Home पश्चिम बंगाल विशेष तुष्टिकरण की ‘ममता’ राजनीति पर हाईकोर्ट का हथौड़ा

तुष्टिकरण की ‘ममता’ राजनीति पर हाईकोर्ट का हथौड़ा

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मूर्ति विसर्जन और मुहर्रम पर राजनीति कर रही ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने जबरदस्त झटका दिया है। कोर्ट ने सरकार का फैसला पलटते हुए मुहर्रम के दिन मूर्ति विसर्जन से रोक हटा दिया है। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि पहले की तरह रात 12 बजे तक विसर्जन किया जा सकता है। पुलिस को इसके लिए व्यवस्था करनी होगी। हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वह दोनों कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग रूट तैयार करें। दरअसल हाईकोर्ट का यह निर्णय ममता के तुष्टिकरण की राजनीति को कानून का जवाब है।

तुष्टिकरण पर चोट से बौखला गईं ममता
मूर्ति विसर्जन को लेकर जो बखेड़ा खड़ा किया गया, वह ममता की सोची समझी राजनीति का हिस्सा है। वह उदारवादी बहुसंख्यक समुदाय की आस्था पर आघात कर अपने वोट बैंक को संदेश देने की सियासत करती रही हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने जब उनकी पोल खोल दी तो वे बौखला गईं और कानून के निर्णय का सम्मान करने के बजाय कहा,  ’अगर ये तुष्टिकरण है तो जब तक जिंदा हूं ऐसा करती रहूंगी। अगर कोई मेरे माथे पर गन भी रख दे तब भी मैं यही करूंगी।’ जाहिर है यह साबित करती है कि वे देश के कानून का भी सम्मान नहीं करती हैं ऐसे में सवाल यह है कि क्या उन्हें संवैधानिक पद पर बने रहने का अधिकार है। बहरहाल कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ममता बनर्जी की ये टिप्पणी साबित करती है कि वे सोच समझकर तुष्टिकरण की ही राजनीति कर रही थीं।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की सियासत कर रही ममता सरकार
ममता की ये राजनीति आज की नहीं है। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर लगातार हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार पैदा करने की राजनीति पर वे चल रही हैं। बीते समय में उन्होंने कई ऐसे निर्णय किये हैं जिससे बहुसंख्यक समुदाय के धार्मिक रीति-रिवाजों पर आघात किया गया है। कई बार तो कोर्ट के आदेश से मामला निबट गया, लेकिन अधिकांश समय में ममता सरकार की मनमानी ही चलती रही है। इसे लेकर पश्चिम बंगाल के हिंदुओं में बड़ा आक्रोश है। बहरहाल आइये हम देखते हैं ममता के विवादित निर्णय जिसने बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं पर चोट पहुंचायी है।

दशहरे पर शस्त्र जुलूस निकालने की अनुमति नहीं
हिंदू धर्म में दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा रही है, लेकिन मुस्लिम प्रेम में ममता बनर्जी हिंदुओं की धार्मिक आजादी छीनने पर आमादा हैं। ममता बनर्जी के नये आदेश के तहत दशहरा के दिन पश्चिम बंगाल में किसी को भी हथियार के साथ जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस प्रशासन को इस पर सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। सोमवार को राज्य सचिवालय में प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को साफ कहा कि शस्त्र जुलूस निकालने की अनुमति किसी भी हाल में नही दें।

चार साल से कांगलापहाड़ी में दुर्गा पूजा नहीं
ममता बनर्जी की सरकार में मुसलमानों को तो दामाद की तरह रखा जा रहा है, लेकिन हिंदू अपने ही देश में बेगाने हो गए हैं। 10 अक्टूबर, 2016 को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश से ये बात साबित होती है। ममता बनर्जी के राज में बीरभूम जिले का कांगलापहाड़ी गांव भुक्तभोगी है। गांव में 300 घर हिंदुओं के हैं और 25 परिवार मुसलमानों के हैं, लेकिन इस गांव में चार साल से दुर्गा पूजा पर पाबंदी है। मुसलमान परिवारों ने जिला प्रशासन से लिखित में शिकायत की कि गांव में दुर्गा पूजा होने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है, क्योंकि दुर्गा पूजा में बुतपरस्ती होती है। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने दुर्गा पूजा पर बैन लगा दिया। गांव के लोग जगह-जगह फरियाद करके थक गए, लेकिन लगातार चौथे साल भी यहां दुर्गा पूजा नहीं हुई।

