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जमीन घोटाले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा पर कसा शिकंजा

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा खिलाफ जमीन घोटाले में शिकंजा कस गया है। वाड्रा के खिलाफ जमीन खरीद मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा को सारे नियम ताक पर रखकर हरियाणा में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें करोड़ों का फायदा पहुंचाया था। राहुल के जीजा, सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा साल 2014 लोकसभा चुनावों के ऐन पहले इस घोटाले को लेकर चर्चा में आए थे।

आपको बता दें कि यूपीए-2 के दौरान रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी पर सरकारी संबंधों का का फायदा उठाते हुए लैंड डील में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। रॉबर्ट वाड्रा के स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड पर गुरुग्राम के सेक्टर 83 में 3.5 एकड़ जमीन ओंकरेश्वर प्रॉपर्टीज से वर्ष 2008 में 7.50 करोड़ रुपए में खरीदने का आरोप है। जिस वक्त जमीन खरीदी गई उस वक्त कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य के मुख्यमंत्री थे और उनके पास आवास एवं शहरी नियोजन विभाग भी था। हुड्डा पर आरोप लगा था कि उन्होंने वाड्रा को फायदा पहुंचाया। वाड्रा के स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड पर शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ प्लॉट 7.5 करोड़ में खरीदने और उसको डीएलएफ को 58 करोड़ में बेचने का आरोप लगा। वाड्रा ने हमेशा अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी भ्रष्टाचार के आरोपों से इंकार कर दिया था।

देखते हैं इस पूरे मामले में कब क्या हुआ-

नंवबर 2007: स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी रॉबर्ट वाड्रा द्वारा 1 लाख इक्विटी पूंजी के साथ अपने बिजनेस की शुरुआत करती है।

फरवरी 2008: कंपनी ने गुरुग्राम के सेक्टर 83 के शिकोहपुर में 3.531 एकड़ जमीन खरीदी। इसके बदले 7.5 करोड़ का भुगतान ओंकरेश्वर प्रॉपर्टीज को किया गया। यह भुगतान फर्जी चेक का इस्तेमाल कर किया गया। डीड में दावा किया गया कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को 45 लाख रुपये का स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान किया गया था।

मार्च 2008: लाइसेंसिंग अथॉरिटी, निदेशक टाउन और कंट्री प्लानिंग हरियाणा द्वारा आवेदन के केवल 18 दिनों के भीतर एलओआई जारी कर दिया गया।

जून 2008: वाणिज्यिक कॉलोनी लाइसेंस के साथ 2.701 एकड़ जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेची गई।

अगस्त 2008: साइट पर एक वाणिज्यिक परिसर विकसित करने के लिए स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ रिटेल डेवलपर्स के बीच 5.8.2008 को समझौता हुआ।

नवंबर 2008: वाणिज्यिक कॉलोनी लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया।

दिसंबर 2008: वाणिज्यिक कॉलोनी लाइसेंस दिया गया।

जनवरी 2011: लाइसेंस नवीनीकृत किया गया।

मई 2015: बीजेपी नेतृत्व वाली मनोहर लाल खट्टर सरकार ने 14 मई 2015 में गुड़गांव के सेक्टर 83 में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा वाणिज्यिक उपनिवेशों के विकास के लिए लाइसेंस प्रदान करने की जांच करने के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया था। न्यायमूर्ति एस एन ढिंगरा आयोग को गठन जांच अधिनियम के आयोग के अधीन किया गया।

अगस्त 2016: ढिंगरा आयोग ने 182 पेज की रिपोर्ट हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को सौंपी।

अप्रैल 2017: ढिंगरा आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि रॉबर्ट वाड्रा ने 2008 में हरियाणा भूमि सौदे से 50.5 करोड़ रुपये के गैरकानूनी मुनाफा कमाए। ये सभी मुनाफे बिना किसी पैसे खर्च किए कमाए।

सितंबर 2018: मामले में रॉबर्ट वाड्रा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ गुरुग्राम और स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

अब आपको बताते हैं गांधी परिवार के घोटालों के बारे में, नेहरू के समय से लेकर आज के राहुल के वक्त तक किन-किन घोटालों को अंजाम दे चुका है देश का सबसे भ्रष्ट राजनीतिक परिवार पढ़िए-

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। जब तक एलआईसी को पता चला, उसे कई करोड़ का नुकसान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने बतौर कमीशन 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

नेशनल हेराल्ड मामले में करोड़ की हेराफेरी
गांधी परिवार पर अवैध रूप से नेशनल हेराल्ड की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति हड़पने का आरोप है। वर्ष 1938 में कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज नाम से तीन अखबार प्रकाशित करती थी। एक अप्रैल, 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया और राहुल गांधी ने ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नाम की कंपनी खोली और एजेएल को 90 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन दिया। एजेएल यंग इंडिया कंपनी को लोन नहीं चुका पाई। इस सौदे की वजह से सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एजेएल की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया। इस कंपनी में मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के 12-12 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76 प्रतिशत शेयर हैं। गांधी परिवार पर अवैध रूप से इस संपत्ति का अधिग्रहण करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। इस मामले में सोनिया और राहुल के विरुद्ध संपत्ति के बेजा इस्तेमाल का केस दर्ज कराया गया। अब इसी मामले में आयकर विभाग ने प्रियंका गांधी की संलिप्तता भी पाई है।

एक नजर कांग्रेस की सरकारों में हुए कुछ प्रमुख घोटालों पर-

कोयला घोटाला (2012)  1.86 लाख करोड़ रुपये
2जी घोटाला (2008)  1.76 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला 70,000करोड़ रुपये
कामनवेल्थ घोटाला (2010) 35,000 करोड़ रुपये
स्कार्पियन पनडुब्बी घोटाला  1,100 करोड़ रुपये
अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला 3,600 करोड़ रुपये
टाट्रा ट्रक घोटाला (2012) 14 करोड़ रुपये

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