Home चुनावी हलचल राहुल गांधी नहीं बन पाएंगे प्रधानमंत्री, जानिए क्यों?

राहुल गांधी नहीं बन पाएंगे प्रधानमंत्री, जानिए क्यों?

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लोकसभा चुनाव के वोटिंग के बाद एग्जिट पोल की माने तो सभी का कहना है कि आएगा तो मोदी ही। एग्जिट पोल के आंकड़ों की बात करें तो एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन बनकर सामने आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी अकेले बहुमत हासिल कर सकती है। प्रधानमंत्री मोदी के सामने विपक्ष का कोई नेता टिकता नजर नहीं आ रहा है। एग्जिट पोल की तरह ही नतीजे आए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल जोर से उठने लगेंगे। धूम-धड़ाके के साथ सक्रिय राजनीति में आई प्रियंका गांधी भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई। मतदाता वंशवाद की राजनीति को खारिज कर विकासवाद की राजनीति को तरजीह दे रहे हैं।

आखिर विपक्षी एकता की बात करने वाले नेता क्यों राहुल गांधी के नाम पर भड़क जाते हैं?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस विपक्षी एकता के नाम पर बीजेपी को चुनौती देने की बात करते हैं, उसी के नेता कांग्रेस को कोई भाव नहीं देते। ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू, चंद्रशेखर राव जैसे दिग्गज नेता विपक्ष के नेता के रूप में राहुल की भूमिका को पूरी तरह से नकार चुके हैं। क्षेत्रीय दलों के इन नेताओं के रूख से साफ है कि राहुल गांधी 2019 की लड़ाई में अलग-थलग पड़े हुए हैं। शरद पवार, ममता बनर्जी, सीताराम येचुरी, नवीन पटनायक, चंद्रशेखर राव सरीखे नेता दशकों से राजनीति में हैं, इनकी अपने-अपने राज्यों में जनता पर पकड़ भी है, लेकिन एक दूसरे के तहत काम करने को कोई राजी नहीं है।

महागठबंधन हुआ तार-तार
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को पीएम पद का प्रत्याशी बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं, हर मंच और मौके पर उन्हें देश के अगले पीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिन सहयोगी दलों के बूते कांग्रेस राहुल को पीएम बनाने का सपना देख रही है, उन्हीं दलों के नेता दो टूक कह दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री का चयन तो चुनाव परिणाम के बाद ही किया जाएगा। यानि राहुल के लिए विपक्ष की सहमति से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनना दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो पाया। बीएसपी प्रमुख मायावती ने तो इसके लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया।

मायावती टटोल रही हैं अपनी संभावनाएं
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती का रुख भी बेहद कड़ा दिखाई दे रहा है। मायावती खुद को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर देख रही हैं, जाहिर है ऐसे में वह किसी दूसरे के नाम पर राजी कैसे हो सकती हैं। बहुजन समाज पार्टी के एक नेता ने साफ कहा कि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वक्त की मांग है कि मायावती प्रधानमंत्री बनें।

समाजवादी पार्टी ने कहा चुनाव बाद तय हो पीएम का नाम
मुंबई में हुई कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में राहुल गांधी को सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर सहमति जताई गई। लेकिन राहुल गांधी को विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर स्थापित करने की कोशिशों को अन्य दलों का साथ नहीं मिल पाया। समाजवादी पार्टी ने साफ संकेत दिए कि उसे राहुल गांधी की पीएम पद की उम्मीदवारी पर आपत्ति है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समय-समय पर स्पष्ट किया है कि विपक्ष की तरफ से पीएम कैंडिडेट कौन होगा, इसका फैसला चुनाव के नतीजों के बाद लिया जाएगा।

मुलायम सिंह को भी राहुल नामंजूर
समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर नहीं देखते हैं और राहुल गांधी को अपना नेता किसी भी तरह से नहीं मानते हैं।

आरजेडी ने कहा विपक्ष के कई नेताओं में पीएम बनने की क्षमता
कांग्रेस पार्टी के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल ने भी खुलेमन से राहुल गांधी को विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की पेशकश को स्वीकार नहीं किया है। लालू यादव के जेल जाने के बाद पार्टी संभाल रहे तेजस्वी यादव ने इशारा कर चुके हैं कि विपक्ष में कई ऐसे नेता हैं, जो प्रधानमंत्री पद की दावेदारी कर सकते हैं। राहुल की दावेदारी के बारे पूछने पर तेजस्वी यादव कह चुके हैं कि राहुल गांधी के साथ-साथ ममता बनर्जी, शरद पवार, मायावती, ये सभी नेता प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखते हैं। मतलब साफ है कि आरजेडी भी पूरी तरह से राहुल गांधी के साथ नहीं है।

ममता को भी राहुल स्वीकार नहीं
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री विपक्षी गठबंधन की बड़ी नेता हैं और उन्हें नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। ममता बनर्जी का रुख राहुल गांधी को लेकर किसी से छिपा नहीं है। अभी हाल ही में कोलकाता में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, इतना ही नहीं उन्होंने कांग्रेस और वाम दलों को बीजेपी के साथ हाथ नहीं मिलाने की चेतावनी भी दी थी। ममता के बयान से साफ है कि वो राहुल की अगुवाई को तो कतई स्वीकार नहीं कर सकती हैं। कहा तो यह भी जाता है कि ममता बनर्जी ने अभी तक राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनने की बधाई नहीं दी है। यानि ममता की चली तो राहुल का प्रधानमंत्री बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। ममता बनर्जी ने यह भी कहा है कि वह अभी बच्चे हैं।

शरद पवार ने दिखाया आईना
जब बाजार में तुअर दाल बिकने आती है तो हर दाना कहता है हम तुमसे भारी… लेकिन कीमत का पता तो बिकने पर ही चलता है।” साफ है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने यह बयान देकर जाहिर कर दिया है कि राहुल के पीएम बनने वाले बयान को वे गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने संकेत में ही सही, राहुल के पीएम पद की दावेदारी को भी खत्म कर दिया है।

पीएम पद के 11 उम्मीदवार
विपक्ष अधिकतर नेता स्वयं को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान रहे हैं। राहुल गांधी पहले ही पीएम पद के लिए खुद के नाम का एलान कर चुके हैं, वहीं शरद पवार, मायावती, ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षाएं भी जगजाहिर हैं। माना जा रहा है कि 11 दलों के शीर्ष नेताओं ने 2019 में गठबंधन की सरकार बनने की सूरत में खुद को पीएम पद के तौर पर पेश करने के लिए भी कमर कस ली है।

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