हाईकोर्ट के आदेश से हो सकी रामनवमी की पूजा
‘लेक टाउन रामनवमी पूजा समिति’ ने इसी साल 22 मार्च को पूजा की अनुमति के लिए आवेदन दिया था। एंटी हिन्दू एजेंडा चला रही राज्य सरकार के दबाव में नगरपालिका ने पूजा की अनुमति नहीं दी, लेकिन जब राज्य सरकार के दबाव में नगरपालिका ने पूजा की अनुमति नहीं दी तो याचिकाकर्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जज न्यायमूर्ति हरीश टंडन ने नगरपालिका के रवैये पर नाखुशी जताते हुए पूजा शुरू करने की अनुमति देने का आदेश दिया।

हनुमान जयंती के जुलूस की अनुमति नहीं
11 अप्रैल, 2017 को पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के सिवड़ी में हनुमान जयंती के जुलूस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ममता सरकार से हिन्दू जागरण मंच को हनुमान जयंती पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का कहना था कि हम इस आयोजन की अनुमति को लेकर बार-बार पुलिस के पास गए, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया। लेकिन धार्मिक आस्था के कारण निकाले गए जुलूस पर पुलिस ने बर्बता से लाठीचार्ज किया। इसमें कई लोग घायल हो गए।

हिंदुओं पर लगा दी आर्म्स एक्ट की धाराएं
ममता बनर्जी ने 6 अप्रैल, 2017 को बयान दिया – “भगवान राम ने दुर्गा की पूजा फूलों के साथ की थी, तलवारों के साथ नहीं। राम ने रावण को मारने के लिए दंगे नहीं किए। अगर कोई नेता या कार्यकर्ता हथियारों के साथ जुलूस में शामिल होता है तो कानून अपना काम करेगा। चाहे वह कोई भी क्यों ना हो। सभी बराबर हैं।” ममता हथियारों के साथ मुहर्रम के मौके पर जुलूस निकलने पर ऐसा कोई बयान नहीं देती और न ही पुलिस कभी किसी को गैर जमानती धारा में इस वजह से गिरफ्तार करती है। ममता सरकार का इशारा मिलते ही पुलिस ने एक्शन शुरू कर दिया। हनुमान जयंती जुलूस में शामिल होने पर पुलिस ने 12 हिन्दुओं को गिरफ्तार कर लिया। उन पर आर्म्स एक्ट समेत कई गैर जमानती धाराएं लगा दीं।

धूलागढ़ दंगे में एंटी हिंदू एक्शन
धूलागढ़ दंगे में भी ममता सरकार की भूमिका संदेह के घेरे में रही। इस दंगे में हिन्दू परिवारों पर आक्रमण हुए। उनके घर जलाए गये, उन्हें मारा-पीटा गया, महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, लेकिन ममता सरकार ने हिन्दुओं के बचाव के लिए कुछ नहीं किया। धूलागढ़ हिंसा में 65 लोगों को गिरफ्तार करने पर मुसलमानों को खुश करने के लिए हावड़ा के एसपी (ग्रामीण) सब्यसाची रमन मिश्रा का तबादला कर दिया गया। इतना ही नहीं रिपोर्ट कवर करने गए जी न्यूज की रिपोर्टर, संपादक पर केस दर्ज कराया गया। उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की गयी। बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल प्रतिनिधिमंडल के दो सांसदों जगदम्बिका पाल और सतपाल सिंह तथा एक बीजेपी के राष्ट्रीय नेता राहुल सिन्हा को धूलागढ़ नहीं जाने दिया गया।

पुस्तकालयों में नबी दिवस-ईद मनाना अनिवार्य
11 जनवरी 2017 को ममता सरकार ने आदेश जारी किया कि नबी दिवस को सरकारी पुस्तकालयों में भी मनाया जाएगा। बंगाल सरकार के इस नये नियम के हिसाब से राज्य के सभी 2480 से ज्यादा सरकारी पुस्तकालयों में साल के दूसरे प्रस्तावित कार्यक्रम की तरह नबी दिवस मानने की भी बात कही गई। इतना ही नहीं इसे मनाने के लिए सरकारी खजाने से फंड देने की भी व्यवस्था की गई। इस आदेश में 51 इवेंट्स की सूची जारी की गई है। जिसमें ईद-उद-मिलाद-उन-नबी जो की मोहम्मद पैगंबर की जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है, भी शामिल है।

