Home विचार कांग्रेस की राजनीति के चार आधार… धर्म, जाति, भ्रष्टाचार और दुष्प्रचार

कांग्रेस की राजनीति के चार आधार… धर्म, जाति, भ्रष्टाचार और दुष्प्रचार

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11 जून को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ओबीसी सम्मेलन में हिस्सा लिया। भारतीय राजनीति के लिहाज से यह असाधारण प्रकरण है। जिस पार्टी की विरासत महात्मा गांधी, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और जवाहर लाल नेहरू जैसी शख्सियतों से जुड़ी हो, उसे यह दुर्दिन देखना पड़ेगा, ये किसी ने सोचा तक नहीं था। हालांकि अब यह हकीकत है और देश की सबसे पुरानी पार्टी उन क्षेत्रीय दलों की कतार में खड़ी हो गई है जिनकी पूरी राजनीति का आधार ही जाति है।

दरअसल किसी भी सूरत में सत्ता पाने की हसरत लिए कांग्रेस पार्टी बांटने, तोड़ने और टकराव के पॉलिटिक्स को बढ़ावा दे रही है। हर दिन आगजनी, हिंसा, उपद्रव, भारत बंद जैसी बातों से देश को अराजकता की गर्त में धकेल देने की अपनी योजना को वह लागू भी कर रही है। आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए यह पूरी प्लानिंग कैंब्रिज एनालिटिका से मिलकर तैयार की है। उसने इसके लिए SRCC फॉर्मूला तैयार किया है। 

  • S – Social Media
  • R – Religion
  • C – Cast
  • C – Corruption

Social Media – दुष्प्रचार ही जीत का आधार

राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु दिग्विजय सिंह ने 10 जून को ट्वीट किया। ट्वीट के जरिये वे मध्य प्रदेश सरकार को वे घेरना चाहते थे, लेकिन झूठे दुष्प्रचार के चक्कर में वे खुद ही फंस गए। दरअसल उन्होंने पाकिस्तान के रावलपिंडी के मेट्रो पुल को भोपाल के सुभाष नगर का पुल बताते हुए पोस्ट कर दिया। उन्होंने जिस पुल के पिलर का जिक्र किया था उसका निर्माण कार्य तो अभी पूरा ही नहीं हुआ है, लेकिन शिवराज सरकार को बदनाम करने के चक्कर में उन्होंने पाकिस्तान के रावलपिंडी के एक पुल की तस्वीर ट्विटर पर डाल दी। हालांकि बाद में उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने ऐसे दुष्प्रचार के लिए पूरा तंत्र विकसित कर रखा है। अक्टूबर 2017 में यह खुलासा हुआ था कि रूस, कजाकिस्तान या इंडोनेशियाई Characteristic से लैस ‘Bots’ नियमित रूप से कांग्रेस अध्यक्ष के ट्वीट को री-ट्वीट करते रहे हैं। इसी तरह सितंबर 2017 में खुलासा हुआ था कि राहुल गांधी के 49 प्रतिशत ट्विटर अकाउंट फॉलोअर्स फेक थे।

Religion – धर्म के नाम पर पर अधर्म

कांग्रेस पार्टी ने लिंगायतों को हिंदू धर्म से अलग करने की कोशिश की। लिंगायतों से वीरशैव समुदाय को भी तोड़ने की साजिश रची गई। हालांकि कांग्रेस की मंशा को भांपते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस की घृणित राजनीति का कच्चा चिट्ठा जरूर खोल दिया। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस किस तरह से धर्म का इस्तेमाल करती है इसका उदाहरण है चर्चों और मस्जिदों से प्रधानमंत्री मोदी को हराने के लिए जारी होने वाले फतवे। गोवा, दिल्ली और गुजरात के चर्चों ने तो फतवे जारी किए हैं। इसी तरह कर्नाटक में गुलाम नबी आजाद ने मुसलमानों से मोदी विरोध के नाम पर वोट मांगा था।

Cast – हिंदू तोड़ो-चुनाव जीतो

हिंदू समुदाय को आपस में बांटने और जाति के आधार पर दूसरी जाति को शह देकर भड़काने की कांग्रेस पार्टी की पुरानी नीति है। एससी-एसटी एक्ट पर मार्च, 2018 में आए सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय पर झूठ बोलकर राहुल गांधी ने पहले तो देश को गुमराह किया। इसके बाद 2 अप्रैल, 2018 को आंदोलन के नाम पर देश को हिंसा की आग में झोंक दिया। इससे पहले गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने पटेल समुदाय को भड़काकर वहां हिंसा फैलाई थी। चुनाव से पहले ठाकोर समुदाय को तोड़ने की कोशिश की। ऊना में दलितों की पिटाई में भी कांग्रेस का हाथ सामने आया। वहीं मूंछें रखने पर दलित की हत्या वाली घटना भी कांग्रेस की साजिश का पर्दाफाश हुआ। वर्ष 2017 में सहारनपुर में दलितों को ठाकुरों से लड़वाने की कांग्रेस की रणनीति का भी खुलासा हुआ था।

Corruption – करो भ्रष्टाचार – बनाओ सरकार

जब सभी तिकड़म नाकाम हो जाते हैं तो अंत में कांग्रेस करप्शन के सहारे सत्ता पाने की जुगत करती है। कर्नाटक में जनता द्वारा खारिज किए जाने के बाद भी कांग्रेस ने जनादेश का अपमान किया। सत्ता प्रेम में तीसरे नंबर की पार्टी के नेता कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनवा दिया। गौरतलब है सिद्धारमैया सरकार के 20 मंत्री भी चुनाव हार गए थे और पिछली बार की तुलना में 43 सीटों भी कम मिलीं। खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी अपनी एक सीट हार गए और दूसरी सीट पर ब-मुश्किल 1600 मतों से जीत पाए। जाहिर है कर्नाटक के मतदाताओं ने 104 सीटें देकर बीजेपी पर अपना भरोसा दिखाया था। लेकिन कांग्रेस ने यहां भी डर्टी गेम जारी रखा और करप्शन के बूते सरकार बना ली।

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