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प्रधानमंत्री उजाला योजना के तहत अब तक 36 करोड़ से ज्यादा LED बल्ब वितरित

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार लोगों को सस्ता और सुलभ बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक प्रधानमंत्री उजाला योजना के तहत अब तक देशभर में 36.06 करोड़ से ज्यादा LED बल्ब वितरित किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा 29 अक्टूबर 2019 तक का है। मोदी सरकार की इस ऐतिहासिक पहल से जहां बिजली की बचत हो रही हैं वहीं लोगों की बिजली बिल में कमी आई है। 

अब तक हुए 36.6 करोड़ LED बल्ब के वितरण से प्रतिवर्ष 18,734 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो रही है। इसके साथ ही 46, 434 mn kWh से ज्यादा प्रतिवर्ष ऊर्जा की बचत हो रही है।

पर्यावरण के लिए वरदान बना LED बल्ब की योजना

प्रधानमंत्री उजाला योजना के तहत 36 करोड़ से ज्यादा LED बल्बों का वितरण, पर्यावरण के लिए वरदान साबित हो रहा है। प्राप्त आंकड़ें के अनुसार इससे 3.79 करोड़ टन प्रतिवर्ष CO2 उत्सर्जन में कमी आई है। 

सड़कें हो रही हैं ‘उजाला’

प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जनवरी 2015 को 100 शहरों में पारंपरिक स्ट्रीट और घरेलू लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाने के कार्यक्रम की शुरूआत की थी। इस राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (NSLP) का उद्देश्य 1.34 करोड़ स्ट्रीट लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाना है।

मोदी सरकार ने अब तक 36 करोड़ से ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं। जिससे करीब 18,341 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत हो रही है। पहले एलईडी बल्ब की कीमत 350-400 रुपए थी अब इसकी कीमत अब 45-70 रुपये तक आ गई है।

सभी स्टेशनों पर LED लाइटें लगाने का काम पूरा 

रेलवे ने देशभर के रेलवे स्टेशनों पर LED लाइट लगाने के अपने लक्ष्य को  मार्च 2018 में ही हासिल कर चुका है। इस कदम से रेलवे को हर साल बिजली बिल में 50 करोड़ रुपये की बचत हो रही है और 60,000 टन तक कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।   

देशभर में लग रही हैं बिजली बचाने वाली LED स्ट्रीट लाइटें

ऊर्जा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रम Energy Efficiency Services Limited ने देश में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रम शुरू किए हैं। ऐसा ही एक प्रमुख कार्यक्रम है- राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (NSLP) जिसमें पहले से लगी परंपरागत स्ट्रीट लाइटों को हटाकर उनकी जगह LED स्ट्रीट लाइटें लगाई जा रही हैं,ताकि कम बिजली से ही पूरी रोशनी मिल सके। इसके तहत लगने वाली स्ट्रीट लाइटों की संख्या आज एक करोड़ को पार कर गयी है। इनसे हर साल 6.71 अरब किलोवाट ऊर्जा की बचत होगी और कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में 46.3 लाख टन की कमी आएगी।

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

एक अप्रैल, 2015 की स्थिति के अनुसार देश के 18,452 गांवों में बिजली नहीं थी, लेकिन मई 2017 तक दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 13,511 गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। इस योजना के तहत गांवों में बिजली की आपूर्ति दो फीडरों के माध्यम से होती है, जिसमें एक फीडर कृषि के लिए और दूसरी फीडर गांव के घरों के लिए होती है।

1,75,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य

2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के 1,75,000 मेगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक मार्च 2014 तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 34,000 मेगावाट थी, जो सितंबर 2019 में बढ़कर 82,580 मेगावाट हो गई है। सितम्‍बर 2019 के अंत तक भारत में 82,580 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की स्‍थापना की जा चुकी है और 31,150 मेगावाट की क्षमता स्‍थापित करने के विभिन्‍न चरणों में है।

2022 तक 175 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य

भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से एवं पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले वर्षों के दौरान सोलर पार्क, सोलर रूफटॉप योजना, सौर रक्षा योजना, नहर के बांधों तथा नहरों के ऊपर सीपीयू सोलर पीवी पॉवर प्‍लांट के लिए सौर योजना, सोलर पंप, सोलर रूफटॉप के लिए बड़े कार्यक्रम शुरू किये गए हैं।

मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से कार्बन उत्सर्जन घटा

पेरिस समझौते के तहत भारत ने विकास को गति देने के साथ-साथ अपने कार्बन उत्सर्जन घटाने का संकल्प किया है। जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से गरीब और कमजोर तबके के लोगों को बचाने के लिए यह जरूरी है कि पूरा विश्व एक ऐसी जीवन शैली अपनाए, जिससे प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते हम अल्प कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।

 

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