ममता राज में ईद मनाइये, सरस्वती पूजा नहीं
एक तरफ बंगाल के पुस्तकालयों में नबी दिवस और ईद मनाना अनिवार्य किया गया तो एक सरकारी स्कूल में कई दशकों से चली आ रही सरस्वती पूजा ही बैन कर दी गई। ये मामला हावड़ा के एक सरकारी स्कूल का है, जहां पिछले 65 साल से सरस्वती पूजा मनायी जा रही थी, लेकिन मुसलमानों को खुश करने के लिए ममता सरकार ने इसी साल फरवरी में रोक लगा दी। जब स्कूल के छात्रों ने सरस्वती पूजा मनाने को लेकर प्रदर्शन किया, तो मासूम बच्चों पर डंडे बरसाए गए। इसमें कई बच्चे घायल हो गए।

ममता सरकार ने बदला ‘राम’ का नाम
‘रामधनु’ को ‘रंगधनु’ किया – तीसरी क्लास में पढ़ाई जाने वाली किताब अमादेर पोरिबेस (हमारा परिवेश) ‘रामधनु’ (इंद्रधनुष) का नाम बदल दिया गया है। उसे ‘रंगधनु’ कर दिया है। साथ ही ब्लू का मतलब आसमानी रंग बताया गया है। शिक्षाविद् मुखोपाध्याय का कहना है कि साहित्यकार राजशेखर बसु ने सबसे पहले ‘रामधनु’ का प्रयोग किया था, लेकिन अब एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए किताब में इसका नाम ‘रामधनु’ से बदलकर ‘रंगधनु’ कर दिया है।

बीफ खाने का समर्थन
ममता ने 21 जुलाई, 2016 को शहीद दिवस पर कोलकाता में कहा, ”अगर मैं बकरी खाती हूं तो कोई समस्या नहीं है, लेकिन कुछ लोग गाय खाते हैं तो यह समस्या है। मैं साड़ी पहनती हूं तो समस्या नहीं है, लेकिन कुछ लोग सलवार कमीज पहनते हैं तो यह समस्या है। हम धोती पहनना पसंद करते हैं लेकिन कुछ लुंगी पहनने को प्राथमिकता देते हैं। आप कौन हैं तय करने वाले कि लोग क्या पहनें और क्या खाएं?”18 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुगली में मुसलमानों को संबोधित करते हुए बीफ खाने के प्रति अपना समर्थन दोहराया, ”यह पसंद का मामला है। मेरा अधिकार है मछली खाना। वैसे ही, आपका अधिकार है मांस खाना। आप जो कुछ भी खाएं – बीफ या चिकन, यह आपकी पसंद है।” ममता ने इस कानून को धार्मिक रंग देने की कोशिश की और मुसलमानों से जोड़ते हुए कहा कि यह रमजान से पहले जान बूझकर लगाया गया प्रतिबंध है।

ममता राज के 8000 गांवों में एक भी हिंदू नहीं
दरअसल ममता राज में हिंदुओं पर अत्याचार और उनके धार्मिक क्रियाकलापों पर रोक के पीछे तुष्टिकरण की नीति है। लेकिन इस नीति के कारण राज्य में अलार्मिंग परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। प. बंगाल के 38,000 गांवों में 8000 गांव अब इस स्थिति में हैं कि वहां एक भी हिन्दू नहीं रहता, या यूं कहना चाहिए कि उन्हें वहां से भगा दिया गया है। बंगाल के तीन जिले जहां पर मुस्लिमों की जनसंख्या बहुमत में हैं, वे जिले हैं मुर्शिदाबाद जहां 47 लाख मुस्लिम और 23 लाख हिन्दू, मालदा 20 लाख मुस्लिम और 19 लाख हिन्दू, और उत्तरी दिनाजपुर 15 लाख मुस्लिम और 14 लाख हिन्दू। दरअसल बंगलादेश से आए घुसपैठिए प. बंगाल के सीमावर्ती जिलों के मुसलमानों से हाथ मिलाकर गांवों से हिन्दुओं को भगा रहे हैं और हिन्दू डर के मारे अपना घर-बार छोड़कर शहरों में आकर बस रहे हैं।

ममता राज में घटती जा रही हिंदुओं की संख्या
पश्चिम बंगाल में 1951 की जनसंख्या के हिसाब से 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या में भारी कमी आयी है। 2011 की जनगणना ने खतरनाक जनसंख्यिकीय तथ्यों को उजागर किया है। जब अखिल स्तर पर भारत की हिन्दू आबादी 0.7 प्रतिशत कम हुई है तो वहीं सिर्फ बंगाल में ही हिन्दुओं की आबादी में 1.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि बहुत ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय स्तर से भी कहीं दुगनी दर से बढ़ी है।

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