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मेक इन इंडिया का असर: हायर करेगी 3069 करोड़ रुपये का निवेश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सत्ता को संभालने के बाद हर क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ नीति को बढ़ावा दिया है। सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिससे सरकारी सिस्टम के प्रति भरोसा कायम हुआ है। मोदी सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र में उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार किया है। प्रधानमंत्री मंत्री इस नीति का प्रभाव अब दिखने लगा है। दुनियाभर का तमाम बड़ी कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही हैं। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण बनाने वाली प्रमुख कंपनी हायर एप्लायंसेस इंडिया ने ग्रेटर नोएडा में विनिर्माण इकाई की स्थापना पर कुल 3,069 करोड़ रुपये का निवेश करने का फैसला किया है। हायर एप्लायंसेस इंडिया कंपनी के संयंत्र से 3,950 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार और कई अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है। इसके लिए ग्रेटर नोएडा में 123.7 एकड़ जमीन आवंटित की गई है।

इसके अलावा चीनी मोबाइल निर्माता फॉर्मे और अग्रणी ऑडियो निर्माता फेंडा ऑडियो इंडिया की सहायक कंपनी सतकृति इंफोटेन्मेंट को भी जमीन आवंटित की गई है। फॉर्मे को 3.5 एकड़ जमीन दी गई है। यह कंपनी 100 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 1600 लोगों को रोजगार देगी। सतकृति इंफोटेन्मेंट को 9.8 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी उपभोक्ता उपकरणों के निर्माण के लिए 235 करोड़ रुपये निवेश करेगी। इस इकाई से 2,000 प्रत्यक्ष और 5,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। तीनों कंपनियां यहां कुल मिलाकर 3404 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

भारत में दुनिया की स्मार्टफोन की सबसे बड़ी फैक्ट्री
पिछले 9 जुलाई को नोएडा में जिस सैमसंग फैक्ट्री  का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने उद्घाटन किया वह दुनिया में स्मार्टफोन की सबसे बड़ी फैक्ट्री है। यहां सालाना 12 करोड़ मोबाइल फोन का उत्पादन होगा। करीब पांच हजार करोड़ रुपये में नोएडा के सेक्टर-81 में तैयार हुआ सैमसंग का नया प्लांट 35 एकड़ में फैला है। सैमसंग भारत में फिलहाल करीब 6.7 करोड़ स्मार्ट फोन बनाती है जो अब लगभग दोगुनी हो जाएगी। सैमसंग की इस नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 35 हजार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा।

चीन को छोड़ अब भारत पर जोर
पिछले दो वर्षों में Apple, Foxconn और कई दूसरे मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर्स ने भी भारत में होने वाले निर्माण में निवेश किया है। जैसे पिछले साल Apple ने अपने कुछ iPhone की भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी। Acer की सहायक कंपनियां Wistron और Foxconn ने भी भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए सरकार के साथ जमीन किराये पर लेने को लेकर करार किया है।

चीनी कंपनियों का भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
अब ना सिर्फ दूसरे देश की कंपनियां चीन को छोड़कर भारत का रुख कर रहे, बल्कि चीन की भी कंपनियां भी आज भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने में लगी हैं। Vivo, Oppo और Xiaomi जैसी कंपनियों की भारत में फैक्ट्रीज हैं। Xiaomi की तो भारत में अब दो फैक्ट्रीज हैं और इस वर्ष के शुरू में कंपनी यहां अपनी तीसरी फैक्ट्री लगाने की भी घोषणा कर चुकी है। वहीं 30,000 वर्गमीटर के क्षेत्र में Vivo का भारत में बना नया प्लांट इस कंपनी का चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा प्लांट है। कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों ने भी चीन में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर ना देकर अब भारत का रुख करने में लगी हैं, जैसे चिप बनाने वाली Mediatek ने भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग की अपनी योजना का ऐलान किया है।

मेक इन इंडिया साबित हो रहा ‘शेर का कदम’
कई सारी कंपनियों के बीच भारत में स्मार्टफोन की यूनिट लगाने की होड़ लगी है, इसकी एक वजह ये भी है कि वो भारत में इसके बाजार की प्रबल संभावनाओं को महसूस कर रही हैं। चीन में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ कमजोर पड़ने के साथ ही स्मार्टफोन की बिक्री भी बेहद धीमी पड़ चुकी है। भारत का बाजार भी तेजी में उठ रहा है और यहां अब  निवेश और कारोबार भी आसान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का दायरा बढ़ा है और भारत में बिजनेस करने का एक अनुकूल माहौल तैयार हो चुका है।  इसलिए इसमें कोई दो राय नहीं मेक इन इंडिया अब शेर का कदम साबित होने लगा है जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लॉन्च के मौके पर कहा था।

मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनेगा इंडिया
चीन का डर बढ़ रहा है क्योंकि उसकी आर्थिक ताकत में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री का बड़ा रोल है लेकिन जिस प्रकार से मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया की दिलचस्पी भारत में बढ़ी है अब उसका हब का दर्जा छिनने का खतरा बना है। मौजूदा वैश्विक समीकरण ने भी चीन की चिंता बढाई है। अमेरिका ने तो Foxconn और Apple की चीन से वापसी के संकेत भी दिए हैं। साफ है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया के साथ भारत को मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा था, वह आज सच होता दिखाई दे रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस को पीछे छोड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। मेक इन इंडिया के जोर पकड़ने से अर्थव्यवस्था में और तेजी आएगी जो पांचवें स्थान पर ले जाने में मददगार साबित होगा।

हर हाथ को मिलेगा काम
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया योजना की शुरुआत की थी। ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है  

मेक इन इंडिया का उद्देश्य बेरोजगारी दूर करना 
मेक इन इंडिया के तहत भारत में शुरू होने वाले उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए कौशल विकास मंत्रालय द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिसके तहत युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

जीडीपी का 25 प्रतिशत हो जाएगा प्रत्यक्ष निवेश
नरेन्द्र मोदी सरकार का लक्ष्य मेक इन इंडिया के तहत भारत को विश्व में निर्माण क्षेत्र का केंद्र बनाना है। इसके साथ-साथ देश के भीतर ही उन्नत प्रौद्योगिकी और तकनीकी से निर्माण क्षेत्र में विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। एक अनुमान है कि 2022 आते-आते देश के जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत हो जाएगी।

मजबूत होगी भारतीय अर्थव्यवस्था
मेक इन इंडिया के पूर्णतया मूर्त रूप लेने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। युवाओं को देश में रोजगार मिलेगा और विदेशी आयात में कमी आएगी। विदेशी मुद्रा की बचत होगी और सरकारी कोष को मजबूती मिलेगी। रक्षा उत्पादों के देश में बनने के बाद रक्षा सौदों की लागत घटेगी और बिचौलियों से बचा जा सकेगा। कंपनियों से मिलने वाले करों से राज्य सरकार की आय बढ़ेगी और देश के हर भाग में रोजगार की उपलब्धता बढ़ेगी। भारतीय कंपनियों के उत्पादों की सीधी टक्कर अब विदेशी कंपनियों के उत्पादों से होगा और देश की जनता को इस प्रतिद्वंदिता का लाभ मिलेगा। रोजमर्रा के जरूरत की चीजों के दाम घटेंगे और गुणवत्ता बेहतर होगी।

भारत को डिफेंस प्रोडक्शन हब बनाने की तैयारी
मोदी सरकार भारत को डिफेंस प्रोडक्शन हब बनाने की तैयारी में है। अभी देश को अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादातर सैन्य साजोसामान दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है, लेकिन अब सरकार की कोशिश अगले 10 वर्षों में भारत को दुनिया के पांच बड़े सैन्य उपकरण बनानेवाले देशों में शामिल करना है। नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक इसी क्रम में भारत सरकार जल्द ही डिफेंस प्रॉडक्शन इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पॉलिसी की घोषणा कर सकती है।

लड़ाकू विमान और मिसाइल पर फोकस
डिफेंस प्रॉडक्शन पॉलिसी (DPP-2018) का फोकस सेना के लिए लड़ाकू विमानों, अटैक हेलिकॉप्टरों और हथियारों का देश में ही उत्पादन करने और इसके लिए आवश्यक तकनीक विकसित करने के लिए उचित संसाधनों के निवेश पर होगा। सरकार ने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत में प्रॉडक्शन के लिए 12 मिलिटरी प्लैटफॉर्म्स और वेपन सिस्टम्स निर्धारित किए हैं। इनमें शामिल हैं लड़ाकू विमान, मीडियम लिफ्ट ऐंड यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, युद्धपोत, लैंड कॉम्बैट वीइकल, मिसाइल सिस्टम्स, गन सिस्टम्स, छोटे हथियार, विस्फोटक, निगरानी प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम्स और रात में लड़ाई में मदद करनेवाले साजोसामान आदि।

ऐसी कई रक्षा परियोजनाएं हैं जिनमें पीएम मोदी की पहल पर मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। डालते हैं एक नजर

