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गुजरात की छवि बिगाड़ने की साजिश के पीछे कौन ?

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इंटरनेट के जमाने में सोशल मीडिया ने आम लोगों को बहुत बड़ी ताकत दी है। वो अपनी बातों को बहुत ही आसानी से पूरे विश्व में पहुंचा सकते हैं। लेकिन अच्छी चीज का भी अगर बुरा इस्तेमाल किया जाय, तो उतना ही घातक भी साबित हो सकता है। वैसे आम जनता की गलतियों को तो कुछ हद तक नजरअंदाज भी किया जा सकता है। लेकिन अगर उसी तरह की हरकत मेनस्ट्रीम मीडिया करे तो उसे सिर्फ गलती नहीं कही जा सकती। खासकर तब जब ऐसा करने के पीछे एक एजेंडा छिपा हो। किसी की छवि बिगाड़ने का एजेंडा, दुष्प्रचार का एजेंडा। क्योंकि अगर आपसे गलती हो जाती है, तो तुरंत उसे मान लेने की जिम्मेदारी भी बनती है। लेकिन जब आपके मकसद में ही खोट हो तो ऐसी बातों की उम्मीद ही बेमानी है।

इस एजेंडे का खुलासा करें उससे पहले आप जरा इस तस्वीर को ध्यान से देखिये-

चेन्नई एयरपोर्ट, दिसंबर, 2015

ये तस्वीर चेन्नई एयरपोर्ट की है। 2015 में चेन्नई समेत पूरे तमिलनाडु में जबर्दस्त बारिश हुई थी। कई दिनों तक चेन्नई का हवाई संपर्क पूरे देश से टूट गया था।

वामपंथी मीडिया की चाल

दरअसल पिछले कई दिनों से अहमदाबाद समेत पूरे गुजरात में भारी बारिश हो रही है। संयोग से दो दिन पहले अहमदाबाद में एक ही रात में 7 इंच तक बारिश रिकॉर्ड की गई थी। फिर क्या देश की वामपंथी मीडिया एकबार फिर से जानबूझकर गुजरात और उसी बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने के खेलने में जुट गई। सबसे पहले Journalism of Courage की बात करने वाले इंडियन एक्सप्रेस की हरकत देखिये। इसने अपने पहले पेज पर ही चेन्नई एयरपोर्ट का दो साल पुराना फोटो अहमदाबाद एयरपोर्ट की तस्वीर बता कर छाप दी।

झूठी पत्रकारिता के खेल में कई दूसरी मीडिया भी शामिल

इंडियन एक्सप्रेस ने ये फोटो पीटीआई के फाइल से उठाई। इसीलिए आशंका है कि कहीं ये सबकुछ उसी दुष्प्रचार के एजेंडे का परिणाम तो नहीं है जो कई मौकों पर देखने को मिला है। दूसरे मीडिया हाउस ने भी बिना पड़ताल के इन्हीं पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल अहमदाबाद के सरदार पटेल एयरपोर्ट बताकर के रूप में किया।

फर्जी तस्वीरों के सहारे AAP ने फिर दिखा दी औकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से गुजरात को जोड़कर इस तरह से नकारात्मकता फैलाने का खेल कोई नया नहीं है। इसका अंदाजा इसी से मिलता है कि विपक्ष ने इन फर्जी रिपोर्ट्स के आधार पर राजनीति शुरू करने में तनिक भी देरी नहीं की। आम आदमी पार्टी के आईटी इंचार्ज ने ऐसे ही फर्जी फोटो के आधार पर तपाक से ट्वीट करके गुजरात की बदहाली दिखाने की चाल चल दी।

गलती करने वाले जवाबदेही भी लेते हैं

पीटीआई ने जिस गलत तस्वीर का इस्तेमाल किया था उसके झांसे में अहमदाबाद ऑल इंडिया रेडियो में आया था। लेकिन केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने फौरन सतर्कता दिखाते हुए लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे दिये।

सवाल उठता है कि अहमदाबाद की झूठी तस्वीर दिखाने वाली मेनस्ट्रीम मीडिया की जवाबदेही नहीं बनती कि वो भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें और आगे से बिना तथ्यों की पड़ताल किये सोशल मीडिया पर चलने वाली बेवकूफियों को दुष्प्रचार की हथकंडा न बनायें ? वैसे लोग तो ये भी कहते हैं कि जैसे-जैसे गुजरात विधानसभा चुनाव के दिन और करीब आएंगे। वामपंथी पत्रकारिता इस तरह से अपने कई रंग दिखायेगी। सोशल मीडिया पर सक्रिय आम जनता के लिये भी ये एक सीख है। बेवकूफ मत बनिये। निहित स्वार्थी तत्वों को पहचानिये उनकी साजिशों का शिकार मत बनिये और अपने विवेक से फैसला कीजिए।

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