Home नरेंद्र मोदी विशेष वैश्विक शक्ति बनने की राह पर है भारत: अमेरिकी राजनयिक

वैश्विक शक्ति बनने की राह पर है भारत: अमेरिकी राजनयिक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व स्तर पर अपनी क्षमता का अहसास कराया है, जिसके कारण आज दुनियाभर में भारत का डंका बज रहा है। अमेरिका की एक राजनयिक ने कहा है कि भारत वैश्विक शक्ति बनने की राह पर है। पूर्व ओबामा प्रशासन की राजनयिक अलिसा अयरेस ने अपनी किताब ‘ऑवर टाइम हैज कम : हाउ इंडिया इज मेकिंग इट्स प्लेस इन द वर्ल्ड’ में कहा कि यह देश वैश्विक शक्ति बनने की राह पर है। वर्ष 2010 से 2013 तक दक्षिण एशिया की उपसहायक विदेश मंत्री रही अलिसा ने कहा कि हम एक देश को आगे बढ़ने और किसी अन्य को हटाये बिना वैश्विक शक्तियों में पहचान बनाने की दिशा में बढ़ने का गवाह बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक शक्तियों की सूची में उसकी सदस्यता लंबे समय से लंबित है। उन्होंने लिखा है कि पिछले कई सालों में भारत ने अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बड़ी तेजी से बढ़ाया है और इन संबंधों की सुरक्षा का पूरा ध्यान भी रखता है।

इसके कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति बताया था। अमेरिका ने एक नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (एनएसएस) जारी करते हुए कहा कि इससे भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। अमेरिका ने यह भी कहा कि वह भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा कायम रखने के लिए भारत के नेतृत्व क्षमता के योगदान का समर्थन करता है। एनएसएस के 68 पन्नों वाले इस दस्तावेज में कहा गया है कि अमेरिका जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के साथ सहयोग बढ़ाएगा।

भारत प्रमुख साझेदार-अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जारी इस सुरक्षा रणनीति में कहा गया है कि, ‘ हम भारत के वैश्विक शक्ति के रूप में मजबूत रणनीतिकार और रक्षा सहयोगी के रूप में उभरने का स्वागत करते हैं।’ नवभारत टाइम्स के अनुसार रणनीति में आगे कहा गया है कि, ‘ हम अमेरिका के बड़े रक्षा सहयोगी भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाएंगे। हम क्षेत्र में भारत के बढ़ रहे संबंधों का समर्थन करते हैं।’ 

एनएसएस के अनुसार, ‘हम अपनी रणनीतिक साझेदारी भारत के साथ मजबूत करेंगे और हिंद महासागर सुरक्षा तथा समूचे सीमा क्षेत्र में भारत के नेतृत्वकारी भूमिका का समर्थन करेंगे।’ चीन के वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के मद्देनजर अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि इलाके में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वह दक्षिण एशियाई देशों को अपनी ‘संप्रभुता’ बरकरार रखने में मदद करेगा। भारत ने सीपीईसी का विरोध किया था क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर से होकर गुजरती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वो हैसियत हासिल कर ली है जो उसे ग्लोबल ताकत बनाता है। एक दौर वह भी था जब भारत विश्व की महाशक्तियों के भरोसे रहता था। आज भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में कई चीजें ऐसी हुई हैं जिससे यह बात साबित होती है कि भारत को कोई हल्के में नहीं ले सकता।

डोकलाम पर चीन की नींद हराम
73 दिनों के आसपास तक चले इस प्रकरण में जिस तरह के मौखिक आक्रामकता और गीदड़भभकी का प्रदर्शन चीन ने किया और उसके जवाब में जिस राजनीतिक परिपक्वता और टेंपरामेंट का परिचय भारत ने दिया उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद बढ़ा दिया। जिस तरह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेना और कूटनीतिज्ञों ने डोकलाम प्रकरण पर चीन को पछाड़ लगाई इससे दुनिया की नजरों में यह संदेश गया है कि भारत केवल अपने हित के लिए नहीं बल्कि अपने पड़ोसी देशों के हितों की रक्षा के लिए भी तत्पर रहता है। इस विवाद के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान और इजरायल ने खुलकर भारत का पक्ष लिया और अमेरिका ने बार-बार मसले को शांति पूर्ण तरीके से निपटाने की अपील की इससे चीन को लगने लगा था कि उनकी चाल गलत पड़ गई है। स्पष्ट है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री ने विदेशी शासनाध्यक्षों से अच्छे संबंधों का ही नतीजा है कि आज चीन जैसे देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत घेर सका।

मोदी नीति से पस्त हुआ पाकिस्तान
मोदी सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी विदेशनीति के प्रभाव से पाकिस्तान विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति में ऐसा घिरा है कि उसे विश्व पटल पर भारत के खिलाफ अपने साथ खड़ा होने वाला कोई एक सहयोगी देश नहीं मिल रहा। चीन तक भारत के खिलाफ उसका साथ देने को तैयार नहीं है। अमेरिका की अफगान नीति से उसे बाहर किया जा चुका है तथा वो सहयोग में भी और कटौती की बात कर रहा। पाक को आतंकवाद का गढ़ कहते हुए अफगानिस्तान और बांग्लादेश भी अब पाकिस्तान का साथ पूरी तरह से छोड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, चीन को अपना खास दोस्त और बड़ा हितैषी समझने वाले पाकिस्तान को तब झटका लगा जब चीन ने भी पाक के द्वारा कश्मीर में अंतराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग पर इसे द्विपक्षीय मामला कहकर कन्नी काट ली। इससे पहले जम्मू कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जब 29 सितम्बर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लॉन्चपैठ को तबाह किया तो विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन का बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने बहिष्कार कर दिया।

