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कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति का शिकार हो रहे देश के किसान

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साठ वर्षों तक देश के शासन पर काबिज कांग्रेस को अब लग रहा है कि देश का किसान बदहाल है। वह भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित छह राज्यों में आंदोलन कर रही है और किसानों की बदहाली को लेकर भाजपा पर दोष मढ़ रही है। हालांकि कांग्रेस पार्टी इस बात पर एक शब्द नहीं बोल रही है कि देश के शासन में छह दशक रहने के बाद भी आखिर देश का किसान बदहाल क्यों है? वह इस बात पर भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है कि जिस कर्नाटक राज्य की सत्ता उसके हाथ में उसमें 5 वर्षों के दौरान 3500 किसानों ने क्यों आत्महत्या कर ली? कांग्रेस इस बात का जवाब भी नहीं दे रही कि यूपीए शासन के 10 वर्षों में एक लाख 70 हजार किसानों ने क्यों आत्महत्या कर ली?

दरअसल सच्चाई यही है कि कांग्रेस किसानों के नाम पर राजनीति करने और भावनाएं भड़काने का काम काम कर रही है। उसकी सोच केवल भाषणों और जुबानी सहानुभूति तक ही सीमित है, क्योंकि उसका एजेंडा स्पष्ट है। भाजपा शासित राज्यों में ही आंदोलन करने के पीछे का मकसद यही है कि इसी साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने वाले हैं और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात 2019 के आम चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रदेश हैं।

आंदोलन से देश के अरबों रुपये की संपत्ति नष्ट
किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह से अरबों रुपये की संपत्ति नष्ट की गई वह कांग्रेस की कुत्सित नीति का ही परिणाम है। हरियाणा के फतेहाबाद में मिल्क प्लांट के ट्रक को रोककर हजारों लीटर दूध सड़क पर गिरा दिया गया। वहीं कैथल में किसानों के कई ट्रक सब्जियों को सड़क पर फेंक दिया गया। महाराष्ट्र के पुणे-बेंगलुरू हाईवे पर भी किसानों के सैकड़ों लीटर दूध सड़कों पर बहा दिए गए। पंजाब के फरीदकोट और लुधियाना में सब्जियां और दूध फेंक दिया गया। वहीं महाराष्ट्र के संगरूर में दूध उत्पादकों को रोककर उनसे दूध छीनकर सड़कों पर बहा दिया गया। पुणे-मुंबई हाई-वे पर जाम लगाकर किसानों के हजारों क्विंटल सब्जियों को शहरों में पहुंचने ही नहीं दिया गया। राजस्थान के शाहपुरा और चूरू में किसानों की सब्जी और दूध सड़क पर फेंक दिए गए। जयपुर, दौसा सहित कई जिलों में 80 डेयरी समितियों में तोड़फोड़ हुई। यहां दूध लेकर आए किसानों को भी भगा दिया गया।

गांव बंदी से आम किसानों को नुकसान पहुंचा रही है कांग्रेस
किसान आंदोलन के नाम पर कांग्रेस के लोग एक ओर किसानों से दूध, फल और सब्जियों को जबरदस्ती छीन कर सड़क पर फेंक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गांवों के उत्पादों को शहरों तक पहुंचने नहीं दे रहे। जाहिर है इनके लिए किसान राजनीति करने का जरिया बन गए हैं, लेकिन किसानों के लिए ये तो उनका घर चलाने का जरिया है। किसी की मेहनत की कमाई को यूं जबरदस्ती जाया कर देना कहां तक जायज है? जाहिर है कांग्रेस द्वारा जबरदस्ती पैदा किए गए इस आंदोलन में उत्तेजित करने, संपत्ति नष्ट करने के पीछे यही उद्देश्य है कि इन प्रदेशों में सामाजिक कटुता फैलाकर शासन को अराजक बताया जाए और राजनीतिक रोटी सेंकी जाए।

किसान आंदोलन के नाम पर जो लोग उत्पात मचा रहे हैं वे कांग्रेस के ‘राजनीतिक गुंडे’ भर हैं। कारण यह है कि किसानों के संगठनों ने यह साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। लेकिन आंदोलन के नाम पर जिस तरह से किसानों के सामनों की बर्बादी की जा रही है वह कांग्रेस की नकारात्मक राजनीतिक का परिणाम है।

