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किसानों के नाम पर राहुल का फर्जीवाड़ा, जानिए किसान यात्रा का सच

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किसानों की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का फर्जीवाड़ा सामने आया है। ये फर्जीवाड़ा किसानों के नाम पर की गई है। किसानों का हमदर्द होने का दावा करने वाली कांग्रेस किसानों का कितना फिक्र करती है उसे आप इस फर्जीवाड़े से समझ सकते हैं।

यूपी में किसान यात्रा के समय कांग्रेस ने किसानों के जो मांग पत्र तैयार किए वो पूरी तरह से फर्जी है। अगर आप इन किसान पत्रों को गौर से देखेंगे तो इसमें हुए गड़बड़झाले का आपको पता चलेगा। कैच न्यूज ने इस बारे में एक एक्सक्लूसिव खबर प्रकाशित की है। कैच न्यूज की खबर के अनुसार कई पत्रों पर हैंड राइटिंग और दस्तखत बिल्कुल एक जैसे हैं।

मांग पत्र के प्रारूप में कई वर्ग हैं, जिन्हें किसानों को भरना था। इसमें किसानों के नाम, फोन नम्बर, गांव, खंड, जिला और कर्ज की राशि की जानकारी के कॉलम बनाए गए हैं। साथ ही दस्तखत के लिए भी जगह है।

राहुल गांधी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में किसान यात्रा कर उनकी मांगों को उठाया था। कांग्रेस ने उन्हीं किसानों की मांगों की लिस्ट प्रधानमंत्री को सौंपी है।

प्रधानमंत्री को सौंपे जाने से पहले कांग्रेस मुख्यालय के लॉन में रखे हुए इन पत्रों पर लिखे दर्जनों फोन नंबरों पर जब कैच न्यूज ने बात की तो नाम, पता, मोबाइल नंबर सब फर्जी निकला। नंबरों पर फोन करने पर उत्तर प्रदेश और पंजाब के किसान नहीं मिले। उदाहरण के लिए, कानपुर के सदाना गांव के किसान प्रदीप कुमार के नंबर पर फोन किया तो वह चंडीगढ़ के सरकारी कर्मी का फोन नंबर निकला।

इसी तरह यूपी की किसान जानकी दुलारी के नंबर पर फोन किया तो वह अहमदाबाद के रमेश का नंबर पाया गया, जिसका खेती से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। रमेश ने कहा कि मैं तो अहमदाबाद में व्यापारी हूं। पता नहीं मेरा नाम उस पत्र में कैसे आया। यह जरूर कोई फर्जीवाड़ा है।

जब राजेंद्र नाम के किसान को फोन किया तो वह ग्वालियर का बंटी निकला। ऐसे ही, कपूरी देवी का फोन नंबर तेलंगाना के किसी आदमी का पाया गया। स्नेहलता के नंबर पर इंदौर का कोई आदमी तो पुष्पा देवी के फोन नंबर पर महाराष्ट्र के किसी व्यक्ति ने जवाब दिया।

कैच ने किसान पत्रों पर लिखे करीब 15 ऐसे नंबरों पर फोन किए और सब के सब फर्जी निकले। इनमें से एक भी मोबाइल नंबर यूपी का नहीं था। ये सारे नंबर तेलंगाना, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के हैं।

इन मांग पत्रों के बारे में सबसे दिलचस्प इनके हस्ताक्षर हैं। मांग पत्र के ज्यादातर बंडलों में दस्तखत एक जैसे हैं। अगर मांग पत्र में किसी कथित किसान का नाम प्रदीप दर्ज है तो उसके नाम का पहला अक्षर (प) लिखकर गोला बना दिया गया है. अगर किसी का नाम गुरु लिखा है तो ‘ग’ लिखकर गोला बना दिया गया है। कह सकते हैं कि इस फर्जीवाड़े में सतर्कता की बजाय जल्दबाजी दिखाई गई है जिसकी वजह से यह आसानी से पकड़ में आ गया।

पंजाब के किसानों के भी मांग पत्रों के बंडलों में भी दस्तखत और हैंडराइटिंग एक जैसी हैं। गोपनीयता की शर्त पर पंजाब के एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कैच को बताया कि उसे पार्टी से 7000 किसान पत्र भरने के लिए दिए गए थे। इनमें से उसने 700 पत्र भरे थे। उससे जब पार्टी के किसी कार्यकर्ता ने पूछा कि 7000 पत्र क्यों नहीं भरे तो उसने कहा कि मैं अब और नहीं भर सकता।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मिलने से पहले बुधवार को मीडिया के सामने ये किसान मांग पत्र हाथ में लेते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दर-दर जाकर बड़ी मेहनत से ये मांग पत्र इकठ्ठे किए हैं। ये सभी मांग पत्र जल्द ही सरकार को सौंप दिए जाएंगे।

राहुल गांधी सितम्बर में उत्तर प्रदेश में किसान यात्रा पर निकले थे। इस दौरान उन्होंने 48 जिलों का दौरा किया। राज्य में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रशांत किशोर ने यह पहल की थी और किसान मांग पत्र भी उन्हीं के दिमाग की उपज थी।

देवरिया से किसान यात्रा शुरू होने से पहले प्रशांत किशोर ने अपनी टीम कोयात्रा वाले हर जिले में ये किसान पत्र भरवाने की जिम्मेदारी दी थी।

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