15 हजार करोड़ के हथियारों के निर्माण को मंजूरी
हाल ही में केंद्र सरकार ने सेना की जरूरतों को देखते हुए 15 हजार करोड़ के हथियार निर्माण प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत देश में ही महत्वपूर्ण तकनीक वाले हथियार और टैंक बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट का मकसद हथियारों के आयात या विदेशों पर निर्भरता को खत्म करना है। इस प्रोजेक्ट से 30 दिन तक लगातार चलने वाले युद्ध में भी हथियारों का जखीरा कम नहीं पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेना के इस प्रोजेक्ट में 11 निजी कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इसकी निगरानी रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारी करेंगे। इस प्रोजेक्ट को 10 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना में रॉकेट्स और ग्रेनेड लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, आर्टिलरी बंदूकें और लड़ाई के लिए जरूरी गाड़ियां बनाई जानी हैं।

सेना के जवान अब पहनेंगे स्‍वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेट
केंद्र सरकार ने हाल ही में सेना की जरूरतों को देखते हुए 1.86 लाख स्वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने के लिए अनुबंध किया है। सेना के लिए कारगर बुलेट प्रूफ जैकेटों की जरूरत को युद्ध क्षेत्र के लिए सफलतापूर्वक आवश्यक परीक्षण करने के बाद पूरा किया गया है। ‘भारत में बनाओ, भारत में बना खरीदो’ के रूप में इस मामले को रखा गया है। स्वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेटें अत्याधुनिक हैं, जिनमें रक्षा का अतिरिक्त स्तर और कवरेज क्षेत्र है। श्रम-दक्षता की दृष्टि से डिजाइन की गई बुलेट प्रूफ जैकेटों में मॉड्यूलर कलपुर्जे हैं, जो लम्बी दूरी की गश्त से लेकर अधिक जोखिम वाले स्थानों में कार्य कर रहे सैनिकों को संरक्षण और लचीलापन प्रदान करते हैं। नई जैकेटें सैनिकों को युद्ध में पूरी सुरक्षा प्रदान करेंगी।

स्वदेशी बुलेटप्रुफ जैकेट से होगी 20 हजार करोड़ रुपए की बचत
‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब भारत में ही अधिकतर रक्षा उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो रही है। इस स्वदेशी बुलेटप्रुफ जैकेट से सरकार को हर साल कम से कम 20 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। इस बुलेटप्रुफ जैकेट को भारतीय वैज्ञानिक ने ही बनाया है। 70 साल के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब सेना स्वदेशी बुलेटप्रुफ जैकेट पहनेगी। यह विदेशी जैकेट से काफी हल्का और किफायती भी है। विदेशी जैकेट का वजन 15 से 18 किलोग्राम के बीच होता है जबकि इस स्वदेशी बुलेटप्रुफ जैकेट का वजन सिर्फ 1.5 किलोग्राम है।  कार्बन फाइबर वाले इस जैकेट में 20 लेयर हैं। इसे 57 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर भी पहना जा सकता है। 

मेक इन इंडिया के तहत क्लाश्निकोव राइफल
मेक इन इंडिया के तहत अब दुनिया के सबसे घातक हथियारों में से एक क्लाश्निकोव राइफल एके 103 भारत में बनाए जाएंगे। असास्ट राइफॉल्स एके 47 दुनिया की सबसे कामयाब राइफल है। भारत और रूसी हथियार निर्माता कंपनी क्लाश्निकोव मिलकर एके 47 का उन्नत संस्करण एके 103 राइफल बनाएंगे। सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे भारत में बनाया जाएगा। इसे भारत से निर्यात भी किया जा सकता है।

भारत में लड़ाकू विमान बनाना चाहती है लॉकहीड मार्टिन
अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने भारत में चौथी पीढ़ी के बहुआयामी विमान एफ-16वी बनाने की इच्छा जताई है। कंपनी का दावा है कि एफ-16वी बाजार में उसके इस श्रेणी के उत्पादों में सबसे उन्नत एवं आधुनिक है। भारत इन विमानों का अपनी वायुसेना में इस्तेमाल करने के साथ ही इसका निर्यात भी कर सकेगा। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट जो ला मार्का ने कहा कि भारत ने अगर हमें चुना तो हम उम्मीद करते हैं कि एफ-16वी का निर्माण कुछ दशकों में शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर लाकहीड मार्टिन भारत में कारखाना लगाती है, तो भविष्य में बाहर से होने वाला कोई भी आर्डर कंपनी भारत से ही पूरा करेगी।

