Home गुजरात विशेष कांग्रेस किसानों को चकमा देती थी, बीजेपी चमक लाने में जुटी है

कांग्रेस किसानों को चकमा देती थी, बीजेपी चमक लाने में जुटी है

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बीजेपी जहां भी सत्ता में होती है साल के 365 दिन चौबीसों घंटे जनता के हित में सोचती रहती है, कार्य में जुटी होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र की सरकार हो या बीजेपी के शासन वाली राज्य सरकारें इन सबकी योजनाओं के केंद्र में हमेशा रहे हैं तो गरीब और किसान। अंत्योदय की अपनी इसी सोच के साथ गुजरात की रुपाणी सरकार ने किसानों को 3 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने की घोषणा की है।

गुजरात में किसानों को बिना ब्याज का कर्ज

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुजरात गौरव यात्रा की समाप्ति के बाद गुजरात गौरव सम्मेलन में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अपनी सरकार के इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कर्ज पर लगने वाला पूरा 7 प्रतिशत ब्याज राज्य और केंद्र सरकार मिलकर देंगे। इससे राज्य के खजाने पर हर साल 700 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। रूपाणी ने दावा किया कि सरकार के इस कदम से गुजरात के 25 लाख किसानों को फायदा होगा। गुजरात में अब तक किसानों को 1 प्रतिशत की दर से कर्ज दिया जाता है। 7 प्रतिशत की ब्याज में से 3-3 प्रतिशत ब्याज राज्य और केंद्र सरकार देती रही है। 

कांग्रेस ने तोड़ी थी किसानों की कमर

किसानों के लिए इस राहतकारी घोषणा के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी मंच पर मौजूद थे। इस घोषणा के बाद अमित शाह ने कहा: ‘’गुजरात के किसान कांग्रेस के शासनकाल में 16 प्रतिशत ब्याज दे रहे थे। अपने मुख्यमंत्री काल में नरेंद्र मोदी ब्याज दर को 1 प्रतिशत पर ले आये और विजय रूपाणी शून्य ब्याज पर ऋण देंगे।’’

शाह ने यह भी कहा : ‘’कांग्रेस को इस बात का जवाब देना चाहिए कि कौन सा राज्य शून्य ब्याज दर पर किसानों को कर्ज दे रहा है। कांग्रेस को पंजाब का नाम नहीं लेना चाहिए क्योंकि अकाली दल ने वहां पहले ही कर दिया था।‘’

बीजेपी की हर सरकार के लिए किसान अहम

गुजरात सरकार ने यह कर्ज अपने उन्हीं कदमों को आगे ले जाते हुए देने का फैसला किया है जो राज्य के किसानों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से उठाये जा रहे हैं। उधर कांग्रेस को किसानों के हक में उठाये गए इस कदम में भी इसलिए राजनीति दिख रही है क्योंकि वो गरीब-किसान के मुद्दों को भी हमेशा राजनीतिक तराजू पर तौलकर देखती आई है। कुछ महीने पहले ही गुजरात की जनता यह देख चुकी है कि कैसे कांग्रेस के विधायक बाढ़ में डूबे किसानों को उनकी हालत पर छोड़कर खुद दूसरे राज्य में मौज मना रहे थे।

 

कांग्रेस से खाया धोखा, बीजेपी में जताया भरोसा

अपने 60 सालों के शासन में कांग्रेस ने किसानों के साथ छल नहीं किया होता तो शायद वो इतनी बुरी तरह से नकारी नहीं जाती। एक तो किसानों के लिए उसने मजबूत योजनाएं नहीं बनाईं, दूसरा, जो भी योजनाएं बनीं उनमें से ज्यादातर जमीन पर लागू नहीं होकर सियासी नफा-नुकसान के खेल में उलझकर रह गईं। मुश्किल ये है कि किसानों के हक में बीजेपी के प्रयासों में भी कांग्रेस कोई भी अड़ंगा लगाने से बाज नहीं आती। गुजरात के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान रिकॉर्ड समय के लिए आचार संहिता को लागू रखा गया था। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी कह चुके हैं कि ऐसा कांग्रेस के दबाव में किया गया था ताकि तब राज्य के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को गरीब और किसानों के हित में कामकाज से रोका जा सके।

मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने को प्रतिबद्ध

जाहिर है कांग्रेस ने गरीब-किसानों के उत्थान के लिए खुद तो कुछ ठोस कदम नहीं ही उठाया, बीजेपी की किसान हितैषी कदमों को भी उसने रोकने के हर पैंतरे आजमाये। आज उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के किसान ये महसूस कर चुके हैं कि ये बीजेपी ही है जिसकी कथनी और करनी में फर्क नहीं। वजह ये है कि केंद्र की मोदी सरकार से लेकर इन सभी राज्यों की सरकारों ने किसानों की बेहतरी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। मोदी सरकार तो 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने को भी प्रतिबद्ध है।  

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