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काशी का मोदी प्रेम वोट नहीं, विकास को लेकर है

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लोकसभा चुनाव में नामांकन के लिए बनारस पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी के रोड शो में विशाल जनसैलाब से विपक्षियों के होश उड़े हुए हैं। राजनीतिक पंडित से लेकर आम लोग इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह केवल चुनावी भीड़ नहीं है। 2014 में सांसद बनने के बाद से मोदी ने बनारस की तस्वीर बदल कर रख दी है। हिंदू आस्था का केंद्र बनारस इससे पहले तक गंदगी, भ्रष्टाचार और हिंदू-मुस्लिम विभेद के कारण हमेशा गलत कारणों से ही चर्चा में रहता था, लेकिन अब इसकी पहचान बदल गई है। अब यह देश के सबसे साफ, व्यवस्थित और शांतिप्रिय शहरों में शामिल है। बनारस अब भूल-भुलैया गलियों और गंदगी से निजात पा चुका है। सांसद के रूप में मोदी ने यहां करीब 24 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स शुरू कराए हैं। इन प्रोजेक्ट्स में काशी को जापान की धार्मिक नगरी क्योटो की शक्ल देने की जिद है, स्मार्ट सिटी बनाने का जज्बा है और देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने का स्वप्न भी है। रोड शो में 5 लाख से ज्यादा लोगों की मौजूदगी केवल वोट के लिए नहीं है, काशी को नई पहचान देने वाले सांसद के प्रति लोगों का प्रेम है।

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बनारस का कायाकल्प

  • काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोरः यह कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट के बीच 25,000 स्क्वेयर वर्ग मीटर में बन रहा है। इसके तहत फूड स्ट्रीट, रिवर फ्रंट समेत बनारस की तंग सड़कों के चौड़ीकरण का काम भी चल रहा है।
  • गंगा परिवहन योजना: इलाहाबाद से हल्दिया के बीच शुरू होने वाली जल परिवहन योजना में काशी को कार्गो हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
  • स्वच्छता अभियानः 2016 में काशी स्वच्छ शहरों की रैकिंग में 65वें स्थान पर थार। 2018 में 29वें स्थान पर पहुंच गया।
  • ऊर्जा गंगा प्रोजेक्टः इसकी शुरुआत 2017 में हुई। जिसके तहत गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) डीजल रेल कारखाना (डीरेका) परिसर में पीएनजी पाइपलाइन बिछा रहा है।
  • आईपीडीएस परियोजनाः यह शहर में लटकते बिजली के तारों और उनके घने जाल को हटाने के लिए है।
  • हृदय योजनाः इसके तहत यहां की धरोहरों, ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और संवर्धन का काम चल रहा है।
  • अटल इंक्यूबेशन सेंटर, नागेपुर ग्राम पेयजल योजना, और विद्युत सब स्टेशन इत्यादि के लिए भी 600 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

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