‘मेक इन इंडिया’ से बनी ‘करंज’ पनडुब्बी
मेक इन इंडिया के तहत हाल ही में स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस ‘करंज’ नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। ‘करंज’ एक स्वदेशी पनडुब्बी है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत तैयार की गई है। लगभग डेढ़ महीने के अंदर स्कॉर्पीन श्रेणी की कलवरी और खांदेरी पंडुब्बियां  के बाद करंज तीसरी पनडुब्बी है जो नौसेना में शामिल हुई है। करंज पनडुब्बी कई आधुनिक फीचर्स से लैस है और दुश्मनों को चकमा देकर सटीक निशाना लगा सकती है। इस पनडुब्‍बी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी तरह की जंग में संचालित किया जा सकता है। यह पनडुब्बी हर तरह के वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और इंटेलिजेंस को इकट्ठा करने जैसे कामों को भी बखूबी अंजाम दे सकती है। कंरज पनडुब्बी 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची, 1565 टन वजनी है।

दिसंबर में पीएम मोदी ने लांच की थी आईएनएस ‘कलवरी’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में बनी स्कॉर्पीन श्रेणी की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को पिछले महीने 14 दिसंबर को लांच किया था। वेस्टर्न नेवी कमांड में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी की मौजूदगी में इस पनडुब्बी को नौसेना में कमीशंड किया गया था। इस पनडुब्बी ने केवल नौसेना की ताकत को अलग तरीके से परिभाषित किया, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के लिए भी इसे एक मील का पत्थर माना गया। कलवरी पनडुब्बी को फ्रांस की एक कंपनी ने डिजाइन किया था, तो वहीं मेक इन इंडिया के तहत इसे मुंबई के मझगांव डॉकयॉर्ड में तैयार किया गया। आईएनएस कलवरी के बाद इसी महीने 12 जनवरी को स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी आईएनएस खांदेरी को लांच किया गया था। कलवरी और खंडेरी पनडुब्बियां भी आधुनिक फीचर्स से लैस हैं। यह दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं, साथ ही टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती हैं।

P-75 प्रोजेक्ट के तहत बन रही हैं पनडुब्बी
आईएनएस कलवरी देश में बनी पहली परमाणु पनडुब्बी है जो भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी। P-75 प्रोजेक्ट के तहत मुंबई के मझगांव डॉक लीमिटेड में बनी कलवरी क्लास की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलावरी है। कलवरी क्लास की 6 पनडुब्बी मुंबई के मझगांव डॉक में एक साथ बन रही हैं और मेक इन इंडिया के तहत इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है।

परवान चढ़ता ‘मेक इन इंडिया’ अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू हुआ ‘मेक इन इंडिया’ अभियान परवान चढ़ता जा रहा है। धीरे-धीरे प्रधानमंत्री की इस महात्वाकांक्षी योजना का परिणाम भी सामने आने लगा है। पीएम मोदी ने दूसरे क्षेत्रों के साथ ही रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी स्वदेशी की बढ़ावा देना शुरू किया था। प्रधानमंत्री ने मिसाइल, गोला-बारूद, टैंक आदि निर्मित करने के लिए विदेशी कंपनियों के बजाय स्वदेशी कंपनियों को तरजीह देने के निर्देश दिए थे। आज ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए रक्षा मंत्रालय ने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत की है। यह पैसा पिछले दो वर्षों में छह एयर डिफेंस और एंटी टैंक मिसाइल प्रोजेक्ट को किसी विदेशी कंपनी के बजाय स्वदेशी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) को देने की वजह से बचा है। सिर्फ यही प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि रक्षा मंत्रालय की तमाम ऐसी परियोजनाएं हैं जिन्हें स्वदेशी कंपनियों को दिया गया है और आने वाले दिनों में इनसे करोड़ों रुपये की बचत होगी। बात सिर्फ रुपये की बचत की नहीं है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की वजह से भारत रक्षा क्षेत्र में ग्लोबल मैन्युफेक्चरिंग हब बनता जा रहा है।

स्वदेशी को बढ़ावे से आयुध कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की वजह से स्वदेशी आयुध निर्माण कंपनियों की आर्थिक स्थिति काफी सुधर रही है। पहले जिन प्रोजेक्टों के लिए विदेश कंपनियों को पैसा दिया जाता था, वो आज स्वदेशी कंपनियों के पास जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि पीएम मोदी ने पहले मनोहर पर्रिकर, अरुण जेटली और अब निर्मला सीतारमण, जिन्हें भी रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है, वह भी स्वदेशी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के समर्थक रहे हैं। सरकार ने विदेशी कंपनियों की बजाय जिन प्रोजेक्ट्स के लिए डीआरडीओ पर भरोसा किया उसमें आर्मी और नेवी के लिए जमीन से आसमान में मार सकने वाली छोटी रेंज की मिसाइल (SR-SAMs), आर्मी के लिए जमीन से आसमान में मार सकने वाली और जल्दी एक्शन लेने वाली (QRSAM), आर्मी के लिए एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM), हेलिकॉप्टर से लॉन्च की जाने वाली एंटी टैंक मिसाइल आदि शामिल हैं।

