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पीएम मोदी के खिलाफ विदेशी मीडिया की साजिश

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सिर्फ देश में ही अंग्रेजी मीडिया का एक वर्ग ने अभियान नहीं चला रखा है बल्कि विदेशी मीडिया भी एक साजिश के तहत अभियान चला रखा है। एक खास साजिश के तहत देश के उदारवादियों के आधार पर विदेशी मीडिया ने मोदी और हिंदुओं को तानाशाह, हिंसक और घृणा फैलाने वाले के रूप में स्थापित करने का अभियान चलाया हुआ है। टाइम मैगजीन में मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताना उसी साजिश का हिस्सा है। इससे पहले द न्ययॉर्क टाइम्स, द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट में भी मोदी के खिलाफ भ्रम फैलाने वाली स्टोरी प्रकाशित हो चुकी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी के कैंपेन को बताया था डरावना

टाइम मैगजीन से पहले न्ययॉर्क टाइम्स ने 17 अप्रैल 2019 के अपने संस्करण में मोदी के खिलाफ स्टोरी प्रकाशित की थी। उस स्टोरी में जहां मोदी के चुनावी कैंपेन को डरावना बताया था वहीं बहुसंख्यक हिदुओं को मुसलमान और पाकिस्तान के लिए खतरनाक बताया है।

द गार्जियन ने मोदी को बताया था हिंदू तालिबान

पीएम मोदी के सत्ता में आने के करीब डेढ़ साल बाद ही द गार्जियन ने भारत में मोदी सरकार को हिंदू तालिबान का शासन बताया था। अनीश कपूर ने अपने लेख के शीर्षक में ही लिखा था भारत में हिंदू तालिबान का शासन चल रहा है। उन्होंने मोदी को तालिबान बताया था।

मोदी को दमनकारी नेता के रूप में किया गया प्रोजेक्ट

मोदी को लेकर विदेशी मीडिया शुरू से ही एकांगी और पूर्वाग्रह से ग्रसित रहा है। अपने पूर्वाग्रह के कारण ही विदेशी मीडिया मोदी को दमनकारी मान चुका है। अब तो दमनकारी ठहराने के लिए प्रश्न भी वैसे गढ़े और पूछे जाने लगे हैं। दो दिन पहले ही एक पत्रकार ने  अमेरिका की राष्ट्रपति उम्मीदवार तुलसी गावार्ड से मोदी की दमनकारी नीति पर सवाल पूछा है।  

 हनुमान को आतंकी बताया, स्वास्तिक का गलत प्रचार 

विदेशी मीडिया शुरू से ही स्वास्तिक को लेकर गलत धारणा फैलाता रहा है। निकी हैली की स्वास्तिक वाली तस्वीर को हटाकर रायटर ने अपनी अज्ञानता ही प्रदर्शित किया है। मोदी के साथ हिंदुओं को अपमानित करना जारी है। वाशिंगटन पोस्ट ने हिंदू देवता हनुमान के चेहरे को हिंदूवादी आतंकी के रूप में स्थापित किया है।देश के अधिकांश लोग न तो टाइम मैगजीन पढ़ते हैं न ही न्यूयॉर्क टाइम और ना वाशिंगटन पोस्ट या द गार्जियन। विदेशी मीडिया देश और मोदी के खिलाफ जो साजिश रच रहा है उसका परिणाम दीर्घ अवधि के लिए घातक साबित हो सकता है। भले कम समय के लिए भारतीय जनमानस पर इसका असर न हो।

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