मंदसौर में किसानों के सीने पर गोलियां चलवाने की दोषी है कांग्रेस
वर्ष 2017 में भी कांग्रेस ने ऐसी ही साजिश रची थी ताकि मध्य प्रदेश के भीतर एक नकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सके। किसान आंदोलन के नाम पर हिंसा फैलाने की साजिश रची गई और उसे अमलीजामा भी पहनाया गया। कांग्रेस नेताओं की अगुआई में छह जिलों को हिंसा की आग में धकेल दिया गया था। छह लोगों की जान चली गई, लेकिन कांग्रेस अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करती रही।

11 जून को कांग्रेस नेता दिलीप मिश्रा ने कहा, ”इस बात की कसम खाके यहां से जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश के प्रतिपक्ष के नेता राहुल भैया के नेतृत्वक में आने वाले समय में सतना जिले का किसान इस सरकार के ऊपर गोली चलाएगा।”

इसी तरह रतलाम जिला पंचायत के उपाध्यक्ष डीपी धाकड़ का 3 जून का वीडियो सामने आया था। उन्होंने रतलाम में भाषण दिया था। इसमें वह कहते दिख रहे हैं कि मेरी बात सुनो। ये दम रखना है कि एक भी गाड़ी आ जाए तो जला दो।

शिवपुरी की विधायक शकुंतला खटीक का वीडियो भी सामने आया था। इसमें वह ग्वालियर के पास शिवपुरी में कह रही थीं कि थाने में आग लगा दो… थाने में आग लगा दो … जाहिर है वह अपने आसपास खड़ी भीड़ को उकसा रही हैं।


साजिश के तहत किसानों भड़काया जा रहा
बीते सभी चुनावों में यह साफ दिख रहा है कि कांग्रेस समाज के हर उस वर्ग को भड़का रही है जो भारतीय जनता पार्टी का समर्थक है। गुजरात चुनाव के दौरान दलित, ओबीसी और पटेलों को भाजपा से अलग हटाने की साजिश सभी के सामने है। इसी तरह कर्नाटक में जाति-धर्म और क्षेत्रवाद के नाम पर विभाजन की लकीरें खींची गईं। इसके बाद अब किसान आंदोलन के नाम पर भाजपा शासित राज्यों में भोले-भाले किसानों को भड़काया जा रहा है। जाहिर है कांग्रेस की राजनीति के कारण किसानों का न सिर्फ नुकसान हो रहा है बल्कि उन्हें बदनाम भी किया जा रहा है।

‘हल’ नहीं पहचानते हैं राहुल तो राजीव को लाल मिर्च के बारे में भी नहीं थी जानकारी!
वर्ष 2014 का एक वाकया है कि राजस्थान के देवली में राहुल गांधी को एक मंच पर धीरज गुर्जर, भवंरलाल मीणा और अन्यु कांग्रेसी नेताओं ने राहुल को हल भेंट किया। राहुल उसे देखकर आश्च1र्य में पड़ गए और पूछ बैठे की ‘यह क्याा है ?’ राहुल के इस सवाल के जवाब में अन्य् कांग्रेसी नेताओं ने उनको बताया कि सर यह किसानों के जीवनयापन का मुख्यग जरिया है इसे ‘हल’ कहते हैं ।

राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे और जोधपुर दौरे पर गए थे। उन्होंने मथानिया के मिर्ची की खेती करने वाले किसानों से पूछा था कि हरी मिर्च के दाम ज्यादा होते हैं या लाल मिर्च के? जब किसानों ने बताया कि लाल मिर्च के दाम ज्यादा होते हैं तो राजीव गांधी ने किसानों को सीधे लाल मिर्च ही उगाने की सलाह दे डाली थी। उन्होंने कहा, “आप हरी मिर्च क्यों पैदा करते हैं, लाल मिर्च की खेती क्यों नहीं करते। ताकि आपको फसल की बेहतर कीमत मिल सके!’’

 

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