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गुजरात में फिर बीजेपी सरकार, कांग्रेस की हालत पस्त: ABP News ऑपिनियन पोल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में फिर से बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। एबीपी न्यूज और सीएसडीएस-लोकनीति ऑपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने जा रही है। ऑपिनियन पोल के अनुसार गुजरात के चारों क्षेत्रों में बीजेपी सबसे आगे है और कांग्रेस की हालत पहले से भी खराब है।

ऑपिनियन पोल के अनुसार अगर आज चुनाव हो तो बीजेपी को 144-152 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 26-32 सीटों पर सिमट सकती है। अन्य को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं। इससे पहले वर्ष 2012 में बीजेपी को 119 सीटों और कांग्रसे को 57 सीटों पर जीत मिली थी। गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं।

गुजरात ऑपिनियन पोल सीटें
बीजेपी 144-152
कांग्रेस 26-32
अन्य 3-7

 

सीएम की पसंद कौन?
एबीपी न्यूज चैनल के ओपिनियन पोल के मुताबिक मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को कोई चुनौती मिलती नहीं दिख रही है। रूपानी यहां सीएम की पहली पसंद बने हुए हैं। 24 फीसदी लोग उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी को सात प्रतिशत लोग दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। आनंदीबेन पटेल 5 फीसदी लोगों की पसंद हैं जबकि भरत सिंह सोलंकी सिर्फ दो प्रतिशत लोगों की पसंद हैं।

सीएम की पसंद कौन?  
विजय रूपाणी 24
नरेन्द्र मोदी 7
आनंदीबेन पटेल 5
भरत सिंह सोलंकी 2

 

यह ऑपिनियन पोल 9 अगस्त 2017 से 16 अगस्त 2017 के बीच किया गया है। इसमें 50 विधानसभा क्षेत्र के 4090 लोगों की राय ली गई है। ऑपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को पूरे गुजरात में स्वीप कर सकती है।

मोदी लहर बरकरार
एबीपी न्यूज के ऑपिनियन पोल से साफ है कि देश में मोदी लहर बरकरार है और इसका ताजा उदाहरण मीरा-भायंदर महानगर पालिका के चुनाव में देखने को मिला है। चुनाव में बीजेपी 61 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यहां शिवसेना को 22, कांग्रेस को 10 और अन्य को 2 सीटों पर जीत मिली है वहीं एनसीपी अपना खाता भी नहीं खोल पाई है।

इसके पहले बीजेपी कार्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी परिषद (केएएसी) चुनाव में भारी बहुमत से जीतने में कामयाब रही है। भाजपा को 26 सीटों में से 24 सीटों पर सफलता मिली। बाकी दो सीटों पर भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने वाले आर टकबी और डी उफिंग मासलाई को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका। असम के पहाड़ी जिले कार्बी आंग्लांग के केएएसी चुनाव में कांग्रेस के साथ अगप और स्थानीय पार्टी एचएसडीसी का भी खाता तक नहीं खुल पाया। 30 सीटों वाले केएएसी में चार सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं। 

भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ चलाए गए नोटबंदी अभियान के बाद हुए तमाम चुनावों में बीजेपी को भारी कामयाबी मिली है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में ही नहीं देशभर में कई जगहों पर हुए स्थानीय चुनावों में भी बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

एमसीडी में प्रचंड जीत
दिल्ली नगर निगम चुनाव (एमसीडी) में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली। बीजेपी को तीनों एमसीडी में बहुमत हासिल हुआ। दिल्ली नगर निगम की 270 सीटों में से बीजेपी को 184, आम आदमी पार्टी को 45, कांग्रेस को 30 और अन्य को 11 सीटों पर जीत मिली। चुनाव में कांग्रेस के 92 और आम आदमी पार्टी के 40 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। 

हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधान परिषद चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। राज्य विधानपरिषद के चुनाव परिणाम के अनुसार 34 सीटों वाले जम्मू-कश्मीर के उच्च सदन में बीजेपी 11 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनावों में और चंडीगढ़ में हुए नगर निगम चुनाव में भी बीजेपी को पहले से काफी ज्यादा सीटें मिलीं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान के उप चुनावों में भी पार्टी ने बाजी मारी।

महाराष्ट्र में महानगरपालिकाओं और जिला परिषदों के लिए हुए चुनावों में बीजेपी ने भारी जीत दर्ज की। बीएमसी की 227 सीटों में बीजेपी को 82 सीटें मिली। पुणे में बीजेपी को 74, नागपुर में 70, नासिक में 33, पिंपरी चिंचवाड़ में 70, इसी तरह उल्हासनगर में 34, सोलापुर में 49, अकोला में बीजेपी को 48 और अमरावती मे 45 सीटें मिली। 1514 जिला परिषद चुनाव में बीजेपी को 403, शिवसेना को 269, कांग्रेस को 300, एनसीपी को 344 सीटें मिली।

महाराष्ट्र की चंद्रपुर और लातूर महानगरपालिका चुनावों में बीजेपी को भारी सफलता मिली। लातूर में पिछली बार बीजेपी को एक भी सीट नही मिली थी। इस बार 41 सीटों पर कामयाबी मिली। आजादी के बाद पहली बार यहां कांग्रेस को करारी हार मिली।

