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कांग्रेस ने साजिश के तहत की थी बाबा साहब के नाम से छेड़छाड़!

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कोई भी व्यक्ति जब कुछ उपलब्धि हासिल करता है तब उसकी खुद की पहचान से अधिक वह अपने पिता के नाम से वह जाना जाता है। ये कहा जाता है कि- फलां के बेटे ने ये काम किया, फलां की बेटी ने बड़ा नाम किया। यह हमारी परम्परा है और हमारी संस्कृति भी यही है, लेकिन कांग्रेस ने देश की राजनीति का स्तर इतना नीचे गिरा दिया है कि देश के संविधान निर्माता बाबा साहब के नाम से उनके पिता का नाम ही गायब कर दिया।

गौरतलब है कि पश्चिम और दक्षिण के प्रदेशों में किसी भी व्यक्ति के नाम के साथ उनके पिता का नाम अवश्य जुड़ा रहता है। स्वयं बाबा साहेब आम्बेडकर भी इस परम्परा का पालन करते थे। संविधान की आठवीं अनुसूची की मूल प्रति में भी बाबा साहब का पूरा हस्ताक्षर देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा था।

दरअसल कांग्रेस ने डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का नाम बदलकर सिर्फ डॉ भीम राव अम्बेडकर कर दिया था। नाम बदलने के इस प्रकरण में कांग्रेस ने तीन बड़ी साजिश की… पहला डॉ आंबेडकर के नाम से ‘रामजी’ हटा दिया… दूसरा ये कि ‘आंबेडकर’ को ‘अंबेडकर’ कर दिया… तीसरा ये कि ‘भीमराव’ को ’भीम’ और ‘राव’ में अलग-अलग बांट दिया।

कांग्रेस ने ऐसी गलतियां क्यों की होंगी ये तो वह हर शख्स बता देगा जो पार्टी के राजनीतिक चरित्र को जानता है। हालांकि देश में करोड़ों लोग हैं जो कांग्रेस की राजनीति नहीं समझते। वास्तविकता यह है कि कांग्रेस को ‘राम’ नाम से ही चिढ़ है, इस कारण डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर के नाम से उनके पिता का नाम ‘रामजी’ ही हटा दिया।

जाहिर है कांग्रेस ने ‘राम’ के नाम से नफरत के कारण ही उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल का नाम ही डॉ आंबेडकर के नाम से हटवा दिया। लेकिन उत्तर प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल श्री राम नाईक ने इस गलती को पकड़ा और वर्ष 2017 से ही बाबा साहब के मूल नाम के साथ हुई इस छेड़छाड़ को सुधारने का अभियान चलाया। उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की। अब जाकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस भूल को स्वीकार कर लिया और इसमें सुधार को मंजूरी दे दी है।

 

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