी स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री मोदी के कदमों की झलक है। भाषण में तो जैसे पूरी की पूरी नकल है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इमरान जो कह रहे हैं उसे भारतीय प्रधानमंत्री की तर्ज पर लागू भी करके दिखा पाएंगे? यानि क्या अमल में भी नकल करके दिखा पाएंगे?

पीएम मोदी की तर्ज पर स्वच्छता अभियान का ऐलान
इमरान खान अपने देश के नाम पहले संबोधन में स्वच्छता का संदेश देते हुए दिखे। उन्होंने स्वच्छता को धर्म से जोड़ा और कहा कि पूरे पाकिस्तान में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा ताकि पाकिस्तान दुनिया के स्वच्छ देशों के मुकाबले खड़ा हो सके। स्वच्छता पर उनका यह संदेश निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर भारत में स्वच्छता ने एक जन आंदोलन का रूप ले लिया और पिछले चार साल में आज यहां स्वच्छता कवरेज 38 प्रतिशत से बढ़कर 85 फीसदी को पार कर चुकी है। क्या पाकिस्तान में इमरान खान भी इतने प्रभावी हो पाएंगे?   

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े अभियान की बात
इमरान खान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का गृह मंत्रालय उन्होंने इसीलिए अपने पास रखा है ताकि इस अभियान को तेजी से चलाया जा सके। उन्होंने भ्रष्टाचार से जंग में देशवासियों का साथ मांगा है। गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए नोटबंदी और जीएसटी जैसे कई कदम उठाकर दिखाए जिनके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। भारत अब भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली की ओर बढ़ चुका है। क्या इमरान को पाकिस्तान में इतने बड़े फैसले लेने की आजादी मिल पाएगी?

हर गरीब को पक्का घर देने का वादा
प्रधानमंत्री मोदी की तर्ज पर इमरान खान ने भी अपने देश के सभी गरीबों को सिर पर छत देने का एलान किया है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि पाकिस्तान में पीएम से लेकर सीएम और बड़े-बड़े ओहदेदारों के आलीशान बंगले हैं जबकि आजादी के इतने समय बाद भी देश की बड़ी आबादी  के सिर पर छत नहीं है। गौर करने वाली बात है कि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2022 तक देश के सभी गरीबों को पक्के घर मुहैया कराने पर तेज गति से काम चल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण/शहरी) के तहत ये घर दिए जा रहे हैं। देखने वाली बात होगी कि पाकिस्तान में इमरान की ऐसी योजना कितनी सफल होती है।  

पड़ोसियों से बेहतर संबंध की बात
इमरान खान ने अपने संबोधन में यह कबूल किया कि पाकिस्तान के विकास के लिए पड़ोसी मुल्कों से रिश्तों को बेहतर बनाने होंगे। हालांकि इमरान ने अपने किसी भी पड़ोसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि शांति की जरूरत है जिसके बिना पाकिस्तान की स्थिति नहीं सुधारी जा सकती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की दिशा नहीं बदली तो उसका विनाश तय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पड़ोसियों से अच्छे संबंधों पर अक्सर बल देते हैं। अपने शपथ ग्रहण में उन्होंने पाकिस्तान सहित सार्क देशों के सभी प्रमुखों को आमंत्रित किया था, यह भी उसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण है। लेकिन पाकिस्तान नहीं सुधरा, वह भारत में आतंक की सप्लाई में लगा रहा। क्या इमरान खान इस स्थिति को बदलने की ताकत दिखाएंगे?

आतंक के मामले में सबसे बड़ी परीक्षा
इमरान खान जब पड़ोसियों से संबंध बनाने की बात करते हैं तो पाकिस्तान के लिए इस राह की सबसे बड़ी चुनौती होगी आतंक पर सख्ती दिखाने की। भारत से पाकिस्तान के रिश्ते बहुत कुछ इस मामले में इमरान खान के रुख पर निर्भर करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंक पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल करके दिखाया है। इसी का नतीजा है कि मोदी सरकार में देश के भीतर आतंकी गतिविधियों में ऐतिहासिक कमी आई है। जम्मू कश्मीर में भी ऑपरेशन ऑल आउट के तहत आतंक के सफाये का काम अपने अंतिम चरण में है। पूरी दुनिया इस बात की गवाह है कि पाकिस्तान की जमीन पर आतंक को पाला-पोसा जाता है। इसमें कोई शक नहीं पाकिस्तान के नए-नवेले प्रधानमंत्री इमरान खान की सबसे बड़ी परीक्षा आतंक के मसले पर होने वाली है। क्या इमरान मुंबई हमलों के गुनहगार हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान जैसे आतंकी सरगनाओं को भारत को सौंपने की कवायद करने की हिम्मत दिखाएंगे? आतंक के मुद्दे पर जमीन पर सख्ती नहीं दिखाने का मतलब होगा कि इमरान की सारी बड़ी-बड़ी बातें सियासी बोली से ज्यादा कुछ नहीं।

LEAVE A REPLY