कांग्रेस का सफाया

लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार खराब चल रहा है। विधानसभा चुनाव के साथ महाराष्ट्र नगर निगम और जिला परिषद चुनाव में भी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। जो पार्टी कभी पहले पायदान पर रहती थी, अब तीसरे और चौथे स्थान के लिए संघर्ष करती दिख रही है। पार्टी का कई इलाकों में सफाया हो गया है।

ओडिशा में भी जय-जयकार
ओडिशा में स्थानीय निकायों के चुनाव में भी बीजेपी ने परचम लहरा दिया। कोई खास जनाधार नहीं होने के बाद भी बीजेपी को यहां 270 सीटों का फायदा हुआ है। बीजेपी को यहां 2012 में 36 सीटें मिली थीं जो अब बढ़कर 306 हो गई हैं। बीजेपी यहां सत्ताधारी बीजू जनता दल के बाद दूसरे नंबर पर आई है। बीजेपी ने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है।

चंडीगढ़ में बल्ले-बल्ले

नोटबंदी के बाद 18 दिसंबर को चंडीगढ़ नगर निकाय के चुनाव हुए। यहां भाजपा को जबर्दस्त बहुमत मिला। इस चुनाव में 26 में से 20 सीट भाजपा की झोली में गई जबकि सहयोगी पार्टी शिरोमणी अकाली दल को एक सीट मिला। कांग्रेस पार्टी का तो सूपड़ा ही साफ हो गया। वह मात्र 4 सीट पर सिमट गई। भाजपा का वोटिंग शेयर यहां 56 फीसदी हो गया है। चंडीगढ़ निकाय चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं की जमानत जब्त हो गई।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में बीजेपी अव्वल

महाराष्ट्र में पहली बार म्यूनिसिपल काउंसिल के अध्यक्ष पद के लिए डायरेक्ट चुनाव हुए। इसमें बीजेपी ने 51 सीटें जीतीं जो कि कांग्रेस, एनसीपी या शिवसेना से दोगुनी है। शिवसेना को 25 और कांग्रेस को महज 23 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। यानी 2011 में जो पार्टी चौथे नंबर पर थी, वो नोटबंदी के फैसले के बाद 2016 में पहले नंबर पर आ गई, वो भी ग्रामीण इलाके में।

गुजरात में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

गुजरात में हुए स्थानीय चुनावों में तो बीजेपी ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ कर दिया। यहां के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस से 35 सीटें छीन लीं। 126 में से 109 सीटें जीती। वापी नगरपालिका, राजकोट, सूरत-कनकपुर-कंसाड में जो चुनाव हुए, उसमें बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की।

उपचुनाव में भी जीत

प्रधानमंत्री मोदी के जलवे के चलते पंजाब और गोवा के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में भी जोरदार झटका लगा। दिल्ली के राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव में भाजपा-अकाली गठबंधन के उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा ने जीत दर्ज की। इस सीट पर कांग्रेस दूसरे और आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही है और उसकी जमानत तक जब्त हो गई। 

नोटबंदी के बाद पहली बार 19 नवंबर को देशभर के विभिन्न राज्यों में 10 विधानसभा और चार लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव हुए। भाजपा असम, अरुणाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश की सभी उपचुनाव जीतने में सफल रही।

असम- नोटबंदी के बाद लखीमपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। यहां से भाजपा प्रत्याशी प्रधान बरुआ को जीत मिली। बैथालांगसो विधानसभा सीट पर भाजपा के ही मानसिंह रोंगपी ने जीत हासिल की।

मध्य प्रदेश- मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए। शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह और नेपानगर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मंजू दादू ने जीत दर्ज की।

अरुणाचल प्रदेश- नोटबंदी के बाद अरुणाचल प्रदेश में भी भाजपा की लहर देखने को मिली। भाजपा प्रत्याशी देसिंगू पुल को हायूलियांग विधानसभा सीट से जीत मिली।

त्रिपुरा- यहां उपचुनाव के बाद भाजपा का वोट शेयर 1% से बढ़कर पूरे 21% तक पहुंच गया है। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 41% से घट कर मात्र 2% हो गया है।

पश्चिम बंगाल- नोटबंदी के बाद पश्चिम बंगाल के कूचबिहार और तामलुक लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। कूचबिहार लोकसभा सीट पर भाजपा का वोट शेयर 16.4 से बढ़कर 28.5 फीसदी हो गया। वहीं तामलुक लोकसभा सीट पर भाजपा का वोट शेयर 6.4 से बढ़कर 15.25 फीसदी तक पहुंच गया। दोनों लोकसभा सीट पर भाजपा तृणमूल कांग्रेस के सामने खतरा बनकर उभरी है।

नोटबंदी के फैसले के बाद ज्यादातर नतीजे बीजेपी के पक्ष में गए हैं। सारे परिणाम उत्साहवर्धक रहे हैं। ये सारे परिणाम पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले पर जनता की सहमति का मुहर है।

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