Home विपक्ष विशेष क्या दिल्ली सरकार की डोर स्टेप डिलीवरी सेवा सिर्फ राजनीतिक शोशेबाजी है?

क्या दिल्ली सरकार की डोर स्टेप डिलीवरी सेवा सिर्फ राजनीतिक शोशेबाजी है?

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दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का बस एक ही काम है विवाद पैदा करना। दूसरों के कार्यों को लेकर तो विवाद करना इनका जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन अपने ही कार्यों को लेकर विवाद पैदा करने वाले यह इकलौते नेता है। एक दिन पहले 10 सितंबर को ही केजरीवाल ने भारी तामझाम के साथ दिल्ली में सरकारी सेवाओं की डोर स्टेप डिलीवरी की अपनी महात्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। योजना को शुरू हुए चौबीस घंटे भी नहीं बीते कि, केजरीवाल एंड कंपनी ने ऐसी हवा बनानी शुरू कर दी कि योजना को फेल करने की साजिश की जा रही है। सीएम केजरीवाल और उनकी पार्टी की इस हरकत से सवाल उठ रहा है कि कहीं यह सेवा सिर्फ राजनीतिक शोशेबाजी तो नहीं है?

डोर स्टेप डिलीवरी के तहत 40 सेवाएं घर पहुंचाने का ऐलान
दिल्ली सरकार की इस योजना के तहत जन्म प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, पानी का बिल, ड्राइविंग लाइसेंस जैसी 40 सेवाओं को दिल्लीवासियों के घर तक पहुंचाया जाना है। यह योजना एक अनूठा और अजूबा सा प्रयोग है। केजरीवाल सरकार पिछले कई वर्षों से इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए कोर्ट से लेकर उपराज्यपाल तक से लड़ रही थी।

असंभव और अजूबी योजना को लेकर सरकार को ही संशय!
लगता है कि इस असंभव और अजूबी योजना को लेकर केजरीवाल सरकार खुद ही संशय में है। आंकड़ों की बात करें तो, पहले दिन टोलफ्री नंबर 1076 पर दिल्ली वालों ने 21 हजार फोन कॉल की। इनमें से महज 2178 फोन कॉल ही कनेक्ट हो सकीं और सिर्फ 1286 फोन कॉलों का जवाब दिया जा सका। इन फोन कॉलों में से 369 लोगों ने सेवाओं के लिए ऑर्डर दिए और केवल 7 लोगों से दस्तावेज कलेक्ट हो पाए। उपरोक्त आंकड़ों ने केजरीवाल सरकार के होश उड़ा दिए हैं। जाहिर है कि किसी भी सरकारी योजना की लॉन्चिंग से पहले काफी तैयारी की जाती है और कम से कम शुरुआती दौर में तो योजना लागू होने में कोई दिक्कत नहीं आती है। जिस प्रकार से पहले दिन 21 हजार फोन कॉल में से सिर्फ करीब 2 हजार कॉले कनेक्ट हो पाई, उससे साफ है कि केवल 10 फीसदी कॉल ही जुड़ पाई हैं।

योजना की असफलता के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया
पहले दिन के आंकड़े यह बताने के लिए काफी है कि केजरीवाल सरकार की डोर स्टेप डिलीवरी योजना औंधे मुंह गिर गई है। हैरानी की बात यह है कि केजरीवाल एंड कंपनी ने इसकी भी तैयारी कर रखी थी। पहले दिन ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर झूठ फैलाना शुरू कर दिया कि विपक्षी दल योजना को फेल करने की साजिश रच रहे हैं। इससे भी बड़ी हैरानी की बात है कि सीएम केजरीवाल ने भी ऐसे ट्वीट को रीट्वीट कर दिया। जिस प्रकार से केजरीवाल ने ट्वीट किया है, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यह राजनीतिक शोशेबाजी से अधिक कुछ भी नहीं है और केजरीवाल सिर्फ इस योजना के लिए जरिए पॉलिटिकल माइलेज लेना चाहते हैं, जनता को सुविधा देना उनका मकसद नहीं है।

सोशल मीडिया पर सीएम केजरीवाल को लोगों ने लगाई लताड़
सीएम केजरीवाल की इस हरकत के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने केजरीवाल के इस ट्वीट के बाद उन्हें जमकर धोया। लोगों का कहना है कि इस असंभव सी योजना को फेल तो होना ही था, इसलिए केजरीवाल समेत उनकी पूरी पार्टी ने इसका ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ने की पूरी तैयारी कर रखी थी।

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