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मोदी राज में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार, एक हफ्ते में बढ़ा 3.52 अरब डॉलर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और मोदी सरकार द्वारा दी जा रही अन्य सुविधाओं का असर भी दिखाई देने लगा है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक नवंबर को समाप्त सप्ताह में 3.52 अरब डॉलर बढ़कर 446.09 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे पिछले सप्ताहांत में देश का विदेशीमुद्रा भंडार 1.83 अरब डॉलर बढ़कर 442.58 अरब डॉलर हो गया था।

रिजर्व बैंक ने कहा कि आलोच्य सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 3.201 अरब डॉलर बढ़कर 413.65 अरब डॉलर हो गयी। विदेशी मुद्रा परिसम्पत्तियां विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डॉलर में अभिव्यक्त की जाने वाली विदेशीमुद्रा आस्तियां यूरो, पौंड और जापानी येन जैसी मुद्राओं की विनिमय दर में घट बढ़ से भी प्रभावित होती हैं।

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान आरक्षित स्वर्ण भंडार 30.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 27.35 अरब डॉलर का हो गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से विशेष आहरण अधिकार भी 20 लाख डॉलर बढ़कर 1.44 अरब डॉलर हो गया। अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष के पास देश के मुद्राभंडार की स्थिति भी एक करोड़ डॉलर बढ़कर 3.65 अरब डॉलर हो गई। 

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

5 साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करेगी फेयरफैक्स
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारत में विदेशी कंपनियां खूब निवेश कर रही हैं। कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स अगले पांच साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करने जा रही है। कंपनी पिछले पांच साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है और इतनी ही रकम वह अगले पांच साल में लगाने जा रही है। कंपनी के प्रमुख और अरबपति निवेशक प्रेम वत्स ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ इंटरव्यू में भारत में आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यहां ‘शानदार मौके’ हैं। उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से भारत दुनिया का नंबर वन देश है। प्रेम वत्स ने कहा, ‘दुनिया की जीडीपी में भारत का योगदान 3 प्रतिशत है, लेकिन कुल वैश्विक निवेश में इसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत ही है। अगर इसे बढ़ाकर 2 प्रतिशत भी कर दिया जाए तो भारत में 3 लाख करोड़ डॉलर का निवेश बढ़ेगा।’ उन्होंने कहा कि आज चीन और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कुछ मतभेद चल रहे हैं। ऐसे में लोग भारत में पैसा नहीं लगाएंगे तो कहां लगाएंगे? वे किसी बड़े बाजार में निवेश करना चाहते हैं, जहां लोकतंत्र हो। जहां कानून का राज हो। प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत खुशकिस्मत है कि उसे मोदीजी जैसे बिजनस-फ्रेंडली नेता मिला है। उनका पूरा ध्यान देश के लिए अच्छा करने पर है। वत्स ने कहा कि इस तरह का तजुर्बा ग्लोबल लीडर में कम ही होता है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेसरैंकिंग में भारत की लंबी छलांग

कारोबार सुगमता यानी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में बेहतरी के लिए लगातार प्रयासों का असर अब दिखने लगा है। इसके चलते विश्व बैंक की कारोबार सुगमता सूची-2020 में देश ने 14 पायदान की छलांग लगाई। इस सूची में भारत की रैंकिंग 63वीं रही है। पिछली सूची में भारत का स्थान 77वां था। इस सूची में 190 देशों की रैंकिंग की गई। विश्व बैंक की रिपोर्ट में इस रैंकिंग सुधार की अहम वजह सरकार का ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम और निवेश आकर्षित करने के लिए अन्य सुधार करना बताया गया। इसके अलावा इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड को सफलतापूर्वक लागू करने के चलते भी भारत की रैंकिंग सुधरी है। बयान में कहा गया है कि सरकार के लगातार प्रयासों से 2014-19 तक पांच सालों में देश की इस रैकिंग में 79 स्थान का सुधार आया है। भारत ने सूची के 10 मानकों में से सात पर बेहतर प्रदर्शन किया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। 

विलिस टॉवर्स वॉटसन ने अपनी यह रिपोर्ट विभन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कंपनियों की प्रगति का अध्ययन और सर्वे करने के बाद तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

आईएमएफ को भरोसा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत की अगुवाई में दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और 2040 तक वृद्धि में इसका अकेले एक-तिहाई योगदान हो सकता है। आईएमएफ के हालिया शोध दस्तावेज में कहा गया कि बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा कार्यबल का सफलतापूर्वक लाभ उठाकर यह 2040 तक वैश्विक वृद्धि में एक तिहाई योगदान दे सकता है। आईएमएफ की एशिया एवं प्रशांत विभाग की उप निदेशक एनी मेरी गुलडे वोल्फ ने कहा कि हम दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि केंद्र के रूप में आगे बढ़ता हुए देख रहे हैं।

अगले साल 7 प्रतिशत हो जाएगी विकास दर- आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने पिछले दिनों देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि अगले साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर 7 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है। आईएमएफ के एशिया प्रशांत विभाग के उप-निदेशक जोनाथन ओस्ट्री ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष (2020-21) में सात प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष में इसके 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। मौद्रिक नीति प्रोत्साहन जैसे उपायों से आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हाल में कर कटौती, सरकार के वित्तीय क्षेत्र में समस्याओं को दूर करने के लिये उठाये गये कदमों तथा विभिन्न क्षेत्रों को समर्थन देने के उपायों से निकट भविष्य में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में सुधार की उम्मीद है।