इसके अलावा भी कई ऐसी रक्षा परियोजनाएं हैं जिनमें पीएम मोदी की पहल पर स्वदेशी को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके लिए नीतिगत बदलाव भी किया गया है। डालते हैं एक नजर

नीतिगत पहल और निवेश
रक्षा मंत्रालय आज जो स्वदेशी को बढ़ावा देकर करोड़ों रुपये की बचत कर रहा है, उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनाई गई नीतियां जिम्मेदार हैं। रक्षा उत्पादों का स्वदेश में निर्माण के लिए मोदी सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी हुई है। इसमें से 49 प्रतिशत तक की FDI को सीधे मंजूरी का प्रावधान है, जबकि 49 प्रतिशत से अधिक के FDI के लिए सरकार से अलग से मंजूरी लेनी पड़ती है।

पीएम मोदी और मेक इन इंडिया के लिए चित्र परिणाम

इजरायल से 500 मिलियन डॉलर का सौदा रद्द किया
रक्षा उत्पादन में स्वदेशी को बढ़ाने के मकसद से हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने इजरायल के साथ हुए 500 मिलियन डॉलर की सौदे को रद्द कर दिया। भारत और इजरायल के बीच यह डील मैन-पॉर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) के लिए की गई थी। रक्षा मंत्रालय को लगता है कि बगैर किसी दूसरे देश की तकनीकी सहायता के भारतीय आयुध निर्माता अगले 3-4 साल में इसे बनाने मे सक्षम हो जाएंगे। भारत को यह स्पाइक एटीजीएम मिसाइलें, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम बनाने वाली इजरायली कंपनी सप्लाई करने वाली थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस डील को रद्द करने का निर्णय स्वदेशी कार्यक्रमों की रक्षा करने के लिए गया है। अगर ये मिसाइल विदेशी कंपनियों से मंगाई जाती तो जाहिर है कि डीआरडीओ यानी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन पर असर पड़ता।

स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
मेक इन इंडिया के जरिये लगातार रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता खत्म करने की कोशिश की जा रही है। और पिछले कुछ सालों में इसका बहुत ही अधिक लाभ भी मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय ने भारत में निर्मित कई उत्पादों का अनावरण किया है, जैसे HAL का तेजस (Light Combat Aircraft), composites Sonar dome, Portable Telemedicine System (PDF),Penetration-cum-Blast (PCB), विशेष रूप से अर्जुन टैंक के लिए Thermobaric (TB) ammunition, 95% भारतीय पार्ट्स से निर्मित वरुणास्त्र (heavyweight torpedo) और medium range surface to air missiles (MSRAM)।

TEJAS के लिए चित्र परिणाम

मेक इन इंडिया के दो युद्धपोत
अभी तक सरकारी शिपयार्डों में ही युद्धपोतों के स्वदेशीकरण का काम चल रहा था, लेकिन देश में पहली बार नेवी के लिए प्राइवेट सेक्टर के शिपयार्ड में बने दो युद्धपोत पानी में उतारे गए हैं। रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड ने 25 जुलाई, 2017 को गुजरात के पीपावाव में नेवी के लिए दो ऑफशोर पैट्रोल वेसेल (OPV) लॉन्च किए, जिनके नाम शचि और श्रुति हैं।

भारत में बनाओ, भारत में बना खरीदो
इस नीति के तहत रक्षा मंत्रालय ने 82 हजार करोड़ की डील को मंजूरी दी है। इसके अतर्गत Light Combat Aircraft (LCA), T-90 टैंक, Mini-Unmanned Aerial Vehicles (UAV) और light combat helicopters की खरीद भी शामिल है। इस क्षेत्र में MSME को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुविधाएं दी गई हैं।

पीएम मोदी और स्टार्टअप्स के लिए चित्र परिणाम

टेक्नोलॉजी एंड टैलेंट में भारत आगे
बीते कुछ वर्षों में भारत ने साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। ISRO द्वारा एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च के करने के बाद भारत की धाक बढ़ी है। भारत ने पूरे विश्व में अपने इंजीनियर और साइंटिस्ट के लिए बड़ी मांग पैदा की है। दुनिया में अब भारत से टॉप स्तर के टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक ब्रेन को अपने यहां खींचने की होड़ लग गई है।

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