आतंकवाद पर अब दुनिया भारत के साथ
आतंकवाद पर अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की बात पहले अनसुनी रह जाती थी, लेकिन अब भारत की बातों को दुनिया मानने लगी है और एक सुर में आतंक की निंदा कर रही है। आतंक के खिलाफ आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, नार्वे, कनाडा, ईरान जैसे देश हमारे साथ खड़े हैं। पाकिस्तान को छोड़कर सार्क के सभी सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और नेपाल हमारे साथ हैं। जी-20 हो या हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन, ब्रिक्स हो या सार्क समिट सभी ने हमारे साथ आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए दुनिया को इसके खिलाफ एक होने का आह्वान किया है। दरअसल दुनिया ने लंबे समय तक भारत के आतंकवाद के तर्क पर विश्वास नहीं किया था। कई बार भारत के आतंकवाद को दुनिया के देश कानून और व्यवस्था की समस्या बताते थे, लेकिन दुनिया अब मान रही है कि भारत को आतंकवाद के कारण क्या नुकसान भुगतने पड़े हैं। अब दुनिया यह भी मानती है भारत ही नहीं विश्व में आतंकवाद की समस्‍या पाकिस्‍तान की देन है।

अच्छे-बुरे आतंकवाद का फर्क भूली दुनिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा आतंक और आतंकवादियों को प्रश्रय देने वालों पर कड़ा प्रहार करते हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि यदि हम आतंकवाद को लेकर किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाते हैं तो मानव जाति का बचाव नहीं कर सकते। आतंकवाद, आतंकवाद है, इसमें अच्छे या बुरे आतंकवाद के आधार पर कोई भेद नहीं है। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय जगत के सामने भारत की यही बात पहले अनसुनी रह जाती थी, लेकिन अब भारत की बातों को दुनिया मानने लगी है और एक सुर में आतंक की निंदा कर रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, नार्वे, कनाडा, ईरान जैसे देशों ने आतंक के खिलाफ एकजुटता का वादा भी किया है। 

शांति की पहल को मिल रही सराहना
खाड़ी देशों के अतिरिक्त सभी बड़ी एयरलाइन कंपनियों की उड़ानें पाकिस्तान को नहीं जातीं। क्रिकेट खेलने वाले देशों की टीमें पाकिस्तान का दौरा नहीं करतीं और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पाकिस्तान नहीं जाते। जाहिर है पाकिस्तान अपनी करनी के कारण विश्व समुदाय में अलग-थलग है, लेकिन भारत हमेशा से विश्व शांति का सबसे बड़ा पैरोकार रहा है। यूनाइटेड नेशन ने भी माना है कि इस दिशा में भारत का प्रयास अन्य देशों की तुलना में ज्यादा है। यह सब जानते हैं कि भारत की शांति की पहल को पाकिस्तान हमेशा नकारता रहा है। बावजूद इसके पीएम मोदी ने अपनी तरफ से हर कोशिश की कि पाकिस्तान भारत के साथ सहयोग की मुख्यधारा में रहे। 25 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री जब लाहौर पहुंच गए तो दुनिया ने देखा कि पीएम मोदी ने शांति की पहल की। 26 मई 2014 को जब पीएम मोदी ने सार्क देशों के नेताओं को आमंत्रण भेजा था तो ये पड़ोसी देशों के साथ शांति और सहयोग की पहल ही थी। हालांकि पाकिस्तान अब भी शांति की राह में रोड़ा बना हुआ है।

मोदी ग्लोबल के लिए चित्र परिणाम

जलवायु परिवर्तन पर साहसिक कदम
जलवायु परिवर्तन पर काम करने के लिए भारत वैश्विक नेतृत्व को प्रेरित कर रहा है क्योंकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरत का 40% हिस्सा 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को नियत समय से 8 साल पहले प्राप्त किया जा सकता है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में संभवत: अमेरिका से भी आगे है। भारत ने ऊर्जा के लिए कोयले से सौर की तरफ रूख करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। सौर और पवन ऊर्जा में भारी निवेश से बिजली की कीमतें भी कम हुई हैं। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार यह साहस भी दिखाया है जब अमेरिका ने खुद को पेरिस समझौते से अलग किया तो दुनिया की नजर भारत पर ठहर गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी ताकतवर उपस्थिति दर्ज करा दी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसे प्रयास किये हैं जिनके चलते अब ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े मुद्दे पर उसके नेतृत्व करने की उम्मीद काफी बढ़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ही इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) का गठन हुआ जिसमें 121 देश शामिल हैं।

भारत के योग को विश्व ने अपनाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 21 जून, 2015 को विश्व के 192 देश जब ‘योगपथ’ पर चल पड़े तो सारे संसार में योग का डंका बजने लगा। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का मोदी मंत्र दुनिया के देशों को भी भाया और इसी कारण पीएम मोदी की पहल को 192 देशों का समर्थन मिला। 177 देश योग के सह प्रायोजक के तौर पर इस आयोजन से जुड़ भी गए। अब पूरी दुनिया योग शक्ति से आपस में जुड़ी हुई महसूस होने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनथक प्रयास से योग को आज पूरी दुनिया में एक नई दृष्टि से देखा जाने लगा है। यह अनायास नहीं है कि पूरी दुनिया में योग का डंका बज रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भारत की नीति और भारतीय होने पर गौरव की अनुभूति से प्रभावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग का पूरी दुनिया में प्रसार किया है। भारत ने विश्व को आध्यात्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। शून्य की तरह विश्व को भारत की सबसे बड़ी देन योग को माना जा रहा है। दरअसल योग एक विचार नहीं बल्कि भारतीय जीवन पद्धति है जिसमें भारतीय जीवन मूल्य यानि संस्कृति समाहित हैं।

 

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