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जानिए डिजिटल पेमेंट की जरुरत और क्या हैं तरीके

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देश की अर्थव्यवस्था में नकद लेनदेन का अनुपात सकल घरेलू उत्पाद में 12.04 प्रतिशत है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अनुपात को 12 प्रतिशत से कम कर के 6 प्रतिशत पर लाना चाहते हैं। नकद लेनदेन के कारण नकदी की व्यवस्था करने में सरकार को 21,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आता है। यह खर्च नकदी की छपाई, नकद के भंडारण में, एटीएम तक पहुँचाने में और इस पर आने वाले ब्याज पर होता है।

नकद में लेनदेन से कालाधन और नकली धन भी अर्थव्यव्स्था में प्रवेश करता है। एक आकलन के अनुसार कालेधन पर चलने वाली देश में अर्थव्यवस्था, सकल घरेलू उत्पाद का 19 प्रतिशत है। इससे सरकार को सकल घरेलू उत्पाद का 3.2 प्रतिशत कर के रुप में प्राप्त होने वाला धन नहीं मिलता है।

देश में 99 प्रतिशत आबादी के पास आधार कार्ड है और 35 प्रतिशत आबादी इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ी हुई है। इससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ाना आसान है। 5 दिसम्बर 2016 को वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी विभागों के लिए नियम बना दिया की 5,000 रुपए से ऊपर के सभी भुगतान डिजिटल माध्यम से ही होंगें। सरकार सभी प्रकार की सब्सिडी, छात्रवृत्ति, पेंशन, मनरेगा का भुगतान डिजिटल माध्यम से कर रही है।

डिजिटल पेमेंट के तरीके

  • बैकिंग कार्ड
  • यूएसएसडी
  • आधार आधारित पेपेंट सिस्टम
  • यूपीआई
  • मोबाइल वालेट
  • इंटरनेट बैंकिग
  • मोबाइल बैकिंग
  • माइक्रो एटीएम

बैकिंग कार्ड

  • क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड- बैंकिग कार्ड हैं, जो सबसे सुविधाजनक हैं।
  • इन पर लेन देन को सुरक्षित रखने के लिए पिन और ओटीपी का सुरक्षा कवच होता है।
  • रुपे, वीसा, मास्टरकार्ड इत्यादि बैंकिग कार्ड में ही आते हैं। इनके माध्यम से किसी भी दुकान, इंटरनेट या टेलीफोन से सामान खरीदा जा सकता है।
  • इसके लिए बैंक में एक खाता खुलवाना पड़ता है, जिसके लिए केवाईसी देना जरूरी होता है।
  • देश में बैंकिंग कार्डों की संख्या कुछ इस प्रकार है।
    यूएसएसडी
    (Unstructured Supplementary Service Data)
  • डिजिटल माध्यम से भुगतान का यह मोबाइल बैंकिंग का विशेष तरीका है
  • जिसमें *99# अनस्टकर्चड सपिलमेंटरी सर्विस डाटा चैनल पर काम करता है। यह बेसिक फीचर मोबाइल फोन के लिए है। इसके लिए डाटा कनेक्टिविटी की कोई जरुरत नहीं हैं।
  • इसके माध्यम से समाज के वे लोग बैंकिंग से जुड़े हैं जो बैंकिंग सेवाएं अभी तक किन्हीं कारणों से नहीं ले पा रहे थे।
  • बेसिक मोबाइल से *99# डायल करने पर एक मेन्यू आता है जिसके जरिए हम लेनदेन कर सकते हैं। यह नबंर सभी मोबाइल सेवाओं के लिए है।
  • इसके माध्यम से खाते से खाते में भुगतान, खाते में राशि की जानकारी और मिनी स्टेटमेंट प्राप्त कर सकते हैं। इसके माध्यम से एक दिन में 5,000 रुपये और एक साल में 50,000 रुपये तक ट्रांसफर किये जा सकते हैं।
  • देश के 51 बैंकों में यह सुविधा है और 12 भाषाओं में इस पर काम होता है।
  • इसके लिए बैंक में केवाईसी आधारित खाते के साथ साथ मोबाइल नबंर होना चाहिए।

आधार आधारित पेपेंट सिस्टम

  • आधार आधारित पेमेंट सीधे बैंकों द्वारा संचालित किये जाते हैं, जिसमें ऑनलाइन होने वाले प्वाइंट ऑफ सेल या माइक्रो एटीएम के भुगतान किसी भी बिजनेस कॉरेसपोंडेंट या बैंक मित्र जिसके पास आधार को प्रमाणित करने की सुविधा हो कर सकता हैं।
  • इसके लिए केवाईसी आधारित एक बैंक खाता होना चाहिए। खाते का आधार संख्या से जुड़ा होना जरूरी है।
  • नेशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया(एनपीसीआई) के अनुसार जनवरी 2017 में इसके माध्यम से करीब 2.65 मिलियन लेनदेन हुआ।

यूपीआई

  • यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस के माध्यम से एक बैंक के कई खातों को मोबाइल ऐप जरिए से संचालित किया जाता है।
  • हर बैंक का अपना एक यूपीआई ऐप होता है। इसके लिए बैंक खाते का मोबाइल नंबर से जुड़ना और स्मार्ट फोन का इंटरनेट कन्केशन के साथ होना जरूरी है।
  • भीम एक भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा शुरू किया गया एक मोबाइल ऐप है। डिजिटल लेनदेन का सबसे सुरक्षित माध्यम है। भीम ऐप में आप लगभग सभी भारतीय बैंक खातों को इस्तेमाल कर सकते है।
  • आरबीआई द्वारा 1 फरवरी 2017 को जारी किये गये आंकड़ों के हिसाब से जनवरी 2017 में इस पर 4.2 मिलीयन ट्रांजेक्शन हुए जिसमें 1,666 करोड़ रुपयों का लेनदेन हुआ। ट्रांजेक्शन की दृष्टि से जनवरी 2017 में दिसम्बर 2016 की तुलना में 111.4 प्रतिशत अधिक ट्रांजेक्शन हुआ।

मोबाइल वॉलेट

  • डिजिटल रुप में नकदी का होना ही मोबाइल वॉलेट है।
  • मोबाइल वॉलेट एप में क्रेडिट कार्ड या डेविट कार्ड को जोड़ सकते हैं या ऑनलाइन नकद इस ऐप में डाल सकते हैं।
  • प्लास्टिक कार्ड के इस्तेमाल की जगह अपने स्मार्टफोन से खरीदारी की जा सकती है। कई बैंकों के ई-वॉलेट हैं, कुछ प्राइवेट कंपनियां भी ई-वॉलेट लेकर आयी हैं। इसमें पेटीएम, फ्रीचार्ज, मोबीक्विक, ऑक्सीजेन, एमरुपी, एयरटेल मनी, जिओ मनी, एसबीआई बडी, इटज़कैश, साइटरसपे, वोडाफोन एमपेसा, एक्सिस बैंकलाइम, आईसीआईसीआई पॉकेट, स्पीडपे, इत्यादि

इंटरनेट बैंकिग

  • किसी भी बैंक या वित्तिय संस्थान के वेबसाइट पर बैंक की सभी सुविधाओं का लाभ मिलता है।
  • इसे ऑनलाइन बैंकिंग या ई-बैंकिंग भी कहा जाता है।
  • डिजिटल का यह तरीका सबसे अधिक प्रचलित है।

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