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GST का एक वर्ष: कारोबारी दुनिया से लेकर आम नागरिकों का जीवन हुआ आसान

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1 जुलाई, 2017 से लागू हुए वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने देश में व्यापार के तरीके को पूरी तरह से बदलने का काम किया है। जीएसटी पर व्यापारियों से लेकर आम नागरिकों का एक साल का अनुभव बताता है कि कारोबारी दुनिया में यह पूरी तरह से एक सफल प्रणाली साबित हुई है।

GST से बेहद सहज हुई कारोबारी प्रक्रिया   
30 जून, 2017 की मध्यरात्रि को संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित भव्य कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बटन दबाकर GST की शुरुआत की थी। GST लागू होने के साथ ही देश का आर्थिक एकीकरण हो गया और ‘एक राष्ट्र एक कर’ का स्वप्न साकार हुआ। GST आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा टैक्स सुधार है। व्यापार का सूचना प्रौद्योगिकी से अद्भुत मिलन हुआ है और आज रिटर्न से लेकर रिफंड तक सब कुछ ऑनलाइन होता है।

GST से ढेर सारे टैक्स का मकड़जाल खत्म
GST से पहले तक ढेर सारे टैक्सों का मानो एक मकड़जाल था। पहले सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, स्टेट VAT, Central Sales Tax, Purchase Tax, Luxury Tax, एंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स और न जाने कितने टैक्स, सरचार्ज और सेस वसूले जाते थे। इतने सारे टैक्स की जगह जगह अब बस एक टैक्स है। जीएसटी से पहले तरह-तरह के टैक्स से चीजें बहुत महंगी हो जाती थीं। अब जीएसटी से टैक्स की कोई उलझन भी नहीं है और चीजें भी सस्ती हो गई हैं।

GST से महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में
GST की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि देश में मंहगाई दर 4.96 प्रतिशत के आसपास है, जो 2013 में 9.4 प्रतिशत और 2014 में 5.8 प्रतिशत रही थी। GST के 28 प्रतिशत के दायरे में अब मात्र 50 उत्पाद रह गए हैं। वहीं आम जन के रोजाना उपयोग में आने वाले जरूरी  सामान सस्ते हुए हैं।

  • साबुन, शैंपू, हेयर ऑयल जैसी रोजमर्रा के सामान सस्ते हुए
  • बिना पैक किए हुए, गेहूं, दाल, चावल, मसाले सब पर अब कोई टैक्स नहीं लगता है।
  • पैक किए हुए खाद्य पदार्थों पर 5 प्रतिशत का GST है, जो पहले से कम है।
  • ऑटो और FMCG क्षेत्र के उत्पादों की कीमतों में कमी आई। यह कमी 2,300 रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक की हुई है।

सामानों की आवाजाही में पहले से कहीं तेजी
GST से चेकपोस्ट खत्म हो गए हैं और सामानों की ढुलाई तेज हो गई है। इससे न सिर्फ समय बच रहा है बल्कि लाँजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी इसका काफी लाभ मिला है। पहले देश में टैक्स के मामले में इंस्पेक्टर राज की बहुत शिकायतें आती थी, अब सब कुछ समाप्त हो चुका है। GST से प्रक्रिया इतनी सरल हुई है जिससे और इससे पता चलता है कि Minimum Government, Maximum Governance पर मोदी सरकार पर कितना फोकस है।

अप्रत्यक्ष कर के दायरे का व्यापक विस्तार
GST की वजह से ही देश में Indirect Tax औऱ उससे जुड़ने वाले लोगों का विस्तार हो रहा है। स्वतंत्रता के बाद से GST के अमल में आने तक देश में Indirect Tax सिस्टम से जहां सिर्फ 60 लाख जुड़े हुए थे, वहीं GST के बाद के 11 महीनों में ही अब तक 54 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया है और इनमें से 47 लाख से ज्यादा रजिस्टर हो चुके हैं। इस तरह रजिस्टर्ड लोगों की संख्या अब एक करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। GST से पिछले वित्त वर्ष में हर महीने करीब 90,000 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में आए जो मौजूदा वित्त वर्ष में हर महीने करीब 1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। गौर करने वाली बात है कि जीएसटी लागू होने के बाद से शेयर बाजार में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई।

हर कसौटी पर खरा उतरा है GST
GST को कारोबारी व्यवस्था में सहजता से अपना लिया गया है। पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा मिला है। इतने बड़े देश में सबसे बड़ा कर सुधार लागू होना और एक साल में ही स्थिर होना, अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। लेकिन देश में ऐसे भी कुछ नेता हैं जो मानकर चल रहे थे कि GST का फेल होना तय है। अब जबकि GST हर प्रकार से कसौटियों पर खरा उतर चुका है तो उन्हें यह पच नहीं रहा है। वे हर तरह की साजिश में लगे हैं लेकिन कोई भी साजिश सफल इसलिए नहीं होने वाली क्योंकि GST ने तमाम कराबोरियों के साथ ही आम लोगों के भी जीवन को आसान बनाने का काम किया है।

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