सबसे तेजी से बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था- आईएमएफ
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल ही में कहा कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ रही है। आईएमएफ ने कहा कि 2019 में भी भारत और चीन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बने रहेंगे। आईएमएफ के एमडी क्रिस्टालिना जियोर्गिवा ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले साल काफी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई थी। आईएमएफ ने कहा है कि भारत ने अर्थव्यवस्था को लेकर बुनियादी मुद्दों पर काम किया है, लेकिन लंबे समय तक विकास को लेकर कुछ परेशानियां हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। भारतीय महिलाएं काफी प्रतिभाशाली हैं और श्रम शक्ति में उन्हें शामिल किया जाए। आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

औद्योगिक उत्पादन जुलाई में 4.3 प्रतिशत बढ़ा
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वृद्धि दर जुलाई माह में 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई। जुलाई में मासिक आधार पर उद्योगों ने रफ्तार पकड़ी है। आईआईपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ जुलाई महीने में 4.2 प्रतिशत रही, बिजली उत्पादन में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि रही, जबकि खनन क्षेत्र की वृद्धि दर इस साल जुलाई में बढ़कर 4.9 प्रतिशत रही। उद्योगों की दृष्टि से विनिर्माण क्षेत्र के 13 समूहों ने जुलाई, 2018 की तुलना में जुलाई, 2019 के दौरान धनात्मक वृद्धि दर दर्ज की है। इस दौरान ‘खाद्य उत्‍पादों के विनिर्माण’ ने 23.4 प्रतिशत की सर्वाधिक धनात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसके बाद ‘बुनियादी धातुओं के विनिर्माण’ का नम्बर आता है जिसने 17.3 प्रतिशत की धनात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसी तरह ‘पहनने वाले परिधानों के विनिर्माण’ ने 15.0 प्रतिशत की धनात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है।

इसी साल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की इकोनॉमी दिन दूनी- रात चौगुनी तरक्की कर रही है। आज पूरी दुनिया में इंडियन इकोनॉमी का बोलबाला है। अर्थव्यवस्था के मामले में भारत आज विश्व की चोटी के देशों को चुनौती दे रहा है। आईएचएस मार्किट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस साल ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 तक भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा। इस रिपोर्ट में भारतीय उपभोक्ता बाजार के भी 2019 में 1.9 खरब डॉलर से लगभग दोगुना बढ़कर 2025 तक 3.6 खरब डॉलर हो जाने की भविष्यवाणी भी की गई है।

2018-19 में मिला अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का एफडीआई
पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भारत में किया गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले पांच साल के दौरान 286 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। 2018-19 में देश में अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। डीपीआईआईटी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान उठाए गए सुधार उपायों से भारत 2016-17 में हासिल एफडीआई के आंकड़े को पार करने में सफल रहा और 2017-18 में 60.98 अरब डॉलर का एफडीआई आया। यह उस समय तक एफडीआई का सबसे ऊंचा आंकड़ा था।

सर्विस सेक्टर में 37 प्रतिशत बढ़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
मोदी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिये कई कदम उठाए हैं, इसमें मंजूरी के लिए नियत समयसीमा और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिये प्रक्रियाओं को दुरूस्त करना शामिल हैं। वर्ष 2018-19 में सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 36.5 प्रतिशत बढ़कर 9.15 अरब डॉलर रहा। उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के अनुसार इस क्षेत्र में वर्ष 2017-18 में 6.7 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। सेवा क्षेत्र में यह वृद्धि इसलिए अहम है क्योंकि यह जीडीपी में इसका योगदान 60 प्रतिशत से अधिक है।

FDI के मोर्चे पर 20 वर्ष में पहली बार भारत ने चीन को पछाड़ा
भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका। पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत सरकार और नए क्षेत्रों में भारी अवसरों के कारण भारत विदेशी निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पिछले साल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के 235 सौदे हुए। पिछले 20 वर्षों से चीन विदेशी निवेशकों की पसंदीदा जगह बना हुआ था। पिछले साल चीन के बाजारों में आंशिक मंदी और अमेरिका के साथ ट्रेड वार के चलते विदेशी निवेशकों का रुख भारत की ओर बढ़ा है।

NPA के मामलों में सरकार को मिली बड़ी कामयाबी
रिजर्व बैंक आफ इंडिया की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का ग्रॉस एनपीए घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया है। यह एक साल पहले 11.2 फीसदी पर था। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के फंसे कर्ज के बारे में जल्द पता चलने और उसका जल्द समाधान होने से एनपीए को नियंत्रित करने में मदद मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरूआती कठिनाइयों के बाद इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) बैंकिंग सिस्टम का पूरा माहौल बदलने वाला कदम साबित हो रहा है। पुराने फंसे कर्ज की रिकवरी में सुधार आ रहा है और इसके परिणामस्वरूप, संभावित निवेश चक्र में जो स्थिरता बनी हुई थी, उसमें सुगमता आने लगी है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

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