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पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीति में पूरी तरह सफल रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

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पाकिस्तान को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रणनीतिक कूटनीति अब पूरी तरह सफल साबित हो रही है। इसका सबूत खुद पाकिस्तान ही चीख-चीख कर दे रहा है। भारत तो पाकिस्तान की असलियत हमेशा से जानता था, लेकिन यह प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शीता का नतीजा है कि विश्व भर के देश पाकिस्तान की किसी बात पर अब भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि लंबे समय से अमेरिका का चहेता रहा पाकिस्तान, आज अमेरिकी आंखों का ही सबसे बड़ा कांटा बन चुका है।

पाकिस्तान ने भी माना भारत का है दबदबा
आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका से लगातार मिल रही फटकार को लेकर पाकिस्तान ने भारत पर दोषारोपण शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यहां तक कह दिया है कि पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों से जाहिर होता है कि अमेरिका भारत की भाषा बोलने लगा है। आसिफ ने वहां के संसदीय समिति के सामने अपना यह दर्द जाहिर किया है। दरअसल पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के ताजा रुख ने उसकी हेकड़ी ढीली कर दी है। पाकिस्तान के सत्ता के गलियारों में इस बात की चिंता जताई जा रही है कि कहीं भारत के दबाव में अमेरिका, पाकिस्तान की ऐसी की तैसी करना न शुरू कर दे।

पाकिस्तान से अमेरिका का मोहभंग
वास्तव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी है। ट्रंप ने कहा था कि 33 अरब डॉलर की अमेरिकी मदद के बदले पाकिस्तान ने उसे ‘झूठ और धोखे’ के सिवाय कुछ नहीं दिया। सच्चाई तो ये है कि एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका से पैसे की उगाही करता रहा और दूसरी तरफ उसका इस्तेमाल आतंकवादियों को पनाह देने में करता रहा। इसी का नतीजा है कि अमेरिका ने परिणाम दिखाने तक पाकिस्तान को दी जाने वाली और 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सुरक्षा मदद रोक दी है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने करीब 1,626 करोड़ रुपये की मदद रोक दी थी।

आतंकवाद के अड्डे के रूप में बदनाम हुआ पाकिस्तान
पाकिस्तान आज दुनियाभर में कहीं मुंह छिपाने लायक नहीं बचा है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अथक मेहनत का ही परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी के कारण ही अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवादियों की शरणस्थली वाले देशों की सूची में भी डाल दिया था। इसके तहत अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया कि, पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण और बढ़ावा देता है। उस अमेरिकी रिपोर्ट में लिखा गया था, ”ये आतंकवादी संगठन पाकिस्तान से चल रहे हैं। पाकिस्तान में इनको ट्रेनिंग मिल रही हैं और पाकिस्तान से ही इन आतंकवादी संगठनों की फंडिंग हो रही है।” रिपोर्ट में इस बात का साफ-साफ जिक्र था कि भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। अमेरिका के मुताबिक दुनियाभर में सक्रिय 60 ग्लोबल आतंकी संगठनों में अकेले 13 पाकिस्तान की धरती से ही सक्रिय हैं। इसी आधार पर कुछ अमेरिकी सांसद उसे टेररिस्ट स्टेट घोषित करने की मांग भी कर रहे हैं।

पाकिस्तान के मामले में चीन को छोड़ ज्यादातर देश भारत के साथ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जोरदार तरीके से सभी देशों से एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का आह्वान कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका से भी प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्ती दिखाने का आग्रह किया है। इस का परिणाम ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद के जिक्र से भी देखने को मिला। चीन की तमाम चालबाजियों के बावजूद ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के समस्त रूपों की निंदा की। ब्रिक्स श्यामन 2017 के घोषणापत्र में लश्कर-ए-तयैबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनों का जिक्र किया गया, जो पाकिस्तान की देख-रेख में पनपे और पले-बढ़े हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका ने अब पाकिस्तान के खिलाफ जो सख्त कदम उठाना शुरू किया है, उसकी बुनियाद प्रधानमंत्री मोदी की पहल से ही शुरू हुई थी। कुछ महीने पहले ही डोनाल्ड ट्रंप के साथ साझा बयान में दोनों नेताओं ने पाकिस्तान का नाम लेकर उसे अपने देश का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल नहीं होने देने के लिए आगाह किया था। दोनों नेताओं ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी, कि वो मुंबई के 26/11 हमले, पठानकोट और भारत में बाकी आतंकवादी हमलों की साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे, लेकिन पाकिस्तान कभी भी अपनी आदतों से बाज आने को तैयार नहीं हुआ। इसी का नतीजा है कि पहली बार पाकिस्तान को अपने माई-बाप रहे अमेरिका की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।

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