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EU-Asia News के संपादक पुष्प रंजन की एजेंडा पत्रकारिता

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EU-Asia News के दिल्ली स्थित संपादक पुष्प रंजन भारत-नेपाल संबंध मामलों के जानकार माने जाते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि अब उन्होंने पूरी तरह से एजेंडा आधारित पत्रकारिता को अपना लिया है। अब उनका एक ही मकसद दिखता है कि किसी भी हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के कदमों का विरोध करना है।

फेसबुक पोस्ट से सिर्फ ‘एजेंडा’ चलाते 

जेएनयू एलुमनाई पुष्प रंजन सोशल मीडिया पर जिस तरह के कमेंट लेकर सामने आते हैं उनसे उनके एजेंडे का साफ-साफ पता चलता है। ज्यादा नहीं फेसबुक पर 2018 के इस नये साल में उनके पोस्ट की पड़ताल कर ही समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ऐसी पत्रकारिता की प्रेरणा उन्हें कहां से मिल रही होगी।

मुसलमानों के प्रवक्ता जैसी बातें!

1 जनवरी को अपने पोस्ट में पुष्प रंजन इस तरह की बातें करते नजर आए जैसे मुसलमानों के प्रवक्ता ही हों। राजस्थान में बीजेपी के एक विधायक के बयान पर उन्होंने कुछ इस तरह से प्रतिक्रिया जाहिर की जैसे विधायक ने उनके लिए ही अपनी बातें कही हो। देखिए कैसे अपने पोस्ट में यह पत्रकार राजनीतिक भाषा पर उतरा नजर आ रहा है।

राजनीति की भाषा में पत्रकार की बातें!

12 जनवरी को अपने पोस्ट में पीडीपी के एक विधायक के बयान के बहाने पुष्प रंजन ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की। यहां भी वह राजनीति की भाषा में अपनी बात रखते दिखे।

अपराध के खिलाफ कदम को सांप्रदायिकता से जोड़ा

11 जनवरी को उन्होंने लिखा कि क्या एनकाउंटर में भी जाति विशेष के “अपराधियों” का ध्यान रखा जाता है? यूपी पुलिस ने जिन 30 लोगों के मार गिराने की सूची दी है, उनमें 13 मुसलमान हैं। यह पोस्ट बताता है कि किस तरह से अपराध के खिलाफ सरकार के कदमों को भी वह सांप्रदायिकता के तराजू पर रखकर देखते हैं।

सिर्फ बीजेपी और उसके नेताओं पर निशाना

11 जनवरी के ही अपने एक और पोस्ट में उन्होंने एनकाउंटर के मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने की कोशिश की। इसी पोस्ट में जिस तरह से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह  का जिक्र किया है वो पत्रकारिता के उनके एजेंडे को साबित करने वाला है।

एकतरफा निष्कर्ष रखते हैं

इनकी एजेंडा पत्रकारिता का एक बड़ा रंग तब दिखा जब मोदी सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी देने का फैसला किया। 10 जनवरी के अपने फेसबुक पोस्ट में इन्होंने इस फैसले पर अपना एकतरफा निष्कर्ष निकालकर पेश कर दिया।

राहुल गांधी की बढ़-चढ़कर तरफदारी

9 जनवरी के अपने पोस्ट में पुष्प रंजन ने जिस तरह से राहुल गांधी का बढ़-चढ़कर पक्ष लिया है, उससे यह सवाल उठना लाजमी है कि कहीं उनकी एजेंडा पत्रकारिता को यहीं से बल तो नहीं मिल रहा? राहुल की तरफदारी करने में उन्होंने अपने आपको समर्पित कर दिया है।

महिला विरोधी मानसिकता में अशोभनीय टिप्पणियां

प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में यह पत्रकार कब किस मुद्दे को कहां से जोड़ दे यह कहा नहीं जा सकता। महिलाएं नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ें शायद इन्हें गवारा नहीं। 5 जनवरी के इनके पोस्ट से इनकी मानसिकता को समझना आसान है।

जिग्नेश और उमर के हमदर्द

4 जनवरी के पोस्ट में इस पत्रकार ने जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद का बचाव किया। पुणे में दलितों के आयोजन के दौरान हुई हिंसा को लेकर जिग्नेश और उमर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है लेकिन इस कार्रवाई पर सवाल उठाकर वह इसे अलग मोड़ देने की कोशिश करते हैं।

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